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कंपनी विलय में मिले शेयर पर लगेगा टैक्स : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि कंपमी विलय में शेयर प्राप्ति पर केवल तभी टैक्स लगेगा जब वास्तविक वाणिज्यिक लाभ उत्पन्न हो.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

अगर किसी कंपनी के अमलगमेशन (विलय) के तहत शेयर प्राप्त होते हैं और ये शेयर वाणिज्यिक रूप से लाभदायक हैं, तो उन्हें इन्कम टैक्स एक्ट की सेक्शन 28 के तहत व्यवसायिक आय (Business Income) के रूप में टैक्सेबल माना जा सकता है. यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने (Supreme Court) ने एक मामले की सुनवाई करते हुए की है. तो आइए जानते हैं आखिर क्या है ये पूरा मामला?

जिंदल समूह की निवेश कंपनियों के असेसमेंट्स का विवाद

यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट के सामान्य निर्णय से उत्पन्न सिविल अपीलों के एक बैच से जुड़ा है. मामले में जिंदल समूह की निवेश कंपनियों के असेसमेंट्स का विवाद सामने आया था, जिनके पास ऑपरेटिंग कंपनियों में प्रमोटर होल्डिंग्स के रूप में शेयर थे. ये शेयर बैलेंस शीट में निवेश के रूप में दर्शाए गए थे और इन्हें ऋणदाताओं के सामने गैर-विक्रय प्रतिबद्धताओं (Non-disposal Undertakings) के तहत रखा गया था. कोर्ट-स्वीकृत योजना के अनुसार, Jindal Ferro Alloys Limited का विलय Jindal Strips Limited में किया गया, और शेयरधारकों को निर्धारित अनुपात में विलयित इकाई के शेयर दिए गए. शेयरधारकों ने इन्हें पूंजीगत संपत्ति (Capital Asset) मानकर सेक्शन 47(vii) के तहत छूट का दावा किया. हालांकि, रेवेन्यू ने इसे स्टॉक-इन-ट्रेड माना और नए शेयरों का मूल्य व्यवसायिक आय के रूप में टैक्सेबल घोषित किया.

मुख्य विवाद और कोर्ट का रुख

मामले की जड़ सेक्शन 28 की व्याख्या और अमलगमेशन छूट के बीच संबंध थी. ट्रिब्यूनल ने पहले असेसी की दलील मानी थी कि जब तक शेयर बेचे या ट्रांसफर नहीं किए जाते, तब तक कोई लाभ नहीं होता. हाई कोर्ट ने इस पर असहमति जताई और मामले को वापस ट्रिब्यूनल भेज दिया. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्टॉक-इन-ट्रेड के बदले अमलगमेशन के तहत प्राप्त शेयर व्यवसायिक लाभ उत्पन्न कर सकते हैं और ये सेक्शन 28 के तहत टैक्सेबल हैं. सेक्शन 28 एक व्यापक प्रावधान है, जो व्यवसाय के दौरान उत्पन्न होने वाले सभी वास्तविक लाभों को टैक्स करने के लिए बनाया गया है, चाहे वह नकद में प्राप्त हो या किसी वस्तु के रूप में. लाभ का निर्धारण वाणिज्यिक रूप से वास्तविक होने पर होता है, न कि केवल कानूनी बिक्री या ट्रांसफर के अस्तित्व पर.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हर शेयर का स्वचालित रूप से टैक्सेबल होना जरूरी नहीं है. केवल वास्तव में व्यापारिक लाभ उत्पन्न करने वाले, स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन योग्य और वाणिज्यिक रूप से मूर्त लाभ देने वाले शेयर टैक्स के दायरे में आएंगे. यदि शेयरों पर प्रतिबंध हैं, स्वतंत्र रूप से ट्रेडेबल नहीं हैं या मूल रूप से निवेश के रूप में हैं, तो अमलगमेशन योजना के तहत केवल स्टैट्यूटरी सब्स्टिट्यूशन से कोई लाभ उत्पन्न नहीं होता.

टैक्सेशन का समय

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सेक्शन 28 के तहत टैक्स तब लागू होता है जब वास्तव में शेयर प्राप्त हों और वाणिज्यिक लाभ उत्पन्न हो. अमलगमेशन योजना की स्वीकृति या नियुक्त तिथि पर टैक्स नहीं लगता. अनरियलाइज्ड या काल्पनिक लाभों पर टैक्स नहीं लगाया जा सकता.

मामले को ट्रिब्यूनल को वापस भेजा गया

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को इन्कम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) को वापस भेज दिया है ताकि तथ्यात्मक जांच की जा सके. ट्रिब्यूनल अब यह तय करेगा कि:

1. शेयर स्टॉक-इन-ट्रेड के रूप में रखे गए थे या नहीं.

2. प्राप्त शेयर स्वतंत्र रूप से मूर्त लाभ देने योग्य और मूल्यांकन योग्य थे या नहीं.


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