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चुनावों से पहले अप्रवासियों की संख्या को कम करने के लिए सुनक सरकार उठाया ये कदम
सुनक सरकार का लक्ष्य है कि अगले साल होने वाले चुनावों से पहले अप्रवासियों की संख्या में कमी लाई जाई. क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ये बड़ा मुद्दा बन सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
अगले साल होने वाले चुनावों से पहले अप्रवासियों की संख्या को कम करने के लिए सुनक सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने कामकाजी वीजा के लिए योग्यताओं को सख्त करते हुए सैलरी के मानकों में इजाफा कर दिया है. पहले जहां ब्रिटेन में रहने के लिए सैलरी का क्राइटेरिया पहले 26000 पाउंड (2738743.75 रुपये) हुआ करता था लेकिन अब उसे बढ़ाकर 38700 पाउंड(4002779.32 रुपये) कर दिया है. सरकार का मानना है कि इससे संख्या में कमी आ सकेगी.
आखिर क्या है ये पूरा मामला?
सरकार के गृह सचिव जेम्स क्लेवरली ने सोमवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा कि भविष्य में ब्रिटेन में नौकरी करने के लिए आने वालों को 38700 पाउंड (4002779.32 रुपये) के सैलरी पैकेज के नियमों का पालन करना होगा. पहले ये 26000 पाउंड (2738743.75 रुपये) हुआ करता था. उन्होंने कहा कि इसका मकसद सालाना अप्रवासियों की संख्या को 3 लाख तक सीमित करना है.इसके साथ ही सरकार ने परिवार के सदस्यों को लाने वाले अप्रवासियों के लिए कर्मियों को वेतन में दी जाने वाली 20 प्रतिशत छूट को समाप्त करने जैसे कदम भी उठाए गए हैं. सुनक सरकार के इस कदम को एक तरह से यू टर्न की तरह देखा जा रहा है. क्योंकि कुछ महीने सरकार ने इस सूची में राजमिस्त्रियों को भी डाला था जिससे देश में निर्माण सेक्टर में तेजी आ सके.
सरकार की ओर से उठाए गए हैं ये और कदम
क्वेलरली की ओर से अपव्रवासियों की संख्या को कम करने के लिए और जो उपाय अपनाए गए हैं उनमें वीजा को स्पांसर करने वाले को अब ज्यादा रेग्यूलेशन का पालन करना होगा. इसी तरह से सरकार की ओर सालाना हेल्थ इमीग्रेशन सरचार्ज को 66 प्रतिशत बढ़ाकर 1035 पाउंड तक कर दिया गया है. यही नहीं अगर कोई अप्रवासी अपनी पत्नी को ब्रिटेन लाना चाहता है तो उसकी सैलरी 38700 पाउंड होने चाहिए. यही नहीं सरकार ग्रेजुएट पढ़ाई के मकसद से आने वाले छात्रों के रूट की समीक्षा भी करने जा रही है.
अगले साल होने वाले है ब्रिटेन में सरकार
दरअसल ब्रिटेन में अगले साल चुनाव होने वाले हैं. सरकार चुनावों में जाने से पहले इस नंबर में कमी लाना चाहती है. सबसे दिलचस्प बात ये है कि सरकार को इन नियमों की घोषणा करते ही विरोधी बयानों का सामना करना पड़ा. उनका इस समस्या को लेकर तर्क है कि अगर इन नियमों को सख्त किया गया तो मुद्रास्फीती के दौर में मैन पॉवर की भी कमी का सामना करना पड़ेगा. दूसरा सबसे खास बात ये है कि ये नियम स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
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