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जबरन बीमा और म्यूचुअल फंड बेचने पर सख्ती, RBI ने बैंकों के लिए प्रस्तावित किए नए नियम

आरबीआई के इस कदम से न केवल मिस-सेलिंग पर अंकुश लगेगा, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में दीर्घकालिक भरोसा और स्थिरता भी बढ़ेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

बैंक ग्राहकों को बीमा, म्यूचुअल फंड और अन्य थर्ड पार्टी उत्पाद जबरन बेचने या भ्रामक तरीके से थमाने की बढ़ती शिकायतों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने कड़ा रुख अपनाया है. आरबीआई ने ऐसे प्रोत्साहन ढांचे पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है, जो बैंक कर्मचारियों को तीसरे पक्ष के उत्पाद बेचने के लिए प्रेरित करता है. साथ ही, ग्राहक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सख्त दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया गया है.

थर्ड पार्टी उत्पादों पर इंसेंटिव खत्म करने का प्रस्ताव

आरबीआई ने ‘विनियमित इकाइयों द्वारा वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री’ से जुड़े संशोधित मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं. इसमें प्रस्ताव है कि बैंक कर्मचारियों को बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड या अन्य थर्ड पार्टी उत्पादों की बिक्री पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बंद की जाए. नियामक का मानना है कि ऐसे इंसेंटिव मिस-सेलिंग को बढ़ावा देते हैं.

साथ ही बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म या यूजर इंटरफेस में ‘डार्क पैटर्न’ जैसे भ्रामक डिजाइन का इस्तेमाल न हो.

अब नहीं होगी ‘बंडलिंग’ की जबरदस्ती

मसौदे के अनुसार कोई भी बैंक अपने किसी उत्पाद को बेचने के लिए किसी थर्ड पार्टी उत्पाद को अनिवार्य रूप से नहीं जोड़ेगा. यानी अगर बैंक लोन दे रहा है तो ग्राहक को किसी विशेष बीमा पॉलिसी या म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा. यदि बैंक अपने उत्पाद के साथ किसी तीसरे पक्ष का उत्पाद पेश करता है, तो ग्राहक को किसी अन्य कंपनी से वही उत्पाद लेने का स्पष्ट विकल्प देना होगा.

मिस-सेलिंग साबित होने पर पूरा पैसा लौटाना होगा

आरबीआई ने साफ किया है कि अगर भ्रामक बिक्री साबित होती है तो संबंधित बैंक को ग्राहक को पूरी राशि वापस करनी होगी. इतना ही नहीं, ग्राहक को हुए नुकसान की भरपाई भी बैंक को करनी पड़ेगी. यह प्रावधान बैंकों की जवाबदेही को और सख्त बनाता है.

कर्मचारियों पर टारगेट का दबाव नहीं

नियामक ने कहा है कि बैंकों की आंतरिक प्रतिस्पर्धा या बिक्री नीतियां ऐसी नहीं होनी चाहिएं, जो कर्मचारियों या डायरेक्ट सेलिंग एजेंटों को उत्पाद बेचने के लिए अनुचित दबाव डालें. बिक्री का जोर ग्राहक की जरूरतों पर आधारित होना चाहिए, न कि केवल टारगेट पूरा करने पर.

बैंकिंग और बीमा सेक्टर पर असर संभव

विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रस्तावित नियम बैंकों और बीमा/म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं. वर्तमान में कई बीमा और एसेट मैनेजमेंट कंपनियां अपने उत्पादों के वितरण के लिए बैंकों पर काफी निर्भर हैं, जबकि बैंकों को इनकी बिक्री पर कमीशन या फीस मिलती है. ऐसे में नए नियमों से इस मॉडल पर असर पड़ सकता है.

पिछले साल नवंबर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बैंकिंग तंत्र में भरोसा बनाए रखने की जरूरत पर जोर देते हुए मिस-सेलिंग पर रोक लगाने की बात कही थी. आरबीआई भी बार-बार बैंकों को अपनी मुख्य गतिविधियों पर ध्यान देने की सलाह देता रहा है.

बिना सहमति लोन से नहीं जोड़ा जा सकेगा कोई उत्पाद

मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोई बैंक ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना उसे ऋण सुविधा के जरिए किसी उत्पाद या सेवा की खरीद के लिए फंड नहीं दे सकता. यदि नियामक ने शिकायत के लिए अलग समयसीमा तय नहीं की है तो ग्राहक नियम और शर्तों की हस्ताक्षरित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर मिस-सेलिंग के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है.

ग्राहकों के फीडबैक की होगी नियमित समीक्षा

आरबीआई ने प्रस्ताव किया है कि बैंक हर छह महीने में ग्राहकों के फीडबैक पर रिपोर्ट तैयार करें और उसके आधार पर अपनी नीतियों की समीक्षा करें. साथ ही ग्राहकों से टेलीफोन पर संपर्क या व्यक्तिगत मुलाकात सामान्यतः सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही की जाएगी और इसके लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होगी.

 


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