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दूध में मिलावट पर कड़ा कदम: अब बिना रजिस्ट्रेशन नहीं होगा कारोबार, FSSAI ने जारी की एडवाइजरी
उपभोक्ताओं के लिए यह पहल सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दूध उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
देश में दूध की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने डेयरी क्षेत्र में नियमों को और कड़ा कर दिया है. खाद्य नियामक ने देशभर के दूध उत्पादकों और विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि वे दूध से जुड़े कारोबार के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण या लाइसेंस प्राप्त करें.
FSSAI द्वारा जारी एक एक एडवाइजरी में कहा गया है कि कई दूध उत्पादक और विक्रेता बिना पंजीकरण के ही कारोबार कर रहे हैं, जो खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है. ऐसे में दूध आपूर्ति श्रृंखला पर निगरानी मजबूत करने और मिलावट की समस्या पर लगाम लगाने के लिए यह कदम उठाया गया है.
बिना लाइसेंस कारोबार करने वालों पर सख्ती
एडवाइजरी में बताया गया है कि कुछ दूध उत्पादक, जो डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य नहीं हैं, और कई दूध विक्रेता बिना पंजीकरण या लाइसेंस के खाद्य व्यवसाय चला रहे हैं. FSSAI ने स्पष्ट किया कि ऐसे सभी उत्पादकों और विक्रेताओं को तुरंत अपने कारोबार के लिए पंजीकरण कराना होगा.
नियामक ने कहा कि डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य, जो अपना पूरा दूध संबंधित सोसाइटी को ही सप्लाई करते हैं, उन्हें इस नियम से छूट होगी. लेकिन जो उत्पादक स्वतंत्र रूप से दूध बेचते हैं या सप्लाई करते हैं, उन्हें FSSAI के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा.
दूध में मिलावट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता
यह निर्देश ऐसे समय आया है जब देश के कई हिस्सों में दूध में मिलावट की आशंकाओं से जुड़े मामले सामने आए हैं. FSSAI के अनुसार हाल के महीनों में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दूध की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिली हैं. भारत में दूध में मिलावट लंबे समय से खाद्य सुरक्षा की बड़ी समस्या रही है, खासकर असंगठित क्षेत्र में जहां छोटे स्तर के उत्पादक और विक्रेता सीधे उपभोक्ताओं को दूध बेचते हैं और उन पर निगरानी कम होती है.
नए नियमों के जरिए सरकार ऐसे कारोबारियों को औपचारिक व्यवस्था में लाकर दूध आपूर्ति प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना चाहती है.
राज्यों को लाइसेंस जांचने के निर्देश
FSSAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि दूध उत्पादकों और विक्रेताओं के पास वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र या लाइसेंस मौजूद हो. इसके साथ ही अधिकारियों को दूध आपूर्ति से जुड़ी भंडारण व्यवस्था की नियमित जांच करने को भी कहा गया है.
विशेष रूप से दूध को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल होने वाले चिलर की समय-समय पर जांच की जाएगी ताकि उचित तापमान बना रहे और दूध खराब न हो.
विशेष पंजीकरण अभियान चलाने की तैयारी
नियामक ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष पंजीकरण अभियान चलाएं. इन अभियानों का उद्देश्य ऐसे छोटे और असंगठित दूध उत्पादकों तथा विक्रेताओं को पंजीकरण के दायरे में लाना है, जो अभी तक FSSAI के साथ रजिस्टर्ड नहीं हैं.
दूध और डेयरी उत्पादों पर नियमित जांच
एडवाइजरी में यह भी बताया गया कि FSSAI पहले ही दूध और डेयरी उत्पादों पर विशेष जांच अभियान चलाने के निर्देश दे चुका है. इन अभियानों की कार्रवाई रिपोर्ट हर महीने 15 और 30 या 31 तारीख तक नियामक को भेजना अनिवार्य किया गया है, ताकि निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके.
उपभोक्ताओं के लिए क्या होगा असर
विशेषज्ञों के मुताबिक इस कदम से भारत के डेयरी बाजार के बड़े असंगठित हिस्से पर निगरानी बढ़ेगी.इससे दूध की आपूर्ति श्रृंखला अधिक पारदर्शी होने की संभावना है और बाजार में मिलावटी या खराब तरीके से संग्रहीत दूध आने के मामलों में कमी आ सकती है.
उपभोक्ताओं के लिए यह पहल सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दूध उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
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