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मेक इन इंडिया को मजबूती: अब भारतीय सेना को स्वदेशी कार्बन फैब्रिक सप्लाई करेगी अग्निवस्त्रा
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह पहल रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारत की रक्षा जरूरतों में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. अब भारतीय सेना को एडवांस कार्बन फैब्रिक और हाई-परफॉर्मेंस कंपोजिट मैटेरियल के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. तमिलनाडु स्थित कंपनी अग्निवस्त्रा प्राइवेट लिमिटेड ने सेना के साथ रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत इन अत्याधुनिक सामग्रियों की डिजाइन और आपूर्ति देश में ही की जाएगी.
सेना के लिए कस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते के तहत भारतीय सेना के लिए एडवांस कार्बन और संबद्ध मैटेरियल की विशेष रूप से डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग की जाएगी. इन उत्पादों को इस तरह इंजीनियर किया जाएगा कि वे क्रिटिकल और हाई-स्टेक डिफेंस एप्लिकेशन में इस्तेमाल के योग्य हों.
कार्बन फैब्रिक और कंपोजिट मैटेरियल मिसाइल, रॉकेट और अन्य रक्षा प्रणालियों में अहम भूमिका निभाते हैं. इनकी मजबूती, हल्कापन और ताप सहन क्षमता इन्हें रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है.
इसरो और DRDO की भरोसेमंद सप्लायर
अग्निवस्त्रा प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी. वर्ष 2012 में कंपनी ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए कार्बन फैब्रिक सप्लायर के रूप में अर्हता प्राप्त की. कार्बन फैब्रिक रॉकेट कंपोनेंट का एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है और इसका उपयोग मिसाइल, स्पेस शटल, सैटेलाइट और अन्य स्पेस मिशन में किया जाता है. कंपनी ने भारत के प्रमुख स्पेस लॉन्च प्रोजेक्ट्स PSLV, GSLV और LVM3 के लिए कार्बन फैब्रिक की आपूर्ति की है.
इसके अलावा, अग्निवस्त्रा रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की भी सप्लायर रही है, जिससे इसकी तकनीकी क्षमता और विश्वसनीयता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
विदेशी मुद्रा की बचत और लागत में कमी
सरकार ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत घरेलू निर्माण को बढ़ावा दे रही है ताकि रणनीतिक क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता कम की जा सके. पहले एडवांस कार्बन फैब्रिक और हाई-परफॉर्मेंस कंपोजिट मैटेरियल विदेशों से मंगाए जाते थे, जिससे लागत अधिक होती थी और विदेशी मुद्रा का बहिर्वाह भी होता था. देश में ही निर्माण होने से न केवल लागत में कमी आएगी, बल्कि विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी. साथ ही रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी.
आत्मनिर्भर रक्षा की ओर एक और कदम
भारतीय सेना के साथ यह समझौता केवल एक व्यावसायिक करार नहीं, बल्कि भारत के रक्षा निर्माण इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इससे यह संकेत मिलता है कि देशी कंपनियां अब अत्याधुनिक और क्रिटिकल डिफेंस मैटेरियल बनाने में सक्षम हो रही हैं.
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