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अमेरिकी मंजूरी से रिलायंस को रणनीतिक फायदा, वेनेजुएला से तेल सीधे खरीद संभव
यह कदम कच्चे तेल की लागत घटाने, रूसी तेल पर निर्भरता कम करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में मदद करेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
अमेरिका ने भारत की दिग्गज ऊर्जा कंपनी Reliance Industries को वेनेजुएला से सीधे कच्चा तेल खरीदने के लिए जनरल लाइसेंस जारी किया है. इस फैसले से कंपनी को बिना अतिरिक्त बाधाओं के वेनेजुएला का तेल आयात करने की अनुमति मिल गई है. माना जा रहा है कि इससे रिलायंस की कच्चे तेल की लागत घटेगी और सप्लाई स्रोतों में विविधता आएगी.
लाइसेंस के लिए जनवरी में किया था आवेदन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस ने जनवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिकी प्रशासन से इस लाइसेंस के लिए आवेदन किया था. लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी वेनेजुएला से पहले से निकाले जा चुके तेल की खरीद, निर्यात, बिक्री और रिफाइनिंग कर सकेगी.
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने वेनेजुएला की ऊर्जा इंडस्ट्री पर लगे प्रतिबंधों में आंशिक ढील देने के संकेत दिए हैं. वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolás Maduro की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र में सीमित राहत की बात कही थी, ताकि तेल आपूर्ति से जुड़े बड़े समझौतों को आगे बढ़ाया जा सके.
20 लाख बैरल की खरीद, रूसी तेल का विकल्प तैयार
इस महीने की शुरुआत में रिलायंस ने ग्लोबल ट्रेडर **Vitol** से 20 लाख बैरल वेनेजुएला का तेल खरीदा. बाजार सूत्रों का कहना है कि वेनेजुएला का हैवी क्रूड आमतौर पर डिस्काउंट पर मिलता है, जिससे कंपनी को लागत प्रबंधन में मदद मिलेगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला से सीधी खरीद रिलायंस को रूसी तेल पर निर्भरता कम करने का विकल्प देगी. इससे भू-राजनीतिक जोखिम भी घटेंगे और सप्लाई चेन अधिक संतुलित होगी.
14 लाख बैरल प्रतिदिन रिफाइनिंग क्षमता
रिलायंस इंडस्ट्रीज देश में दो बड़ी रिफाइनरी संचालित करती है, जिनकी कुल क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रति दिन है. उन्नत रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के लिए कंपनी पहले भी वेनेजुएला के हैवी क्रूड की नियमित खरीदार रही है. हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 2025 की शुरुआत में उसे यह खरीद बंद करनी पड़ी थी. अब नए लाइसेंस के साथ कंपनी फिर से इस सप्लाई चैनल को सक्रिय कर सकेगी.
रूस से तेल आयात पर टैरिफ विवाद में राहत
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारतीय सामानों पर लगाया गया अतिरिक्त 25% टैरिफ 7 फरवरी से हटा दिया है. अगस्त 2025 में लगाए गए इस अतिरिक्त शुल्क के कारण भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया था. अब अतिरिक्त 25% शुल्क हटाने के साथ ही भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18% करने का ऐलान किया गया है. इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में सुधार की संभावना जताई जा रही है.
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी लाइसेंस मिलने से रिलायंस इंडस्ट्रीज को कच्चे तेल की लागत घटाने, सप्लाई स्रोतों में विविधता लाने और रिफाइनिंग मार्जिन मजबूत करने में मदद मिलेगी. वेनेजुएला के तेल निर्यात को भी इससे गति मिल सकती है. कुल मिलाकर, यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलते समीकरणों के बीच भारत-अमेरिका व्यापारिक सहयोग का एक अहम उदाहरण माना जा रहा है.
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