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स्वच्छ ऊर्जा की ओर कदम : महाराष्ट्र में शुरू हुआ हाईटेक पायलट बायोमीथेनेशन संयंत्र
यह स्वदेशी माइक्रोबियल तकनीक के साथ भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति देने की दिशा में एक नया कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
मुंबई मुख्यालय स्थित जैव ऊर्जा क्षेत्र की अग्रणी इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी कंपनी ऑर्गेनिक रिसाइकलिंग सिस्टम्स लिमिटेड (ORSL) ने नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अधीन सरदार स्वरन सिंह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायो-एनर्जी (SSS-NIBE) के साथ मिलकर सोलापुर बायोएनर्जी सिस्टम्स (SBESPL) की सुविधा में SEED/कल्चर आधारित पायलट बायोमीथेनेशन संयंत्र का औपचारिक शुभारंभ किया है.
इस पायलट संयंत्र की स्थापना भारत में स्थायी और विकेंद्रीकृत बायोएनर्जी समाधानों की दिशा में एक मील का पत्थर है. यह संयंत्र THERMI-NIBE माइक्रोबियल कंसोर्टियम की दक्षता को जांचने के लिए विकसित किया गया है, जिसमें नेपियर घास, कृषि अवशेषों और खाद्य/कृषि-औद्योगिक अपशिष्ट जैसे विविध लिग्नोसेलुलोसिक और जैविक फीडस्टॉक का एनेरोबिक डाइजेशन किया जाएगा. यह अत्याधुनिक सुविधा भारत सरकार की SATAT (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन) पहल के अनुरूप कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्य करेगी.
अपशिष्ट से ऊर्जा की ओर
SBESPL की स्थापना पहले नगर निगम ठोस अपशिष्ट को बायोगैस और जैविक खाद में परिवर्तित करने के लिए की गई थी. पिछले दस वर्षों की सफल संचालन अवधि के बाद अब यह संयंत्र शहरी अपशिष्ट के नवाचारपूर्ण उपयोग के एक राष्ट्रीय मॉडल में बदल रहा है.
SEED/कल्चर आधारित पायलट संयंत्र की शुरुआत के साथ, यह इकाई अब केवल एक अपशिष्ट प्रसंस्करण केंद्र नहीं बल्कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा नवाचार यात्रा का एक रणनीतिक केंद्र बन गई है. यह संयंत्र भविष्य की बायोमीथेनेशन तकनीकों को परिभाषित करने में मदद करेगा और परिपत्र अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा संक्रमण की दिशा में भारत के प्रयासों को मजबूती देगा.
परियोजना के मुख्य उद्देश्य
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कठिन जैविक अपशिष्टों के उच्च पाचन दर प्राप्त कर गैस उत्पादन को अधिकतम करना है. संयंत्र व्यावसायिक पैमाने पर उपयोग की तैयारी, पर्यावरणीय स्थिरता, और प्रक्रिया की स्थिरता का प्रदर्शन करेगा. भविष्य में फीडस्टॉक की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ORSL ने सोलापुर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नेपियर घास की खेती भी शुरू की है, जो एक उच्च उत्पादकता वाली लिग्नोसेलुलोसिक फसल है.
नेतृत्व ने किया इस नई पहल का स्वागत
ORSL के CEO और पूर्णकालिक निदेशक यशस भंड ने कहा, "इस पायलट संयंत्र का शुभारंभ भारत के बायोएनर्जी क्षेत्र में नवाचार को केंद्र में रखकर विकास की हमारी दीर्घकालिक रणनीति की दिशा में एक अहम कदम है. SSS-NIBE के साथ हमारा सहयोग केवल तकनीकी नहीं, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान को व्यावसायिक रूप से लागू करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है." उन्होंने आगे कहा,"SEED/कल्चर आधारित प्रक्रिया को वास्तविक परिस्थितियों में परखकर हम न केवल गैस उत्पादन को प्रभावित करने वाले अहम कारकों को समझ रहे हैं, बल्कि एक व्यवसायिक रूप से व्यवहार्य और बड़े पैमाने पर दोहराई जा सकने वाले CBG मॉडल की नींव भी रख रहे हैं."
SSS-NIBE के उपनिदेशक डॉ. सचिन कुमार ने बताया, "THERMI-NIBE कल्चर जटिल जैविक अवशेषों को अधिक कुशलता से ऊर्जा में बदलने की दिशा में वर्षों की अनुसंधान का परिणाम है. सोलापुर में इसके व्यावहारिक उपयोग से हम प्रयोगशाला से वास्तविक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहे हैं." उन्होंने यह भी जोड़ा, "यह परियोजना यह सिद्ध करती है कि कैसे अनुसंधान-आधारित नवाचार को व्यवसायिक और पर्यावरणीय रूप से प्रभावशाली स्वच्छ ऊर्जा समाधानों में बदला जा सकता है."
राष्ट्रीय प्रतिरूप के रूप में आगे की राह
सोलापुर में इस संयंत्र की सफल स्थापना और परीक्षण के बाद, यह पायलट परियोजना पूरे देश में बायोमीथेनेशन तकनीक के राष्ट्रीय प्रतिरूप के रूप में उभरने की ओर अग्रसर है. इस परियोजना से प्राप्त तकनीकी मानक और संचालन अंतर्दृष्टि, राष्ट्रीय बायोएनर्जी मिशन के तहत भावी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाएंगे और स्वदेशी नवाचार के जरिए आत्मनिर्भर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के सपने को साकार करने में योगदान देंगे.
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