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भारत में स्टील की मांग 8% बढ़ेगी, लेकिन मार्जिन पर दबाव बना रहेगा : ICRA

ICRA की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि भारत में स्टील की मांग FY2026 में मजबूती दिखाएगी, लेकिन घरेलू उत्पादकों के लिए मार्जिन पर दबाव बना रहेगा. बढ़ती आपूर्ति और कमजोर वैश्विक कीमतें परिचालन माहौल को चुनौतीपूर्ण बनाए रखेंगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago

रेटिंग एजेंसी ICRA ने मंगलवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में स्टील की मांग लगभग 8 प्रतिशत बढ़ सकती है. हालांकि, कमजोर स्टील कीमतों के कारण घरेलू उत्पादकों के मार्जिन पर दबाव बना रहेगा. एजेंसी ने चेतावनी दी कि अगले कुछ तिमाहियों में स्टील निर्माताओं के लिए परिचालन माहौल चुनौतीपूर्ण रहेगा.

परिचालन मार्जिन और उद्योग का लेवरेज

ICRA के अनुसार, उद्योग का परिचालन मार्जिन FY2026 में लगभग 12.5 प्रतिशत पर स्थिर रहने की संभावना है. यह पहले की अपेक्षाओं से कम है, जब 100–120 बेसिस पॉइंट्स की वृद्धि की उम्मीद थी. कम आय के कारण उद्योग का लेवरेज (कुल कर्ज/ऑपरेटिंग प्रॉफिट) FY2026 में लगभग 3.4 गुना होने का अनुमान है, जो FY2025 में 3.5 गुना और अगस्त 2025 के अनुमान 3.1 गुना से थोड़ा अधिक है.

नई क्षमता और आपूर्ति का दबाव

ICRA के सीनियर वाइस-प्रेसीडेंट गिरिशकुमार कदम ने कहा, “घरेलू स्टील उद्योग ने पिछले तीन से चार तिमाहियों में रिकॉर्ड 15 मिलियन टन क्षमता जोड़ी है, और चालू वित्त वर्ष के अंत तक अतिरिक्त 5 मिलियन टन क्षमता आ जाएगी. मांग में वृद्धि बनी रहेगी, लेकिन नई आपूर्ति ने अस्थायी अधिशेष पैदा कर दिया है, जिससे स्टील कीमतों पर दबाव है.”

कीमतों की स्थिति

घरेलू हॉट-रोल्ड कॉइल की कीमतें अप्रैल 2025 में 12 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क के बाद 52,850 रुपये प्रति टन तक बढ़ीं, लेकिन सितंबर में यह लगभग 49,500 रुपये और नवंबर में लगभग 46,000 रुपये प्रति टन रह गई. वर्तमान में कीमतें आयात समकक्ष (import parity) से कम हैं, जो आपूर्ति दबाव को दर्शाती हैं.

वैश्विक स्टील परिदृश्य

वैश्विक परिदृश्य भी कमजोर बना हुआ है. चीन के स्टील निर्यात ने 2025 के पहले नौ महीनों में रिकॉर्ड 88 मिलियन टन तक पहुंचा, जो पिछले साल के 80.6 मिलियन टन से अधिक है. ICRA के अनुसार, निकट भविष्य में वैश्विक स्टील कीमतों में कोई बड़ी रिकवरी की संभावना नहीं है. FY2026 के पहले सात महीनों में चीनी हॉट-रोल्ड कॉइल के निर्यात की औसत कीमत USD 465 प्रति टन रही, जो पिछली वित्तीय वर्ष में USD 496 प्रति टन थी.

आयात और सुरक्षा शुल्क का महत्व

ICRA ने चेतावनी दी कि FY2026 में भारत के स्टील आयात में गिरावट की उम्मीद है, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे बाजारों में बढ़ते व्यापारिक बाधाएं वैश्विक अधिशेष आपूर्ति को भारत की ओर मोड़ सकती हैं. एजेंसी ने कहा, “इस संदर्भ में सुरक्षा शुल्क जारी रखना आवश्यक है, ताकि आयात में अचानक वृद्धि को रोका जा सके और घरेलू कीमतों को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखा जा सके.”

कीमतों और इनपुट लागत का अनुमान

FY2026 में घरेलू हॉट-रोल्ड कॉइल की औसत कीमत लगभग 50,500 रुपये प्रति टन रहने का अनुमान है. इनपुट लागत में थोड़ी गिरावट की संभावना है, जबकि प्रीमियम हार्ड कोकिंग कोयला की कीमत पहले छह महीनों में लगभग 9 प्रतिशत गिरकर USD 192 प्रति टन रहने का अनुमान है. FY2026 में प्रति टन परिचालन लाभ लगभग USD 108 होने का अनुमान है, जो FY2025 के USD 110 से थोड़ा कम है.

भविष्य में क्षमता विस्तार और जोखिम

मध्यम अवधि में, घरेलू स्टील निर्माता FY2031 तक 80–85 मिलियन टन अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की योजना बना रहे हैं, जिसके लिए USD 45–50 बिलियन का निवेश आवश्यक होगा. ICRA ने चेतावनी दी कि यदि आय में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ, तो इस विस्तार से लेवरेज में तेज वृद्धि हो सकती है, जिससे उद्योग बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाएगा.

ग्रीन स्टील की दिशा

ग्रीन स्टील संक्रमण पर कदम ने कहा कि FY2030 में भारत की कुल स्टील मांग में ग्रीन स्टील का हिस्सा लगभग 2 प्रतिशत (लगभग 4 मिलियन टन) था, जो FY2040 तक लगभग 10 प्रतिशत (लगभग 30 मिलियन टन) और FY2050 तक 40 प्रतिशत (लगभग 150 मिलियन टन) तक बढ़ सकता है. उन्होंने कहा, “लेकिन ग्रीन स्टील की अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण है. बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत USD 1.5–1.6 प्रति किलोग्राम तक गिरनी चाहिए, जो निकट भविष्य में मुश्किल लगती है.”


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