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स्टारलिंक का भारत में बड़ा प्लान! 30 हजार उपग्रहों के लिए फिर मांगी मंजूरी, सीधे मोबाइल से जुड़ेगा नेटवर्क

दूसरी पीढ़ी के उपग्रह नेटवर्क के लिए दोबारा आवेदन, नई तकनीक से दूरदराज इलाकों तक सीधे मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाने की तैयारी

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक (Starlink) ने भारत में अपने दूसरी पीढ़ी के उपग्रह नेटवर्क के लिए एक बार फिर मंजूरी मांगी है. कंपनी ने करीब 30 हजार उपग्रह तैनात करने का प्रस्ताव दिया है. खास बात यह है कि नए आवेदन में ऐसी तकनीक भी शामिल है, जिसके जरिए भविष्य में मोबाइल फोन और अन्य उपकरण सीधे उपग्रह नेटवर्क से जुड़ सकेंगे.

दूसरी पीढ़ी के नेटवर्क के लिए फिर किया आवेदन

स्टारलिंक ने भारत में अपने पहले और दूसरे चरण के उपग्रह नेटवर्क के लिए पहले भी आवेदन किया था. भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र यानी इन-स्पेस ने कंपनी के पहली पीढ़ी के नेटवर्क को मंजूरी दी थी.

इस नेटवर्क में 4,408 निम्न पृथ्वी कक्षा वाले उपग्रह शामिल हैं. इनके जरिए स्टारलिंक भारत में उपग्रह आधारित ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने की तैयारी कर रही है. हालांकि, दूसरी पीढ़ी के नेटवर्क के लिए पहले किया गया आवेदन मंजूर नहीं हो पाया था. अब कंपनी नए आवेदन के जरिए दूसरी पीढ़ी के उपग्रह नेटवर्क को भारत में मंजूरी दिलाने की एक और कोशिश कर रही है.

सीधे मोबाइल से जुड़ सकेगा उपग्रह नेटवर्क

नए प्रस्ताव की सबसे खास बात सीधे उपकरण से जुड़ने वाली कनेक्टिविटी है. इस तकनीक के जरिए विशेष रूप से तैयार मोबाइल फोन और अन्य उपकरण सीधे उपग्रह से जुड़ सकेंगे. इससे हर बार अलग उपग्रह डिश या टर्मिनल की जरूरत नहीं पड़ेगी. खासकर पहाड़ी, दूरदराज और उन इलाकों में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है, जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर है या मोबाइल टावर पहुंचाना मुश्किल है.

नियमों का इंतजार

भारत में मोबाइल को सीधे उपग्रह से जोड़ने वाली सेवाओं के लिए नियामकीय ढांचा अभी पूरी तरह तय नहीं हुआ है. दूरसंचार नियामक प्राधिकरण इस मुद्दे पर विचार कर रहा है और सरकार को स्पेक्ट्रम बैंड तथा अन्य जरूरी नियमों पर फैसला करना है.

पारंपरिक दूरसंचार कंपनियों ने भी ऐसी उपग्रह सेवाओं को लेकर चिंता जताई है. उनका कहना है कि अगर उपग्रह कंपनियां सीधे मोबाइल उपभोक्ताओं को कनेक्टिविटी उपलब्ध कराती हैं, तो उन पर भी दूरसंचार कंपनियों के समान नियम लागू होने चाहिए.

लंबे समय में 42 हजार उपग्रहों की योजना

स्पेसएक्स की योजना दूसरी पीढ़ी के नेटवर्क के तहत लंबे समय में करीब 42 हजार उपग्रह तैनात करने की है. भारत में फिलहाल कंपनी ने करीब 30 हजार उपग्रहों के लिए मंजूरी मांगी है. जरूरत के आधार पर भविष्य में अतिरिक्त उपग्रहों के लिए भी आवेदन किया जा सकता है.

भारत के उपग्रह इंटरनेट बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

भारत में उपग्रह आधारित इंटरनेट बाजार को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है. रिलायंस जियो, भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब और अमेजन जैसी कंपनियां भी इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं. स्टारलिंक को पहली पीढ़ी के नेटवर्क के लिए पहले ही इन-स्पेस से मंजूरी मिल चुकी है. हालांकि, व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले कंपनी को स्पेक्ट्रम, सुरक्षा मंजूरी और अन्य नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी.

ब्रॉडबैंड के साथ मोबाइल कनेक्टिविटी पर भी नजर

अगर स्टारलिंक के दूसरी पीढ़ी के नेटवर्क और सीधे मोबाइल से जुड़ने वाली सेवा को भारत में मंजूरी मिलती है, तो कंपनी का दायरा केवल उपग्रह आधारित ब्रॉडबैंड तक सीमित नहीं रहेगा. वह सीधे मोबाइल उपकरणों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने वाले क्षेत्र में भी कदम रख सकेगी.

भारत के दूरदराज और कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों को देखते हुए यह तकनीक स्टारलिंक के लिए बड़ा अवसर बन सकती है. हालांकि, इसकी शुरुआत और विस्तार सरकार के नियमों, स्पेक्ट्रम आवंटन और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा.
 


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