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भारत में Starlink को मिला सैटेलाइट इंटरनेट सेवा का लाइसेंस: Airtel-Jio को मिलेगी कड़ी टक्कर
Starlink के भारत में प्रवेश से सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज होने की उम्मीद है. खासकर दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड पहुंचना मुश्किल होता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं देने की मंजूरी मिल गई है. दूरसंचार विभाग ने उसे ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) सेवा लाइसेंस जारी कर दिया है. इस तरह, Starlink अब आधिकारिक रूप से देश में Airtel-backed OneWeb और Jio Satellite Communications के साथ उपग्रह संचार की दौड़ में शामिल हो गई है.
लंबे समय से लंबित था Starlink का आवेदन
Starlink ने नवंबर 2022 में लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन कुछ नियामकीय बाधाओं के चलते यह फंसा रहा. दूरसंचार विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी को 7 मई को लाइसेंस के आशय पत्र (Letter of Intent) दिया गया था और एक महीने बाद, जून में इसे अंतिम लाइसेंस प्रदान कर दिया गया.
स्पेक्ट्रम के लिए अब Starlink कर सकेगी आवेदन
लाइसेंस मिलने के बाद Starlink अब भारत में अपनी तकनीक का परीक्षण करने के लिए स्पेक्ट्रम के लिए आवेदन कर सकती है. अधिकारियों ने बताया कि आवेदन करने के 15 से 20 दिनों के भीतर परीक्षण के लिए स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया जाएगा.
IN-SPACe की अंतिम मंजूरी अभी भी लंबित
हालांकि Starlink को GMPCS लाइसेंस मिल गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उसे भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) से अंतिम स्वीकृति मिली है या नहीं. सैटकॉम क्षेत्र में Amazon का Project Kuiper भी एक बड़ा दावेदार है, जिसे अभी भारत सरकार की मंजूरी का इंतजार है.
दुनियाभर में Starlink की बढ़ती पहुंच
Starlink वर्तमान में 125 से अधिक देशों में Earth’s lower orbit में स्थित अपने 7,600 से ज्यादा उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट सेवाएं दे रही है. यह नेटवर्क SpaceX द्वारा संचालित है, जो मस्क की ही एक अन्य कंपनी है. हाल ही में इसे पाकिस्तान में अस्थायी पंजीकरण मिला, जहां 2025 तक सेवाएं शुरू होने की उम्मीद है. मई में बांग्लादेश ने भी Starlink को आवश्यक लाइसेंस प्रदान किए.
दक्षिण एशिया में तेजी से विस्तार
इस उपमहाद्वीप में Starlink को पहली बार भूटान ने फरवरी में अपनी सेवाओं के लिए अपनाया. अप्रैल में भारत की प्रमुख कंपनियां Airtel और Reliance Jio ने Starlink के साथ अलग-अलग समझौते किए. इस हफ्ते की शुरुआत में Starlink ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में अपनी सेवाएं शुरू कर दीं, जिससे यह स्पष्ट है कि कंपनी तेजी से विकासशील और कम आय वाले देशों में विस्तार कर रही है.
Starlink को किन चुनौतियों का करना पड़ा सामना?
लाइसेंस प्रक्रिया में देरी का एक कारण यह था कि Starlink उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के स्वामित्व संबंधी खुलासे के मानदंडों का पालन नहीं कर पा रही थी. साथ ही सरकार और कंपनी के बीच इस बात को लेकर भी गतिरोध था कि सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अनुरोध किए जाने पर उसे कॉल डेटा रिकॉर्ड देने होंगे और संकट के समय सेवाएं बंद करनी होंगी.
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