57 लाख रुपये खर्च कर सेंसेक्स को 240 अंक हिलाया, SEBI की जांच में बड़ा खुलासा

सेंसेक्स की क्लोजिंग कीमत एक छोटे से कमरे में तय होती है, जहां लगभग कोई ट्रेड नहीं करता. 13 अगस्त को कोई व्यक्ति सिर्फ 57 लाख रुपये लेकर वहां पहुंचा और इसे 240 अंक ऊपर कर दिया.

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Monday, 24 August, 2026
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पलक शाह

57 लाख रुपये. मुंबई में यह एक शादी या एक महंगी कार हो सकती है. यह वास्तविक पैसा है, लेकिन बहुत बड़ा पैसा नहीं है. इससे कोई फैक्ट्री नहीं बनती.

13 अगस्त की दोपहर किसी ने लगभग इतनी ही रकम खर्च की और सेंसेक्स को हिला दिया, किसी एक शेयर को नहीं, बल्कि पूरे इंडेक्स को, जो भारत की 30 सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों को ट्रैक करता है. देश के हर टेलीविजन स्क्रीन पर चलने वाला और अखबारों के पहले पन्ने पर छपने वाला यह नंबर सिर्फ इसलिए 240 अंक ऊपर गया क्योंकि किसी ने उसे वहां पहुंचाने के लिए करीब 57 लाख रुपये चुकाए.

यह कोई सिद्धांत नहीं है. यह 19 अगस्त को हस्ताक्षरित SEBI के आदेश में दर्ज है. CAS के दौरान हेरफेर वाले ट्रेडों के मामले में जारी Ex-Parte Interim Order में नियामक ने 57 लाख रुपये को "expenditure" यानी खर्च कहा है, ऐसा पैसा जिसे जानबूझकर किसी नतीजे को हासिल करने के लिए खर्च किया गया. वह नतीजा एक्सपायरी-डे ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स में 2.96 करोड़ रुपये का था, जिनका निपटान क्लोजिंग नंबर के आधार पर होता है.

यह समझने के लिए कि ऐसा कैसे संभव है, आपको यह जानना होगा कि सेंसेक्स की क्लोजिंग कीमत आती कहां से है.

इंडेक्स 30 कंपनियों से बना है और उनकी क्लोजिंग कीमतें BSE से ली जाती हैं. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज से नहीं. और BSE अब भारत के कैश मार्केट ट्रेडिंग का एक छोटा हिस्सा संभालता है, देश में हर 100 शेयरों में से करीब 93 शेयर NSE पर ट्रेड होते हैं.

3 अगस्त से क्लोजिंग कीमतें सामान्य ट्रेडिंग से भी तय नहीं होतीं. 3:15 बजे बाजार रुक जाता है. अगले 10 मिनट तक कोई ट्रेड नहीं करता; हर कोई अपनी पसंद के ऑर्डर जमा करता है और अंत में एक्सचेंज एक कीमत तय करता है. यही क्लोजिंग कीमत बनती है.

NSE पर जिन शेयरों को यह कवर करता है और जहां इन आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है, वहां 10 मिनट की नीलामी में सामान्य कारोबारी दिन में होने वाले हर 100 शेयरों के कारोबार के मुकाबले करीब डेढ़ शेयर का कारोबार हुआ है. BSE के लिए इसी तरह का आंकड़ा किसी ने प्रकाशित नहीं किया है.

छोटा एक्सचेंज. आखिरी 10 मिनट. 30 कंपनियां.

यह कम ट्रेडिंग कितनी कीमत रखती है, इसका पता SEBI की अपनी तालिकाओं से चलता है और यही दस्तावेज का सबसे अहम हिस्सा है.

पैसा वहां नहीं गया, जहां कीमत हिली. पहले दो सेकंड के उछाल में लगाए गए 66.6 करोड़ रुपये के खरीद ऑर्डरों में सबसे बड़ी एकल रकम 11.79 करोड़ रुपये HDFC Bank में गई. एक और 10.76 करोड़ रुपये ICICI Bank में और 9.46 करोड़ रुपये Reliance में गए. ये भारी-भरकम शेयर हैं, जो इंडेक्स को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं.

SEBI की उस सूची में इनमें से कोई भी शेयर शामिल नहीं है, जिनमें उस समय महत्वपूर्ण हलचल हुई.

IndiGo इसमें शामिल है. इसमें 67 लाख रुपये गए, HDFC Bank में लगाए गए पैसे के सत्रहवें हिस्से से भी कम और यह 2.62 फीसदी चढ़ गया, जो उस दिन की सबसे बड़ी तेजी थी. Tech Mahindra 2.44 फीसदी और Trent 1.91 फीसदी चढ़ा.

HDFC Bank में 11.79 करोड़ रुपये लगाइए और लगभग कुछ नहीं होता. IndiGo में 67 लाख रुपये लगाइए और यह ढाई फीसदी ऊपर चला जाता है. यही क्लोजिंग ऑक्शन की पूरी कहानी है: सेंसेक्स के छोटे शेयरों में दोपहर 3:20 बजे दूसरी तरफ लगभग कोई मौजूद ही नहीं होता.

सेंसेक्स दो सेकंड में 362 अंक चढ़ा. फिर 12 सेकंड बाद दोबारा चढ़ा. इसके बाद तीसरी बार 28 सेकंड में 405 अंक की तेजी आई.

खरीदार को वास्तव में इनमें से ज्यादा कुछ खरीदना ही नहीं पड़ा.

इस ऑक्शन में जो ऑर्डर पूरा नहीं होता, वह भी अंतिम कीमत तय करने में गिना जाता है और 10 मिनट के दौरान एक्सचेंज लगातार बताता रहता है कि कीमत किस दिशा में जा रही है. आप ऑर्डर डालते हैं, नंबर को हिलते हुए देखते हैं और भुगतान करने से पहले उन्हें वापस ले लेते हैं. लगाए गए कुल ऑर्डरों में से करीब एक-तिहाई रद्द कर दिए गए. 98 करोड़ रुपये का एक बैच 15:26:14 पर लगाया गया और 15:26:21 पर वापस ले लिया गया.

ऑर्डर में शामिल दूसरी फर्म ने इसी तंत्र का उल्टा इस्तेमाल किया. उसने पांच मिनट तक 145 करोड़ रुपये के बिक्री ऑर्डर लगाए रखे और इंडेक्स को नीचे रोके रखा, फिर तीन सेकंड में हर 100 में से 99 ऑर्डर रद्द कर दिए.

SEBI ने इसे पकड़ लिया. आदेश के पैराग्राफ 5 में कहा गया है कि उसकी अपनी निगरानी टीम नए सिस्टम पर रोज नजर रख रही थी और उसने इन उछालों को पहचान लिया. छह दिन बाद पैसे फ्रीज करने और दो कंपनियों पर रोक लगाने का आदेश जारी हुआ. यह तेजी से हुई कार्रवाई है और इसका श्रेय नियामक को मिलना चाहिए.

BSE इसमें नजर नहीं आता. 46 पन्नों के इस दस्तावेज में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि एक्सचेंज ने कुछ फ्लैग किया, किसी को अलर्ट किया या कुछ नोटिस किया. उसकी स्क्रीन, उसका इंडेक्स, उसका सर्विलांस विभाग और दस्तावेज में यह दर्ज नहीं है कि उसने कुछ किया हो.

फिर वह हिस्सा है जिसकी अब तक जांच ही नहीं हुई है.

जब SEBI ने जुलाई 2025 में Jane Street के खिलाफ कार्रवाई की थी, भारत में अब तक का सबसे बड़ा इंडेक्स-हेरफेर मामला, जिसमें 4,843 करोड़ रुपये एस्क्रो में रखे गए थे — तब सार्वजनिक आदेश में Nifty और Bank Nifty की जांच की गई थी. उसमें Sensex की जांच नहीं की गई थी.

क्यों?

13 अगस्त का आदेश पहली बार है जब किसी नियामक ने सेंसेक्स की क्लोजिंग पर बारीकी से नजर डाली और अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए. उसे दो कंपनियों, 3.68 करोड़ रुपये और 57 लाख रुपये के आगे झुकने वाले एक इंडेक्स को खोजने में छह दिन लगे. वह एक गुरुवार था. ऐसे गुरुवार बहुत आए हैं.

इसके आसपास चार तारीखें हैं.

3 अगस्त को नई क्लोजिंग प्रणाली शुरू हुई. पहले दिन ऑक्शन के दौरान Nifty करीब 200 अंक उछला और 1.6 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि Sensex में 0.7 फीसदी की बढ़त रही. तब से दोनों के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है.

12 अगस्त को रिटेल ट्रेडर्स ने सिस्टम को खत्म करने की मांग करते हुए एक दिन ट्रेडिंग से दूरी बनाई. उनका कहना था कि क्लोजिंग अप्रत्याशित और असुरक्षित हो गई है. उन्हें ऐसे जुआरी कहकर खारिज कर दिया गया जो बदलाव को संभाल नहीं सकते.

13 अगस्त को 57 लाख रुपये के लिए सेंसेक्स 240 अंक हिला.

19 अगस्त को SEBI ने अपना आदेश साइन किया. उसी दिन BSE ने MSCI के साथ एक समझौते की घोषणा की, जिसके तहत मंजूरी के अधीन MSCI के भारत सूचकांकों पर फ्यूचर्स और ऑप्शंस लॉन्च करने की संभावना तलाशने की बात कही गई.

आदेश में एक बात अब भी अनसुलझी है.

उसी ऑक्शन के शुरुआती सेकंड में, 15:20:03 से 15:20:06 के बीच, सेंसेक्स 451 अंक गिर गया. तीन सेकंड. यह उन तीन हलचलों में से दो से भी बड़ी गिरावट है, जिसके लिए SEBI ने किसी को जिम्मेदार ठहराया है. पैराग्राफ 26 में इसे दर्ज किया गया है और कहा गया है कि यह "under further examination" यानी "आगे जांच के अधीन" है, और फिर बात आगे बढ़ जाती है.

इसके लिए किसी का नाम नहीं लिया गया है.

57 लाख रुपये ने सेंसेक्स को ऊपर पहुंचाया. उसे नीचे किसने धकेला, यह अब तक स्पष्ट नहीं है.

SEBI के 19 अगस्त 2026 के आदेश में केवल prima facie यानी प्रथम दृष्टया निष्कर्ष दिए गए हैं. नामित दोनों कंपनियों के पास जवाब देने के लिए 21 दिन हैं और वे सुनवाई का अनुरोध कर सकती हैं. ऑर्डर में दिए गए मूल्य और कीमतों में बदलाव उसी आदेश की तालिकाओं से लिए गए हैं. ट्रेडिंग-शेयर और ऑक्शन-वॉल्यूम के आंकड़े 3 अगस्त 2026 से इस अवधि के प्रकाशित एक्सचेंज डेटा और स्वतंत्र विश्लेषण से लिए गए हैं.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


सोने की चमक फिर तेज, 4,700 डॉलर के पार पहुंचा भाव; चांदी भी 69 डॉलर के ऊपर

अमेरिकी बॉन्ड बायबैक के ऐलान के बाद ग्लोबल मार्केट में सोने की चमक बढ़ी, MCX पर भी पीली धातु ने पकड़ी रफ्तार

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Monday, 24 August, 2026
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सोने की कीमतों ने सोमवार को एक बार फिर तेजी की रफ्तार पकड़ ली. अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की उम्मीद से ज्यादा बायबैक की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग बढ़ी. कॉमेक्स पर सोना 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया, जबकि चांदी 69 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करती रही. घरेलू बाजार में भी सोने के वायदा भाव में जोरदार तेजी देखने को मिली, जबकि चांदी दबाव में रही.

MCX पर सोने ने पकड़ी तेज रफ्तार

MCX पर सोने का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 386 रुपये की गिरावट के साथ 1,62,052 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला. हालांकि कारोबार के दौरान इसने तेजी पकड़ ली और खबर लिखे जाने तक 1,132 रुपये की बढ़त के साथ 1,63,570 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा था. सोने ने दिन के कारोबार में 1,63,585 रुपये का उच्च स्तर और 1,62,001 रुपये का निचला स्तर छुआ. इस साल MCX पर सोने का वायदा भाव 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है.

चांदी की चमक पड़ी फीकी

सोने के मुकाबले चांदी में सोमवार को नरमी देखने को मिली. MCX पर चांदी का सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 1,000 रुपये की गिरावट के साथ 2,45,597 रुपये प्रति किलो पर खुला. पिछले कारोबारी सत्र में यह 2,46,597 रुपये पर बंद हुआ था. खबर लिखे जाने तक चांदी 461 रुपये की गिरावट के साथ 2,46,136 रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार कर रही थी. कारोबार के दौरान इसने 2,46,475 रुपये का उच्च और 2,44,815 रुपये का निचला स्तर छुआ. इस साल चांदी MCX पर 4,20,048 रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुकी है.

कॉमेक्स पर सोना 4,700 डॉलर के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी बनी हुई है. कॉमेक्स पर सोना 4,673.40 डॉलर प्रति औंस पर खुला था, जबकि पिछला क्लोजिंग प्राइस 4,680.60 डॉलर था. कारोबार के दौरान यह 25.70 डॉलर की बढ़त के साथ 4,706.30 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया. वहीं, कॉमेक्स पर चांदी 69.34 डॉलर प्रति औंस पर खुली. पिछले सत्र में इसका क्लोजिंग प्राइस 69.53 डॉलर था. खबर लिखे जाने तक चांदी 0.37 डॉलर की गिरावट के साथ 69.16 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी.

अमेरिकी ट्रेजरी के फैसले से सोने को मिला सहारा

सोने की कीमतों में तेजी के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी की ओर से लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की अपेक्षा से अधिक बायबैक की घोषणा को प्रमुख वजह माना जा रहा है. इस फैसले से बाजार में सोने की मांग को समर्थन मिला और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत 4,700 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गई.

 


Gen Z का F&O प्रेम पड़ रहा भारी, 89% युवा ट्रेडर्स को हुआ नुकसान: SEBI

डेरिवेटिव्स मार्केट में युवाओं की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ नुकसान का आंकड़ा भी चौंकाने वाला, 30 साल से कम उम्र के ट्रेडर्स सबसे ज्यादा प्रभावित

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Monday, 24 August, 2026
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शेयर बाजार में निवेश को लेकर युवाओं की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O ट्रेडिंग में बढ़ती भागीदारी उनके लिए महंगी साबित हो रही है. सोशल मीडिया पर जल्दी पैसा कमाने के दावे, ट्रेडिंग ऐप्स की आसान उपलब्धता और कम समय में ज्यादा रिटर्न की उम्मीद युवाओं को डेरिवेटिव्स बाजार की ओर खींच रही है. हालांकि, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के ताजा आंकड़े इस ट्रेंड की दूसरी तस्वीर दिखाते हैं. वित्त वर्ष 2026 में 30 साल से कम उम्र के करीब 89 फीसदी F&O ट्रेडर्स को नुकसान हुआ. वहीं, इस उम्र वर्ग की डेरिवेटिव्स मार्केट में हिस्सेदारी भी चार साल में 31 फीसदी से बढ़कर 43 फीसदी हो गई है.

F&O में युवाओं की बढ़ी हिस्सेदारी

SEBI की स्टडी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में 30 साल से कम उम्र के ट्रेडर्स व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स पार्टिसिपेंट्स का करीब 43 फीसदी रहे. चार साल पहले यह हिस्सेदारी 31 फीसदी थी. यानी कम उम्र के निवेशकों की F&O मार्केट में भागीदारी तेजी से बढ़ी है. हालांकि, इसी वर्ग में नुकसान उठाने वाले ट्रेडर्स की संख्या भी सबसे ज्यादा रही. वित्त वर्ष 2026 में 30 साल से कम उम्र के करीब 89 फीसदी ट्रेडर्स को नुकसान हुआ. इसके मुकाबले 60 साल से ज्यादा उम्र वाले पार्टिसिपेंट्स में नुकसान उठाने वालों की हिस्सेदारी 81 फीसदी रही. इससे साफ है कि कम उम्र के ट्रेडर्स की बढ़ती भागीदारी के साथ जोखिम और नुकसान का स्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है.

कम आय वाले ट्रेडर्स पर ज्यादा मार

SEBI के आंकड़ों में आय के आधार पर भी F&O ट्रेडिंग की तस्वीर चिंताजनक है. व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स में करीब तीन-चौथाई ऐसे थे, जिनकी सालाना आय 5 लाख रुपये से कम थी. इस समूह का डेरिवेटिव्स टर्नओवर में करीब 43 फीसदी हिस्सा था, लेकिन कुल नुकसान में इनकी हिस्सेदारी 53 फीसदी रही. इस आय वर्ग में करीब 88 फीसदी ट्रेडर्स को नुकसान हुआ. वहीं, सालाना 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाने वाले निवेशकों में नुकसान उठाने वालों की हिस्सेदारी 81 फीसदी रही.

छोटे शहरों के निवेशक भी F&O में बढ़ा रहे दांव

डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग का विस्तार सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा है. SEBI के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में B30 यानी बड़े शहरों के बाहर के इलाकों के निवेशक व्यक्तिगत ट्रेडर्स का करीब दो-तिहाई हिस्सा थे. डेरिवेटिव्स के कुल टर्नओवर में भी उनका हिस्सा करीब आधा रहा. खास बात यह है कि B30 निवेशकों की हिस्सेदारी व्यक्तिगत म्यूचुअल फंड एसेट्स में करीब एक-चौथाई है. इससे संकेत मिलता है कि छोटे शहरों के निवेशक पारंपरिक निवेश की तुलना में डेरिवेटिव्स जैसे ज्यादा जोखिम वाले विकल्पों में अपेक्षाकृत ज्यादा सक्रिय हैं.

1 लाख रुपये से कम पोर्टफोलियो वालों का सबसे ज्यादा नुकसान

SEBI की स्टडी में निवेशकों के इक्विटी पोर्टफोलियो और F&O ट्रेडिंग के बीच संबंध भी सामने आया है. वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 95 लाख यानी 78 फीसदी व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स का इक्विटी पोर्टफोलियो 1 लाख रुपये से कम था. इस समूह की डेरिवेटिव्स टर्नओवर में हिस्सेदारी करीब 51 फीसदी थी, लेकिन कुल नुकसान में इनकी हिस्सेदारी 70 फीसदी तक पहुंच गई. यानी कम पूंजी वाले निवेशकों ने F&O में अपेक्षाकृत बड़ा जोखिम उठाया और नुकसान का बोझ भी ज्यादा झेला.

छोटा पोर्टफोलियो, बड़ा F&O दांव

स्टडी के मुताबिक, ऐसे ट्रेडर्स जिनका इक्विटी पोर्टफोलियो 1 लाख रुपये से कम था, लेकिन डेरिवेटिव्स में उनका टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा था, उनकी संख्या कुल ट्रेडर्स की करीब 13 फीसदी थी. हालांकि, कुल नुकसान में उनकी हिस्सेदारी 52 फीसदी रही. यह आंकड़ा बताता है कि सीमित इक्विटी पूंजी वाले कई निवेशक डेरिवेटिव्स में अपने उपलब्ध संसाधनों की तुलना में काफी बड़ा दांव लगा रहे थे.

बिना इक्विटी पोर्टफोलियो के भी F&O ट्रेडिंग

SEBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 43 लाख ट्रेडर्स यानी व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स पार्टिसिपेंट्स का लगभग 35 फीसदी हिस्सा ऐसा था, जिसके पास वित्त वर्ष 2026 के अंत में कोई अंडरलाइंग इक्विटी पोर्टफोलियो नहीं था. इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में लोग बिना कैश इक्विटी होल्डिंग के भी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग कर रहे थे. ऐसे में F&O उनके लिए निवेश के बजाय सीधे सट्टेबाजी जैसे जोखिम वाला विकल्प बन सकता है.

कुल ट्रेडर्स की संख्या घटी, लेकिन जोखिम बना रहा

SEBI की स्टडी के मुताबिक, व्यक्तिगत डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स की कुल संख्या में भी गिरावट आई है. वित्त वर्ष 2025 में करीब 1.06 करोड़ व्यक्तिगत ट्रेडर्स थे, जो वित्त वर्ष 2026 में घटकर करीब 87.5 लाख रह गए. यानी ट्रेडर्स की संख्या में करीब 18 फीसदी की कमी आई. इसके बावजूद युवा निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ना और छोटे पोर्टफोलियो वाले ट्रेडर्स का भारी नुकसान उठाना बाजार नियामक के लिए चिंता का विषय है.

सोशल मीडिया और आसान ट्रेडिंग से बढ़ा आकर्षण

F&O ट्रेडिंग की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे सोशल मीडिया पर मौजूद फिनफ्लुएंसर्स, ट्रेडिंग से जल्दी पैसा कमाने की उम्मीद और मोबाइल ऐप्स के जरिए बाजार तक आसान पहुंच जैसे कई कारण हैं. हालांकि, SEBI के आंकड़े बताते हैं कि डेरिवेटिव्स में तेजी से पैसा बनाने की कोशिश बड़े नुकसान में बदल सकती है.

SEBI ने अपनी स्टडी में उम्र, आय, भौगोलिक स्थिति, ट्रेडिंग गतिविधि और पोर्टफोलियो के आकार के आधार पर ट्रेडिंग के नतीजों का विश्लेषण किया है. हालांकि, नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन संबंधों को सीधे कारण और प्रभाव के प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
 


Vodafone Idea के लिए खुला फंडिंग का रास्ता, SBI देगा कर्ज; अब निजी बैंकों पर टिकी नजर

35,000 करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाने की योजना में बढ़ी उम्मीद, प्रवर्तक कंपनियां देंगी गारंटी; SBI निजी बैंकों से बाकी कर्ज मिलने के बाद ही जारी करेगा अपनी रकम

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
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दूरसंचार कंपनी वोडाफोन-आईडिया (Vodafone Idea) को अपनी 45,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय योजना के लिए बैंक ऋण जुटाने में बड़ी राहत मिली है. भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने कंपनी के हिस्से का ऋण मंजूर करने पर सहमति जताई है. दरअसल, वोडाफोन-आईडिया की प्रवर्तक कंपनियां कर्ज के लिए गारंटी देने को तैयार हो गई हैं, जिससे पहले गारंटी को लेकर अटका वित्तपोषण प्रस्ताव आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है. हालांकि, SBI ने रकम जारी करने से पहले एक अहम शर्त रखी है. बैंक तब तक अपना हिस्सा जारी नहीं करेगा, जब तक वोडाफोन-आईडिया निजी क्षेत्र के बैंकों से प्रस्तावित ऋण का बाकी हिस्सा हासिल नहीं कर लेती.

प्रवर्तक कंपनियां देंगी गारंटी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गारंटी वोडाफोन-आईडिया की प्रवर्तक कंपनियां देंगी, न कि समूह की बड़ी सूचीबद्ध कंपनियां. यह गारंटी SBI के ऋण के लिए अतिरिक्त सुरक्षा कवर के तौर पर काम करेगी. सूत्र के मुताबिक, कंपनी की ओर से यह अनुरोध किया गया था कि यदि चार वर्षों तक सब कुछ ठीक रहता है तो गारंटी वापस ले ली जाए. SBI ने इस शर्त पर भी सहमति जताई है.

कंपनी में प्रमोटरों की 25.64 फीसदी हिस्सेदारी

मार्च 2026 तक वोडाफोन-आईडिया में प्रवर्तकों की कुल हिस्सेदारी 25.64 फीसदी थी. इसमें वोडाफोन ग्रुप पीएलसी की 19 फीसदी और कुमार मंगलम बिड़ला के नेतृत्व वाले आदित्य बिड़ला ग्रुप की 6.63 फीसदी हिस्सेदारी शामिल है. भारत सरकार की कंपनी में करीब 49 फीसदी हिस्सेदारी है, लेकिन इसे प्रवर्तक के बजाय सार्वजनिक शेयरधारक की श्रेणी में रखा गया है.

निजी बैंकों से कर्ज जुटाना अभी बाकी

बैंकर के मुताबिक, निजी क्षेत्र के बैंक फिलहाल इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं. ऐसे में वोडाफोन-आईडिया को उनके साथ अलग से बातचीत करनी होगी. कंपनी को सभी ऋणदाताओं के साथ चर्चा कर पूरे वित्तपोषण को अंतिम रूप देना होगा. इसमें कुछ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भी शामिल हो सकते हैं, हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रत्येक ऋणदाता कितना योगदान देगा. कंपनी को तब तक वित्तपोषण प्रस्ताव आगे बढ़ाने में मुश्किल होगी, जब तक सभी ऋणदाता अपने-अपने हिस्से को मंजूरी नहीं दे देते.

35,000 करोड़ रुपये के नए कर्ज की जरूरत

वोडाफोन-आईडिया ने अगले तीन वर्षों में 45,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय योजना के लिए 35,000 करोड़ रुपये का नया वित्तपोषण मांगा है. इसमें 25,000 करोड़ रुपये बैंक ऋण के तौर पर और 10,000 करोड़ रुपये क्रेडिट लाइन या अन्य गैर-ऋण सुविधाओं के रूप में जुटाने की योजना है. कंपनी की पूंजीगत व्यय योजना में 17 प्राथमिकता वाले सर्किल में 5G नेटवर्क का विस्तार, EBITDA को बढ़ाना और ग्राहकों की संख्या में इजाफा कर आय को मजबूत करना शामिल है.

पहले ही मिल चुके हैं 6,400 करोड़ रुपये

जून 2026 को समाप्त तिमाही तक वोडाफोन-आईडिया लंबी अवधि की बैंक सुविधा के तहत 6,400 करोड़ रुपये हासिल कर चुकी है. कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी अभिजित किशोर ने 11 अगस्त को तिमाही नतीजों के बाद विश्लेषकों से बातचीत में कहा था कि कंपनी अपने सभी ऋणदाताओं के साथ बातचीत कर रही है और इस दिशा में अच्छी प्रगति हुई है. कंपनी के मुताबिक, ऋणदाताओं में SBI के नेतृत्व वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के भारतीय बैंक और विदेशी बैंकों का समूह शामिल है.

FY27 के कैपेक्स के लिए बैंक कर्ज अहम

बैंकर के मुताबिक, SBI की शर्तें कंपनी के लिए स्वीकार्य हैं और बैंक अपने हिस्से का ऋण जारी करेगा. हालांकि, दूसरे ऋणदाताओं को अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं और बोर्ड की मंजूरी से गुजरना होगा. वोडाफोन-आईडिया को प्रत्येक ऋणदाता के साथ अलग-अलग बातचीत कर वित्तपोषण को अंतिम रूप देना होगा. कंपनी को उम्मीद है कि SBI के नेतृत्व वाले सरकारी बैंकों के साथ बातचीत जल्द अंतिम रूप लेगी. इसके साथ ही वह दूसरे स्रोतों से भी ऋण जुटाने की कोशिश कर रही है. वित्त वर्ष 2027 में पूंजीगत व्यय बढ़ाने और नेटवर्क विस्तार को गति देने के लिए बैंक ऋण वोडाफोन-आईडिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.


दो हफ्ते से बाजार में गिरावट, अब क्या आएगी तेजी? इन फैक्टर्स पर रखें नजर

शुक्रवार को सेंसेक्स 3.11 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,540.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 20.15 अंक चढ़कर 24,252 के स्तर पर पहुंच गया.

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
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शेयर बाजार में लगातार दो हफ्तों की गिरावट के बाद अब निवेशकों की नजर बाजार की अगली चाल पर है. शुक्रवार को सेंसेक्स 3.11 अंक की मामूली बढ़त के साथ 77,540.83 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 20.15 अंक चढ़कर 24,252 के स्तर पर पहुंच गया. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी इंडेक्स फिलहाल सीमित दायरे में रह सकता है, लेकिन 24,000 के मजबूत सपोर्ट के ऊपर टिके रहने पर शॉर्ट टर्म में रिकवरी की गुंजाइश बनी हुई है. वहीं, 24,350-24,500 के जोन के ऊपर मजबूती बाजार में तेजी का संकेत दे सकती है.

शुक्रवार को कैसी रही बाजार की चाल

शुक्रवार को निफ्टी 53 अंकों की बढ़त के साथ खुला, लेकिन पूरे कारोबारी सत्र में इंडेक्स सीमित दायरे में कारोबार करता रहा. अंत में निफ्टी 20 अंक यानी 0.08 फीसदी की बढ़त के साथ 24,252 पर बंद हुआ. क्लोजिंग ऑक्शन में भी इंडेक्स को करीब 19 अंकों का सहारा मिला. सेक्टोरल स्तर पर मेटल, प्राइवेट बैंक और रियल्टी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि ऑटो, मीडिया और आईटी सेक्टर दबाव में रहे. व्यापक बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया. Nifty Midcap 100 में 0.10 फीसदी और Nifty Smallcap 100 में 0.69 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई.

इस हफ्ते किन फैक्टर्स पर रहेगी नजर

इस हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में मानसून की रफ्तार, विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और बड़े आर्थिक घटनाक्रम अहम रहेंगे. दो हफ्तों की लगातार गिरावट के बाद इन संकेतकों के बीच अगर खरीदारी लौटती है, तो निफ्टी में शॉर्ट टर्म रिकवरी देखने को मिल सकती है.

24,000 के नीचे फिसला तो बढ़ सकता है दबाव

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी का मौजूदा ट्रेंड अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है. उनका मानना है कि इंडेक्स अगले हफ्ते 24,500-24,600 तक पहुंच सकता है. उन्होंने 24,100 को अहम सपोर्ट बताया है. विशेषज्ञों का कहना है कि निफ्टी 50 और 100 दिन के EMA के ऊपर बना हुआ है, जो करीब 24,200 के आसपास हैं. हालांकि इंडेक्स अभी 20 दिन के EMA यानी 24,300 और 200 दिन के EMA यानी 24,376 से नीचे है. ऐसे में फिलहाल बाजार में स्पष्ट दिशा का अभाव है. उनके मुताबिक 24,000 के नीचे क्लोजिंग होने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है. वहीं, 24,400 के ऊपर टिकने पर शॉर्ट टर्म में तेजी की वापसी हो सकती है.

Bank Nifty के लिए 58,200-58,300 अहम

Bank Nifty भी शुक्रवार को करीब 290 अंकों के दायरे में कारोबार करता रहा. 58,200-58,300 का स्तर इंडेक्स के लिए बड़ा रेजिस्टेंस है. इसके ऊपर निकलने पर Bank Nifty 58,700 और फिर 59,000 तक जा सकता है. वहीं, नीचे की तरफ 57,300-57,200 का स्तर मजबूत सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में NTPC Green Energy, Meesho, Urban Company, Vodafone Idea, Power Grid, Swiggy, Mahindra & Mahindra, Zee Entertainment, Aurobindo Pharma, Lenskart Solutions और Bank of Baroda के शेयर फोकस में रह सकते हैं. इन कंपनियों से जुड़े बड़े ऑर्डर, ब्लॉक डील, फंडिंग, कारोबार विस्तार और नियामकीय अपडेट निवेशकों के लिए अहम हैं. NTPC Green Energy की इकाई को 500 MW की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता मिली है, जबकि Meesho में Y Combinator करीब 1.05 फीसदी हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेच सकता है. Urban Company और Kent RO के बीच विज्ञापन विवाद को लेकर मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा है. Vodafone Idea के कैपेक्स प्लान के लिए SBI ने अपने हिस्से के लोन को मंजूरी देने पर सहमति जताई है, वहीं Power Grid को गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए सफल बोलीदाता घोषित किया गया है. Swiggy के शेयरधारकों ने कंपनी को Indian-Owned and Controlled Company बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. Mahindra & Mahindra नए पिकअप मॉडल के जरिए दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे विदेशी बाजारों में विस्तार की तैयारी कर रही है. Zee Entertainment ने प्रमोटर ग्रुप को ₹126 प्रति वारंट के भाव पर 20.9 करोड़ फुली कन्वर्टिबल वारंट जारी किए हैं. Aurobindo Pharma की इकाई AuroPeptides के तेलंगाना प्लांट के US FDA निरीक्षण में एक आपत्ति दर्ज की गई. इसके अलावा, SoftBank Vision Fund II Lenskart Solutions में 2.6 फीसदी तक हिस्सेदारी बेच सकता है, जबकि Bank of Baroda ने 400 मिलियन डॉलर के सीनियर अनसिक्योर्ड फिक्स्ड रेट नोट्स जारी किए हैं.

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

कुल मिलाकर बाजार में फिलहाल सतर्क रुख बना हुआ है. निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम सपोर्ट और 24,350-24,500 का जोन प्रमुख रेजिस्टेंस रहेगा. 24,000 के नीचे कमजोरी बढ़ सकती है, जबकि 24,400-24,500 के ऊपर मजबूती आने पर रिकवरी का दायरा बढ़ सकता है. इसलिए अगले हफ्ते निवेशकों की नजर इन तकनीकी स्तरों के साथ FII फ्लो, क्रूड और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


आयुर्वेद और आधुनिक वेलनेस का संगम, अंतरराष्ट्रीय एक्सपो में पेश किए गए नए हेल्थ सॉल्यूशंस

एडवांस डायबेटिक केयर जूस और गिलोय पपीता जूस रहे प्रमुख आकर्षण, 20 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 22 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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आयुर्वेद के विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक जीवनशैली की वेलनेस जरूरतों से जोड़ने की दिशा में काम कर रही क्यूरा (Cura) ने 21 से 23 अगस्त तक भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं वेलनेस एक्सपो 2026 में अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया. कंपनी ने एक्सपो में एडवांस डायबेटिक केयर जूस और गिलोय पपीता समेत अपने आयुर्वेद आधारित वेलनेस पोर्टफोलियो को पेश किया.

क्यूरा का फोकस प्राकृतिक रूप से प्राप्त सामग्रियों और उद्देश्यपूर्ण आयुर्वेदिक फॉर्मुलेशन के जरिए रोजमर्रा की वेलनेस जरूरतों के लिए सरल और सुलभ समाधान विकसित करने पर है. एक्सपो में कंपनी ने अपने उत्पादों की फॉर्मुलेशन प्रक्रिया और आयुर्वेद आधारित दृष्टिकोण को उपभोक्ताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के सामने रखा.

एडवांस डायबेटिक केयर जूस रहा प्रमुख आकर्षण

एक्सपो में एडवांस डायबेटिक केयर जूस प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा. इसे डायबेटिक वेलनेस के तौर पर उन लोगों के लिए पेश किया गया, जो अपने ब्लड शुगर मैनेजमेंट को अपनी दैनिक वेलनेस दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहते हैं.

कंपनी के अनुसार, करीब 20 प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार इस फॉर्मुलेशन में गुडमर (Gymnema sylvestre) को प्रमुख वनस्पति के रूप में शामिल किया गया है. इसके अलावा करेला, जामुन, नीम, गिलोय, मेथी, शिलाजीत, अश्वगंधा, अर्जुन, आंवला, हल्दी और दालचीनी जैसी सामग्रियां भी इसमें शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक इसका शुगर-फ्री और ट्रिपल-रिफाइंड फॉर्मुलेशन प्राकृतिक सामग्रियों के संयोजन पर आधारित है.

क्यूरा ने गिलोय पपीता जूस को भी एक्सपो में प्रदर्शित किया. कंपनी के अनुसार, इसे बुखार के मौसम, इम्युनिटी और सामान्य स्वास्थ्य से जुड़ी वेलनेस जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है.

इसमें गिलोय, पपीते की पत्ती और तुलसी के साथ नीम, अश्वगंधा और एलोवेरा जैसी प्राकृतिक सामग्रियां शामिल हैं. कंपनी के मुताबिक फॉर्मुलेशन को इम्युनिटी, स्वास्थ्य लाभ, सूजनरोधी और ज्वररोधी सहायता, प्लेटलेट सपोर्ट तथा दैनिक प्रतिरक्षा सुरक्षा जैसी वेलनेस जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

आयुर्वेद को रोजमर्रा की वेलनेस से जोड़ने पर जोर

क्यूरा आयुर्वेदिक एंड यूनानी के डायरेक्टर आदित्य मीहीर ने कहा, “हमारा उद्देश्य उद्देश्यपूर्ण वेलनेस को सरल और सुलभ बनाना है, साथ ही इसे आयुर्वेद के विज्ञान और विरासत से जोड़कर रखना है. इस एक्सपो ने हमें ऐसे उपभोक्ताओं और उद्योग जगत के हितधारकों से जुड़ने का अवसर दिया, जो आज तेजी से भरोसेमंद और प्राकृतिक वेलनेस समाधानों की तलाश कर रहे हैं.”

14 करोड़ से अधिक ग्राहकों तक पहुंच का दावा

कंपनी के मुताबिक क्यूरा ने अब तक 14 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दी हैं और 28 से ज्यादा राज्यों में 3,000 से अधिक डॉक्टरों का विश्वास हासिल किया है. कंपनी की गुणवत्ता संबंधी प्रतिबद्धता ISO-GMP प्रमाणित विनिर्माण और NABL प्रयोगशाला प्रमाणन से मजबूत होती है.

क्यूरा के अनुसार, उसके चुनिंदा वेलनेस फॉर्मुलेशन की ताजगी और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उन्हें हर 48 घंटे में SS-ग्रेड केतलियों में ताजा तैयार किया जाता है. कंपनी का दावा है कि ये उत्पाद अर्क-आधारित नहीं हैं, जैसा कि इस श्रेणी के कई उत्पादों में देखने को मिलता है.

20 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं वेलनेस एक्सपो क्यूरा के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के दर्शकों, उपभोक्ताओं और उद्योग हितधारकों से जुड़ने का मंच बना. तीन दिवसीय आयोजन में 150 से अधिक वैश्विक प्रदर्शक, 150 से अधिक विशेषज्ञ वक्ता और 20 से अधिक देशों से 10,000 से ज्यादा व्यापारिक आगंतुक शामिल हुए.

एक्सपो में स्वास्थ्य सेवा, AYUSH, वेलनेस, पोषण, मेडिकल टेक्नोलॉजी और निवारक स्वास्थ्य सेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. क्यूरा ने इस मंच के जरिए अपने आयुर्वेद आधारित वेलनेस उत्पादों और फॉर्मुलेशन को पेश किया. कंपनी के मुताबिक, एक्सपो में भागीदारी उसके उस दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके तहत आयुर्वेद के पारंपरिक ज्ञान, प्राकृतिक सामग्रियों, ताजगी और सोच-समझकर तैयार किए गए फॉर्मुलेशन के जरिए आयुर्वेद आधारित वेलनेस को रोजमर्रा की जिंदगी का सरल और भरोसेमंद हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
 


Zee में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, 20.94 करोड़ वारंट का हुआ आवंटन

पूरी तरह कन्वर्जन के बाद Zee Entertainment में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़कर 17.9% होगी, शेयरधारकों ने 23.79% हिस्सेदारी को मंजूरी दी थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 22 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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जी मीडिया (Zee Entertainment Enterprises-ZEEL) ने प्रमोटर ग्रुप की इकाई Sunbright Mauritius Investments Ltd को 126 रुपये प्रति वारंट के इश्यू प्राइस पर 20,94,47,805 पूरी तरह कन्वर्टिबल वारंट आवंटित किए हैं. वारंट का आवंटन 21 अगस्त को शेयरधारकों और स्टॉक एक्सचेंजों से मंजूरी मिलने के बाद पूरा हुआ. यह प्रक्रिया सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) की ओर से दी गई अंतरिम राहत के बाद आगे बढ़ी.

659.76 करोड़ रुपये का भुगतान

Sunbright ने इश्यू प्राइस का 25 फीसदी यानी 31.50 रुपये प्रति वारंट की राशि अग्रिम रूप से चुकाई है. यह रकम करीब 659.76 करोड़ रुपये है. बाकी 75 फीसदी यानी 94.50 रुपये प्रति वारंट का भुगतान आवंटन की तारीख से 18 महीने के भीतर करना होगा. इसके लिए अंतिम तारीख 21 फरवरी 2028 है.

हर वारंट के कन्वर्जन पर धारक को 1 रुपये फेस वैल्यू का एक इक्विटी शेयर हासिल करने का अधिकार होगा. बाकी भुगतान होने और वारंट के इक्विटी शेयरों में कन्वर्जन तक ZEEL की पेड-अप शेयर कैपिटल में कोई बदलाव नहीं होगा.

कन्वर्जन के बाद 17.90 फीसदी होगी हिस्सेदारी

अगर सभी वारंट इक्विटी शेयरों में कन्वर्ट हो जाते हैं, तो पूरी तरह डायल्यूटेड आधार पर ZEEL में Sunbright की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 17.90 फीसदी हो जाएगी. इससे प्रमोटर ग्रुप को प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का महत्वपूर्ण रास्ता मिलेगा.

शेयरधारकों ने इससे पहले प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़ाकर 23.79 फीसदी तक करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. हालांकि, मौजूदा वारंट के पूरी तरह कन्वर्जन के बाद हिस्सेदारी करीब 17.90 फीसदी तक ही पहुंचेगी.

SAT के आदेश के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया

यह आवंटन 14 अगस्त को SAT की ओर से दिए गए आदेश के बाद हुआ. ट्रिब्यूनल ने ZEEL और पुनीत गोयनका को प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी. इसके लिए दोनों अपीलकर्ताओं को एक सप्ताह के भीतर पूरी पेनल्टी जमा करने की शर्त रखी गई थी. ट्रिब्यूनल ने वारंट इश्यू पूरा करने की समयसीमा भी सात दिन बढ़ा दी थी.

SAT ने ZEEL को अपने म्यूचुअल फंड निवेश का इस्तेमाल रोजमर्रा की परिचालन जरूरतों के लिए करने की भी अनुमति दी. हालांकि, इन फंड्स का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता. इसमें प्रस्तावित डिविडेंड का भुगतान भी शामिल है.
 


भारत के 20 स्पेस स्टार्टअप्स के CEO से मिले PM मोदी, टेक्नोलॉजी को जनहित से जोड़ने पर जोर

कृषि से लेकर पर्यावरण तक स्पेस टेक्नोलॉजी के नए इस्तेमाल पर जोर, युवा उद्यमियों और इनोवेटर्स की पीएम ने की तारीफ

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 22 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के साथ-साथ स्पेस टेक्नोलॉजी का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया है. शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री ने 20 स्वदेशी स्पेस स्टार्टअप्स के संस्थापकों और सीईओ से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने कंपनियों से अपनी तकनीकों के नए अनुप्रयोग तलाशने और कृषि, पर्यावरण समेत सामाजिक विकास से जुड़े क्षेत्रों के साथ सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का उभरता हुआ निजी स्पेस इकोसिस्टम देश और दुनिया के लिए बड़ी ताकत बन सकता है. स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल खेती, पशुपालन, डेयरी, पर्यावरण और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की उपलब्धियां अंतरिक्ष क्षेत्र को कंपनियों के लिए खोलने के सरकार के फैसले को सही साबित कर रही हैं.

रॉकेट से लेकर स्पेस इंटेलिजेंस तक काम कर रहे स्टार्टअप

बैठक में स्काईरूट एयरोस्पेस, अग्निकुल कॉसमॉस, पिक्सेल, ध्रुव स्पेस, गैलेक्सी, पियरसाइट, बैलाट्रिक्स एयरोस्पेस, डिगंतारा, सैटश्योर, सुहोरा टेक्नोलॉजीज, मनास्टू स्पेस, एस्ट्रोबेस, टेकमी2स्पेस, व्योमआईसी, कॉसमॉस सर्व स्पेस, ऑर्बिटएड एयरोस्पेस, स्काईसर्व, सेरेंडिपिटी स्पेस, वासर लैब्स और मिस्टईओ समेत 20 स्पेस स्टार्टअप्स के प्रतिनिधि शामिल हुए.

ये कंपनियां रॉकेट, पुन: इस्तेमाल होने वाले लॉन्च व्हीकल, उपग्रह, एवियोनिक्स, उन्नत प्रणोदन, स्पेस इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन और एआई आधारित मौसम एवं जलवायु इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं. स्टार्टअप संस्थापकों ने प्रधानमंत्री के सामने अपनी तकनीकी प्रगति, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को साझा किया.

कृषि और पर्यावरण में बढ़े स्पेस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर जोर

मोदी ने स्पेस कंपनियों से अपनी तकनीकों का इस्तेमाल अंतरिक्ष तक सीमित रखने के बजाय जमीन पर लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए करने को कहा. उन्होंने कृषि और पर्यावरण से जुड़े संगठनों के साथ अधिक सहयोग की जरूरत बताई. सैटेलाइट और अन्य अंतरिक्ष आधारित तकनीकों के जरिए खेती, मौसम की निगरानी, जलवायु से जुड़ी चुनौतियों और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिल सकती है.

प्रधानमंत्री ने युवाओं और छात्रों में अंतरिक्ष के प्रति रुचि बढ़ाने पर भी जोर दिया. इसके लिए स्पेस स्टार्टअप्स को अटल टिंकरिंग लैब्स के साथ मिलकर काम करने को प्रोत्साहित किया गया, ताकि स्कूली स्तर से ही बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान और नई तकनीकों से जोड़ने का अवसर मिल सके.

वैश्विक प्रतिभा और निवेश आकर्षित करने की क्षमता

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदलाव आया है. निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी से देश में वैश्विक प्रतिभाओं, कंपनियों और निवेश को आकर्षित करने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं. स्टार्टअप संस्थापकों ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सरकार के समर्थन और उद्योग के भीतर बढ़ते सहयोग की सराहना की. उन्होंने भारत के निजी स्पेस उद्योग द्वारा विकसित तकनीकों को अपनाने में कंपनियों की बढ़ती रुचि का भी उल्लेख किया. बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और आईएन-स्पेस के चेयरमैन पवन गोयनका भी मौजूद थे.

एक्स पर पीएम मोदी ने की युवा उद्यमियों की तारीफ

बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी स्पेस स्टार्टअप्स के युवा उद्यमियों और इनोवेटर्स की तारीफ की. उन्होंने कहा कि भारत के स्पेस सेक्टर की युवा ऊर्जा से मिलना शानदार अनुभव रहा. मोदी ने कहा कि इन युवा उद्यमियों और इनोवेटर्स ने एक नए और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कदम रखने का साहस दिखाया है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उद्यमियों ने जोखिम उठाया, सुधार की प्रक्रिया पर भरोसा किया और लगातार प्रयास जारी रखे. उनके मुताबिक, इसी जज्बे और लगातार कोशिशों की वजह से भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है.

 

 

 

 


बैंकिंग ऐप की नकल कर रहे फर्जी ऐप पर सरकार सख्त, गूगल को अकाउंट हटाने का निर्देश

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में साइबर धोखाधड़ी से देश को करीब 52,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

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Published - Saturday, 22 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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सरकार ने प्रमुख सरकारी और निजी बैंकों की वेबसाइट और मोबाइल ऐप की नकल कर ग्राहकों को ठगने वाले फर्जी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने गूगल (Google) से ऐसे कई फायरबेस (Firebase) वेब डेवलपमेंट अकाउंट हटाने को कहा है, जिनका इस्तेमाल बैंकिंग ऐप जैसे दिखने वाले फर्जी प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा था.

बैंकिंग ऐप की नकल कर रहे थे ठग

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साइबर अपराधी फर्जी वेबसाइट और ऐप के जरिए लोगों को रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने, क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने और अन्य ऑफर का झांसा दे रहे थे. इन प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वे प्रमुख बैंकों के असली ऐप जैसे दिखाई दें.

गूगल फायरबेस, गूगल के क्लाउड कारोबार का हिस्सा है. इसका इस्तेमाल मोबाइल ऐप और वेबसाइट बनाने और होस्ट करने के लिए किया जाता है. सरकारी नोटिस पर गूगलने कहा कि फिशिंग, मैलवेयर और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए उसकी सेवाओं के इस्तेमाल के खिलाफ उसकी सख्त नीति है. कंपनी ने कहा कि वह भारत में I4C समेत कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सरकारी संस्थानों के साथ मिलकर काम करती है.

5 साल में साइबर फ्रॉड से 52,000 करोड़ रुपये का नुकसान

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में साइबर धोखाधड़ी से देश को करीब 52,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. अकेले 2025 में डिजिटल और साइबर फ्रॉड से करीब 22,500 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया और इस दौरान 28 लाख साइबर फ्रॉड शिकायतें सामने आईं.

फ्रॉड पीड़ितों को 25,000 रुपये तक मुआवजा

डिजिटल और साइबर फ्रॉड के पीड़ितों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस साल संशोधित मुआवजा ढांचा लागू किया है. इसके तहत डिजिटल धोखाधड़ी में 50,000 रुपये तक का नुकसान उठाने वाले पात्र पीड़ितों को एकमुश्त 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है.

RBI ने बढ़ाए डिजिटल सुरक्षा उपाय

RBI की धोखाधड़ी रोकने की व्यवस्था में ऑथेंटिकेशन, ग्राहक सुरक्षा और फ्रॉड डेटा एवं जागरूकता जैसे प्रमुख उपाय शामिल हैं. डिजिटल भुगतान में अतिरिक्त सुरक्षा सत्यापन (AFA) को SMS OTP के अलावा दूसरे सुरक्षित तरीकों तक बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है.

ग्राहकों को असली बैंकिंग वेबसाइट पहचानने में मदद के लिए .bank.in डोमेन उपलब्ध कराया गया है. वहीं, अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए .fin.in डोमेन लाने की योजना है.

अनधिकृत लेनदेन में ग्राहक सुरक्षा

RBI के नियमों के तहत अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन की जानकारी समय पर देने पर ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य या सीमित हो सकती है. छोटे मूल्य के फर्जी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के मामलों में पात्र ग्राहकों को तय शर्तों के तहत 25,000 रुपये तक मुआवजा भी मिल सकता है.

RBI ने डिजिटल भुगतान से जुड़े जोखिमों को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए BE(A)WARE अभियान भी चलाया है. इसके अलावा, केंद्रीय बैंक अनधिकृत लेनदेन की स्थिति में साझा जिम्मेदारी की व्यवस्था पर भी विचार कर रहा है, जिसमें पैसा भेजने और प्राप्त करने वाले बैंक की जिम्मेदारी तय की जा सकती है.
 


ऑनलाइन इंस्ट्रूमेंट्स के 750 करोड़ रुपये के IPO को सेबी की मंजूरी, सनिल गोल्ड इंडिया ने वापस लिए कागजात

ऑनलाइन इंस्ट्रूमेंट्स ने मई 2026 में सेबी के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था. सेबी ने 18 अगस्त को कंपनी को अपने ऑब्जर्वेशन दिए.

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Published - Saturday, 22 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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बेंगलुरु स्थित ऑडियो-विजुअल सिस्टम इंटीग्रेशन सॉल्यूशंस कंपनी ऑनलाइन इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से IPO के लिए ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट्स पर ऑब्जर्वेशन मिल गया है. इसके साथ ही कंपनी के लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने और पूंजी जुटाने का रास्ता साफ हो गया है. वहीं, मुंबई स्थित हैंडक्राफ्टेड गोल्ड ज्वैलरी सप्लायर सनिल गोल्ड इंडिया ने अपने IPO के ड्राफ्ट पेपर वापस ले लिए हैं.

750 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू

ऑनलाइन इंस्ट्रूमेंट्स ने मई 2026 में सेबी के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था. सेबी ने 18 अगस्त को कंपनी को अपने ऑब्जर्वेशन दिए. कंपनी IPO के जरिए 750 करोड़ रुपये तक का फ्रेश इश्यू लाने की योजना बना रही है. इसके अलावा प्रमोटर्स अनिता महेश बेल्लाड और राजेश्वरी शिवानंद महाशेट्ट 57.1 लाख तक शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए करेंगे. कंपनी IPO से पहले 150 करोड़ रुपये तक की राशि प्री-IPO प्लेसमेंट के जरिए भी जुटा सकती है. यह प्लेसमेंट पूरा होने पर फ्रेश इश्यू का आकार उसी अनुपात में घट जाएगा.

कर्ज चुकाने और कारोबार बढ़ाने में होगा इस्तेमाल

ऑनलाइन इंस्ट्रूमेंट्स फ्रेश इश्यू से मिली रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतें पूरी करने और अज्ञात कंपनियों के अधिग्रहण के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ के लिए करेगी. कुछ राशि सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए भी इस्तेमाल की जाएगी. इस IPO के लिए Equirus Capital और Motilal Oswal Investment Advisors मर्चेंट बैंकर हैं.

सनिल गोल्ड इंडिया ने वापस लिए IPO पेपर

इस बीच, सनिल गोल्ड इंडिया ने अपने IPO के ड्राफ्ट पेपर वापस ले लिए हैं. कंपनी ने 14 अगस्त को कागजात वापस लिए. मुंबई स्थित इस कंपनी ने मार्च 2026 में सेबी के पास IPO के ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए थे. इस इश्यू के लिए Unistone Capital एकमात्र मर्चेंट बैंकर था. प्रस्तावित IPO में 2 करोड़ इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू और प्रमोटर्स अनिल मोहनलाल जैन तथा उनकी बहन श्रेनिक मोहनलाल जैन की ओर से 65 लाख शेयरों का OFS शामिल था.

सेबी की मंजूरी का क्या मतलब?

सेबी की ओर से ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट्स पर ऑब्जर्वेशन मिलने के बाद कंपनियां IPO प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती हैं. हालांकि, इसके लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास दाखिल करने समेत बाकी नियामकीय और प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं.
 


चीनी के दाम में उछाल के पीछे कौन? सरकार ने एथनॉल पर उठे सवालों को किया खारिज

सरकार ने कहा- चीनी की कीमतों में तेजी की वजह कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी मांग, वैश्विक आपूर्ति में कमी और जमाखोरी; एथनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन घटकर 9% हुआ.

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Published - Saturday, 22 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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केंद्र सरकार ने चीनी की हालिया बढ़ती कीमतों के लिए चीनी को एथनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किए जाने को जिम्मेदार ठहराने वाली दलीलों को खारिज कर दिया है. सरकार के मुताबिक, कीमतों में वृद्धि के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी मांग, वैश्विक स्तर पर सीमित आपूर्ति और कुछ कारोबारियों द्वारा जमाखोरी जैसे कारण हैं.

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए गए हैं. इनमें कारोबारियों पर स्टॉक लिमिट लगाना और कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देना शामिल है. मंत्रालय ने कहा, "चीनी की कीमतों में हालिया वृद्धि को एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन से जोड़ना सही नहीं है."

एथनॉल के लिए चीनी का डायवर्जन घटा

सरकार के अनुसार, एथनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12% थी, जो 2025-26 सीजन में घटकर लगभग 9% रह गई है. सरकार ने बताया कि भारत में एथनॉल उत्पादन का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से आता है.

त्योहारी सीजन से पहले चीनी के दाम बढ़े

20 अगस्त को खुदरा चीनी की कीमत बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक महीने पहले 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थी. मंत्रालय ने कीमतों में इस बढ़ोतरी के लिए अनुमान से कम घरेलू उत्पादन, त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी मांग, मौसम और फसल रोगों से हुआ नुकसान, वैश्विक आपूर्ति में कमी तथा कुछ उद्योग प्रतिभागियों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी को जिम्मेदार बताया.

सरकार ने 30 नवंबर तक देशभर में चीनी कारोबारियों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू की है. वहीं, 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को अपनी खपत के 15 दिनों से अधिक का चीनी स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी.

केंद्र ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को भी मंजूरी दी है. इसके अलावा, चीनी मिलों के पास मौजूद स्टॉक की भौतिक जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों की संयुक्त टीमें गठित की गई हैं, ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी की संभावना का पता लगाया जा सके.

चीनी उत्पादन अनुमान से कम

मंत्रालय के अनुसार, मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान घटकर करीब 30.6 मिलियन टन रह गया है. इससे पहले गन्ना उत्पादक राज्यों ने करीब 34.3 मिलियन टन उत्पादन का अनुमान जताया था.

उत्पादन में कमी के लिए गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर रोग तथा अत्यधिक बारिश के कारण जलभराव को जिम्मेदार बताया गया है. हालांकि, सरकार का कहना है कि कम उत्पादन के बावजूद घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है और अक्टूबर में अगला पेराई सीजन शुरू होने तक आपूर्ति में कोई बड़ी समस्या नहीं होगी.

सरकार ने राज्य सरकारों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह दी है. इससे त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है. सरकार के मुताबिक, अक्टूबर में चीनी उत्पादन 10 लाख टन से अधिक रह सकता है, जबकि आमतौर पर इस महीने उत्पादन करीब 3-4 लाख टन रहता है.

वैश्विक बाजार में भी दबाव

घरेलू कीमतों में तेजी ऐसे समय आई है जब वैश्विक चीनी बाजार में भी आपूर्ति की स्थिति तंग है. सरकार ने 2026-27 में वैश्विक चीनी बाजार में करीब 3.3 मिलियन टन की कमी का अनुमान लगाया है. अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतें 30 जून के 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गईं. यानी इस दौरान कीमतों में 16% से अधिक की वृद्धि हुई है. मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में इस तेजी ने घरेलू बाजार पर भी दबाव बढ़ाया है.

सरकार ने एथनॉल नीति का किया बचाव

सरकार ने एथनॉल कार्यक्रम का बचाव करते हुए कहा कि इसने चीनी उद्योग में संरचनात्मक अधिशेष को संभालने, मिलों की वित्तीय स्थिति सुधारने और गन्ना किसानों को भुगतान में मदद की है. भारत में सामान्य तौर पर हर साल 32-34 मिलियन टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 28-29 मिलियन टन है. अतिरिक्त उत्पादन से चीनी का बड़ा स्टॉक जमा हो सकता है, जिससे मिलों की कार्यशील पूंजी फंसती है और किसानों को भुगतान में देरी हो सकती है.

मंत्रालय ने कहा कि 20 अगस्त तक 2025-26 सीजन के गन्ना बकाये का 97% भुगतान किया जा चुका है. सरकार के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में चीनी उद्योग की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और सरकारी सहायता पर उसकी निर्भरता कम हुई है. 2014 से 2021 के बीच इस क्षेत्र को करीब 14,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिली थी, जबकि 2021-22 के बाद ऐसी कोई नई सब्सिडी घोषित नहीं की गई है.

सरकार ने कहा कि हालिया कदमों का उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्धता बनाए रखना और त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के बीच कीमतों पर आगे का दबाव सीमित करना है.