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UP Budget 2023 : यूपी के बजट की किसी ने की तारीफ, तो कोई बोला अफसरशाही पर लगे लगाम
शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर जो काम होना चाहिए वो अभी तक नहीं हो पा रहा है, सरकार की दिशा सही है लेकिन शिक्षा की बुनियादी स्थिति में बदलाव होना चाहिए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
यूपी सरकार ने आज बजट पेश किया है. इस बजट को लेकर आयोजित हुए BWHINDI के कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े मेहमानों ने अपनी बात रखी. किसी ने कहा कि इस बजट से जहां रोजगार की समस्या को उतना नहीं फोकस किया गया तो किसी ने कहा कि बजट की दिशा बेहद सही है. यही नहीं जबकि बीजेपी प्रवक्ता ने इस बजट को अगले 5 सालों का विजनरी बजट बताया. उन्होंने कहा कि सरकार हर दिशा में सोच रही है.
आज सरकार सर्वांगीण विकास कर रही है
यूपी बीजेपी के प्रवक्ता प्रशांत उमराव ने कहा कि हमारी 6 सालों से सरकार है और जो इस बार बजट पेश हुआ है वो किसी तत्कालीन लाभ के लिए घोषणा नहीं की गई है. जो हमारी पांच साल की योजना है उसको देखते हुए इसे रखा गया है. पहले यूपी में क्या होता था कि कुछ विशेष जगहों का ही विकास होता था, लेकिन आज सभी क्षेत्रों को विकास की नजर से देखा जा रहा है. अभी जब जीआईएस हुआ तो उसमें पूर्वांचल के विकास को लेकर भी पूरा ध्यान रखा गया है. आने वाले सालों में हम और तेजी से बढ़ेंगे. चुनाव हर साल होते हैं, बीजेपी उन पार्टियों में शामिल नहीं है जो चुनाव को देखते हुए काम करती है. हम 24 घंटे 7 दिन काम करने वाले लोग हैं और हमारी सरकार भी वैसे ही काम करती है. हमारी मेडिकल कॉलेज खोलने की योजना हो या एक्सप्रेस वे बनाने का काम हो, हम लोग लगातार विकास में लगे हुए हैं।
शिक्षा पर और ध्यान दिया जाना चाहिए
सेंट एंड्रयूज ग्रुप के सीएमडी डॉ. गिरधर शर्मा ने कहा कि शिक्षा पर जितना बजट देना चाहिए था उसमें मुझे कमी दिखाई दे रही है. सरकारी स्कूलों के इंफ्रा में बहुत बडी कमी है. अगर प्राइवेट स्कूल न हो और सरकारी तंत्र को पर्याप्त मान लें तो ये ठीक नहीं होगा. शिक्षा के लिए बजट की और ज्यादा आवश्यकता है. योजनाए जो बनाई हैं वो काम कर रही हैं लेकिन अगर हम शिक्षा की बात करते हैं तो मैं उसी क्षेत्र से आता हूं लेकिन वहां सरकार के अटेंशन की बहुत जरूरत है. मैं समझता हूं कि इस बजट के दूरगामी परिणाम होंगे. जनता में ये लाभ कैसे पहुंच पाता है. ब्यूरोक्रेसी इसे कैसे लेती है ये ज्यादा महत्वपूर्ण है. बजट की सोच अच्छी है लेकिन इसका क्रियान्वयन कैसा होगा ये देखना होगा.
पिछली योजनाओं का क्या हुआ
वरिष्ठ पत्रकार अजय शुक्ला ने कहा कि मेरे अनुसार इस बजट को लेकर जो कहा जा रहा था कि इतना बड़ा बजट बनाया गया है, वैसे देखा जाए तो बजट की राशि में हर साल इजाफा होता है, अब वो भले ही महंगाई हो या दूसरी चीजें हों, निश्चित रूप से बजट का आकार बढ़ा है. जो बजट का ये प्रावधान किया गया है उसमें युवाओं की अपेक्षाएं पूरी नहीं होती है. बेरोजगारी है उसे ये बजट एड्रेस नहीं कर पा रहा है. जहां तक बात है महिला सशक्तिकरण की, सुरक्षा की बात की जाती है तो इसे लेकर तमाम दावे किए जाते हैं. पिछली बार की योजना हो उसमें जो वायदे किए गए थे, उनमें जो बातें की गई थी चाहे वो कूकिंग गैस की बात हो, महिला सुरक्षा को लेकर हो, यूपी बाल सम्मान कोष हो, उसका क्या हुआ है. भारत में रोजाना कई महिलाओं का रेप हो जाता है, ऐसे में सुरक्षा पर भी सवाल है.
अफसरशाही पर लगाम लगनी चाहिए
साहिबादबाद इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रेसीडेंट दिनेश मित्तल कहते हैं कि इस बजट की दिशा सही है, लॉ एंड ऑर्डर में सही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर जो दिक्कत है उसमें सुधार नहीं हो रहा है. जैसा सरकार ने अपने मेनीफेस्टो में कहा था कि यूपीएसआईडीसी से जमीनों को फ्री होल्ड करेंगें लेकिन उसके बारे में दोंनो मेनीफेस्टो में बात हुई लेकिन उसे टेकअप नहीं किया गया है. आज की तारीख में इंडस्ट्री को मदद देने के लिए अफसर शाही ने जो सख्ती बरती गई है उसमें थोड़ा ढि़लाई देनी चाहिए. मैं इस बात से इततेफाक रखता हूं हाईवे बनेंगे, इंफ्रा बनेगा तो यूपी को आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता है लेकिन लेकिन अफसरशाही पर लगाम लगाना जरुरी है.
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