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नकदी संकट के संकेत, बैंकिंग सिस्टम में ₹1 लाख करोड़ डालेगा RBI

जनवरी के अंत तक फॉरवर्ड मार्केट में आरबीआई की नेट शॉर्ट डॉलर पोजीशन बढ़कर 68.42 अरब डॉलर हो गई, जो दिसंबर के अंत में 62.35 अरब डॉलर थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में संभावित नकदी कमी को दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. अग्रिम कर भुगतान, जीएसटी निपटान और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय बैंक ने ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के जरिए ₹1 लाख करोड़ की तरलता डालने की घोषणा की है. माना जा रहा है कि यह कदम बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति को स्थिर रखने और बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए उठाया गया है.

टैक्स भुगतान के बीच नकदी संतुलन की कोशिश

आरबीआई ने हाल के दिनों में बैंकिंग प्रणाली में नकदी प्रबंधन को संतुलित रखने के लिए कई कदम उठाए हैं. इसी कड़ी में केंद्रीय बैंक ने ओपन मार्केट ऑपरेशंस के तहत ₹1 लाख करोड़ की तरलता डालने का फैसला किया है. इसका मुख्य उद्देश्य मार्च में होने वाले अग्रिम कर भुगतान के कारण बैंकिंग सिस्टम से होने वाली बड़ी नकदी निकासी के असर को कम करना है. केंद्रीय बैंक इस राशि को ₹50,000 करोड़ की दो अलग-अलग किस्तों में बाजार में डालेगा. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बैंकिंग प्रणाली में संभावित अस्थायी नकदी कमी को दूर करने में मदद करेगा.

भू-राजनीतिक तनाव का भी असर

विशेषज्ञों के अनुसार बैंकिंग सिस्टम पर दबाव सिर्फ टैक्स भुगतान के कारण नहीं है. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और रुपये को स्थिर रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में आरबीआई के हस्तक्षेप ने भी नकदी स्थिति को प्रभावित किया है. इसके अलावा पहले किए गए बाय/सेल स्वैप समझौतों की मैच्योरिटी भी सिस्टम में तरलता पर दबाव डाल रही है. इन कारणों से केंद्रीय बैंक को अतिरिक्त नकदी उपलब्ध कराने की जरूरत महसूस हुई.

सिस्टम में पहले से मौजूद है अतिरिक्त नकदी

नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को बैंकिंग प्रणाली में लगभग ₹3.02 लाख करोड़ की अतिरिक्त तरलता मौजूद थी. हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि मार्च के दौरान अग्रिम कर और जीएसटी भुगतान के कारण सिस्टम में नकदी अस्थायी रूप से घट सकती है. इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने समय रहते ओएमओ के जरिए नकदी डालने का फैसला किया है.

विशेषज्ञों के अनुसार आरबीआई का यह कदम समय पर उठाया गया फैसला है. उन्होंने कहा कि अग्रिम कर और जीएसटी भुगतान के कारण बैंकिंग प्रणाली में अस्थायी नकदी कमी की आशंका रहती है. ऐसे में ओएमओ के जरिए ₹1 लाख करोड़ की टिकाऊ तरलता डालना बाजार को स्थिर रखने में मदद करेगा. उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया संकट के बाद डॉलर-रुपया बाजार में केंद्रीय बैंक के लगातार हस्तक्षेप का असर भी नकदी स्थिति पर पड़ा है.

फॉरवर्ड मार्केट में बढ़ी RBI की पोजीशन

रिपोर्ट के मुताबिक रुपये को स्थिर रखने के लिए आरबीआई ने स्पॉट डॉलर बिक्री की बजाय फॉरवर्ड और स्वैप इंटरवेंशन का ज्यादा सहारा लिया है. इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर तत्काल दबाव तो कम पड़ा है, लेकिन भविष्य में इन अनुबंधों की मैच्योरिटी के समय डॉलर देनदारियां बढ़ सकती हैं. जनवरी के अंत तक फॉरवर्ड मार्केट में आरबीआई की नेट शॉर्ट डॉलर पोजीशन बढ़कर 68.42 अरब डॉलर हो गई, जो दिसंबर के अंत में 62.35 अरब डॉलर थी.


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