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SEC की कार्रवाई से अडानी ग्रुप में हलचल, मार्केट कैप से उड़े 12.5 अरब डॉलर
SEC की ताजा कार्रवाई ने अडानी ग्रुप एक बार फिर वैश्विक नियामकीय जांच के दायरे में ला खड़ा किया है. बाजार ने इस घटनाक्रम पर तत्काल और तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसका असर शेयर कीमतों और कुल बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट के रूप में सामने आया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
अमेरिकी बाजार नियामक की हालिया कार्रवाई ने अडानी ग्रुप के लिए एक बार फिर मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. शुक्रवार को समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे अदाणी ग्रुप का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 12.5 अरब डॉलर घट गया. यह गिरावट अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) की ओर से दायर एक याचिका के बाद आई है.
SEC ने अदालत से मांगी समन जारी करने की अनुमति
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार बंद होने के बाद सामने आई SEC की फाइलिंग में बताया गया कि नियामक ने अदालत से अदाणी समूह के संस्थापक गौतम अडानी और समूह के वरिष्ठ कार्यकारी सागर अडानी को व्यक्तिगत रूप से समन जारी करने की अनुमति मांगी है. यह अनुरोध कथित धोखाधड़ी और 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत योजना से जुड़े मामले में किया गया है.
शेयर बाजार में दिखा सीधा असर
SEC की सूचना का असर शुक्रवार के कारोबार में साफ नजर आया.
- अडानी एंटरप्राइजेज निफ्टी 50 की सबसे ज्यादा गिरने वाली कंपनी रही.
- कंपनी का शेयर 10.65% टूटकर 1,864.20 रुपये पर बंद हुआ.
- निफ्टी 50 इंडेक्स में कुल मिलाकर 0.95% की गिरावट दर्ज की गई.
- समूह की अन्य कंपनियों के शेयरों में 3.4% से लेकर 14.54% तक की गिरावट देखी गई.
नवंबर 2024 के अभियोग से जुड़ा मामला
नवंबर 2024 में दाखिल अमेरिकी अभियोग में आरोप लगाया गया था कि अडानी ग्रुप के कुछ अधिकारियों ने अडानी ग्रीन एनर्जी द्वारा उत्पादित बिजली की खरीद सुनिश्चित करने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की योजना में भूमिका निभाई थी.
अमेरिकी कानून क्या कहता है
अमेरिकी कानून विदेशी कंपनियों को, जो वहां के निवेशकों से पूंजी जुटाती हैं, कारोबार हासिल करने के लिए विदेशों में रिश्वत देने से रोकता है. इसके अलावा, निवेश जुटाने के दौरान झूठे या भ्रामक बयान देने पर भी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है. दस्तावेजों के मुताबिक, भारत पहले ही दो बार ऐसे समन तामील करने के अनुरोधों को खारिज कर चुका है, जिन्हें SEC पिछले साल से भेजने की कोशिश कर रहा है.
उधर, अडानी ग्रुप ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि वह अपने बचाव के लिए हरसंभव कानूनी कदम उठाएगा.
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को लग रहा था कि अदाणी समूह से जुड़े सभी मामले सुलझ चुके हैं और समूह को क्लीन चिट मिल गई है. ऐसे में SEC की यह फाइलिंग बाजार के लिए अप्रत्याशित रही. उनका मानना है कि अगले कदमों की कोई स्पष्ट समयसीमा न होने के कारण यह मुद्दा कम से कम दो सप्ताह तक बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकता है, खासकर तब जब समग्र बाजार सेंटिमेंट पहले से ही कमजोर बना हुआ है.
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