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सेबी की सख्ती, BofA पर ‘चाइनीज वॉल’ तोड़ने और जानकारी लीक करने का आरोप

सेबी की यह कार्रवाई न केवल बैंक ऑफ अमेरिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि भारत के पूंजी बाजार में पारदर्शिता और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था के महत्व को भी रेखांकित करती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago

भारत के पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) की एक इकाई पर इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के उल्लंघन और आंतरिक “चाइनीज वॉल” तोड़ने के गंभीर आरोप लगाए हैं. यह मामला वर्ष 2024 में हुए करीब 180 मिलियन डॉलर के एक बड़े शेयर सौदे से जुड़ा है. सेबी की यह कार्रवाई बैंकिंग और निवेश जगत में हलचल मचा रही है.

ABSL AMC शेयर बिक्री से जुड़ा है पूरा मामला

सेबी द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, यह मामला मार्च 2024 में आदित्य बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट (ABSL AMC) के शेयरों की बिक्री से संबंधित है. इस सौदे को संभालने की जिम्मेदारी बैंक ऑफ अमेरिका की घरेलू सिक्योरिटीज इकाई को सौंपी गई थी. इसके बाद सेबी ने बैंक की भूमिका की विस्तृत जांच शुरू की.

डील टीम पर अप्रकाशित जानकारी के दुरुपयोग का आरोप

जांच में सामने आया कि बैंक की डील टीम के पास शेयर बिक्री से जुड़ी अप्रकाशित और कीमत को प्रभावित करने वाली संवेदनशील जानकारी थी. इसके बावजूद, डील टीम ने संभावित निवेशकों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क किया. सेबी का आरोप है कि यह संपर्क इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन करता है.

ब्रोकिंग और रिसर्च टीमों को भी शामिल किया गया

नोटिस के मुताबिक, डील टीम के कहने पर बैंक की ब्रोकिंग इकाई, रिसर्च टीम और एशिया-पैसिफिक सिंडिकेट टीम ने निवेशकों से बातचीत की. इस दौरान वैल्यूएशन रिपोर्ट्स और अन्य गोपनीय जानकारियां साझा की गईं. 30 अक्टूबर को जारी नोटिस में सेबी ने कहा कि यह व्यवहार आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था और गोपनीयता के सिद्धांतों के खिलाफ है. रॉयटर्स ने इस नोटिस की समीक्षा की है.

‘चाइनीज वॉल’ बनाए रखने में विफलता

सेबी ने स्पष्ट किया कि बैंक की डील टीम ब्रोकिंग और रिसर्च इकाइयों के साथ आवश्यक ‘चाइनीज वॉल’ बनाए रखने में विफल रही. इससे संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा प्रभावित हुई और बाजार की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए.

जांच में तथ्य छिपाने और गलत बयान देने का आरोप

नियामक का यह भी कहना है कि जांच के दौरान बैंक ने कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को दबाया और भ्रामक बयान दिए. हालांकि, बैंक ऑफ अमेरिका और सेबी दोनों ने ही इस मामले पर रॉयटर्स द्वारा भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया. इस नोटिस की खबर सबसे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने प्रकाशित की थी.

बिना दोष स्वीकार किए निपटारे की कोशिश

मामले से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, बैंक ने आरोपों का निपटारा करने के लिए सेबी के पास आवेदन किया है, बिना किसी दोष को स्वीकार किए. यह आवेदन फिलहाल सेबी की समीक्षा में है. सूत्र ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नाम उजागर न करने की शर्त पर यह जानकारी दी.

व्हिसलब्लोअर शिकायत से खुला था मामला

यह पूरा मामला वर्ष 2024 में एक व्हिसलब्लोअर की शिकायत के बाद सामने आया था. इसके बाद बैंक ने आंतरिक जांच शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को अपने पद छोड़ने पड़े.

निवेशकों से संपर्क पर उठे सवाल

सेबी के नोटिस में तीन निवेशकों से संपर्क का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है. इनमें एचडीएफसी लाइफ, नॉर्गेस बैंक और एनाम होल्डिंग्स शामिल हैं. सेबी का कहना है कि इनसाइडर ट्रेडिंग नियम किसी निवेश बैंक को यह अनुमति नहीं देते कि वह कीमत-संवेदनशील जानकारी को, बिना वैध उद्देश्य के, डील टीम के बाहर साझा करे.

घोषणा से पहले मांगा गया निवेशकों से फीडबैक

सेबी के अनुसार, बैंक को 28 फरवरी 2024 को यह सौदा संभालने के लिए नियुक्त किया गया था. इसके बावजूद, 18 मार्च 2024 को औपचारिक घोषणा से पहले ही बैंक की रिसर्च, ब्रोकिंग और एशिया-पैसिफिक टीमों ने निवेशकों से फीडबैक लेना शुरू कर दिया. सेबी ने इसे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है.

गोपनीय वैल्यूएशन रिपोर्ट साझा करने के उदाहरण

नोटिस में एक उदाहरण देते हुए कहा गया है कि डील टीम ने ब्रोकिंग इकाई को निर्देश दिया था कि वह ABSL AMC और उसकी प्रमोटर कंपनी आदित्य बिड़ला समूह की वैल्यूएशन रिपोर्ट एनाम होल्डिंग्स को दे. एक अन्य मामले में, हांगकांग स्थित एशिया-पैसिफिक सिंडिकेट टीम से नॉर्गेस बैंक की रुचि पर फीडबैक लेने को कहा गया, जबकि यह टीम डील टीम का हिस्सा नहीं थी.

‘नीड-टू-नो’ सिद्धांत का उल्लंघन

सेबी ने कहा कि ABSL AMC से जुड़े सौदों की जानकारी को ‘जरूरत के आधार पर’ साझा नहीं किया गया. हालांकि, नोटिस में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किसी विशेष कीमत-संवेदनशील जानकारी का प्रत्यक्ष रूप से आदान-प्रदान हुआ या नहीं. इस मामले पर एचडीएफसी लाइफ, नॉर्गेस बैंक और एनाम होल्डिंग्स ने भी रॉयटर्स के सवालों का जवाब नहीं दिया.


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