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SEBI की तैयारी: KYC और डिजिटल सिग्नेचर नियम होंगे सरल, बढ़ेगा विदेशी निवेश
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरल नियमों के जरिए निवेश में बड़ा भरोसा मिलेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से एक नया फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है. इस योजना के तहत अब एक कॉमन KYC सिस्टम और India Digital Signature के जरिए दस्तावेजी प्रक्रिया को और अधिक सहज और पारदर्शी बनाया जाएगा. तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
SEBI ने पिछले सालों में उठाए कई अहम कदम
पिछले एक साल के दौरान SEBI ने FPI ऑनबोर्डिंग को सुगम बनाने के लिए कई सुधार किए हैं. इनमें सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करने वालों को छूट, डिस्क्लोजर नियमों में राहत और हाल ही में SWAGAT-FI फ्रेमवर्क को मंजूरी देना शामिल है. यह सिंगल-विंडो सिस्टम विशेष रूप से गवर्नमेंट-लिंक्ड फंड्स, पेंशन फंड्स और सॉवरेन वेल्थ फंड्स के लिए डिजाइन किया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय और पूर्णकालिक सदस्य अनंत नारायण ने हाल ही में संकेत दिया कि नियामक निकट भविष्य में और भी सुधारात्मक कदम उठा सकता है.
इंडिया डिजिटल सिग्नेचर को अपनाने की अपील
SEBI ने FPIs से आग्रह किया है कि वे India Digital Signature को व्यापक रूप से अपनाएं. इसका मकसद कानूनी दस्तावेजों को अधिकृत करने की प्रक्रिया को तेज और कागजी कार्यवाही से मुक्त बनाना है. चेयरमैन पांडेय के अनुसार, SEBI अब डिजिटल सिग्नेचर को कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म (CAF) से इंटीग्रेट करने जा रहा है, जिससे रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक कई दस्तावेजों की जरूरत खत्म हो जाएगी.
कॉमन KYC फ्रेमवर्क की ओर बढ़ते कदम
SEBI और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बीच एक साझा KYC सिस्टम पर चर्चा चल रही है. इसका उद्देश्य बैंक और FPI दोनों के लिए एकीकृत और सरल KYC प्रक्रिया लागू करना है, विशेषकर लो-रिस्क कैटेगरी वाले निवेशकों के लिए, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार SEBI चेयरमैन और RBI गवर्नर के बीच हाल ही में इस मुद्दे पर बैठक भी हुई है. इससे दोनों पक्षों को सुविधा होगी और निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी.
SWAGAT-FI के तहत मिलेंगी बड़ी राहतें
नए सुधारों के तहत SWAGAT-FI फ्रेमवर्क के पात्र FPI अब हर 3 साल की बजाय 10 साल में एक बार ही रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराएंगे. इसके लिए उन्हें $2,500 की एकमुश्त KYC फीस देनी होगी, जो पहले हर तीन साल पर ली जाती थी. इसके अलावा, इन्हें NRI और OCI निवेशकों पर लागू 50% कुल निवेश सीमा से भी छूट दी जाएगी. यह कदम विदेशी निवेश को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक और बड़ा प्रयास है.
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