होम / बिजनेस / SEBI का बड़ा कदम: मार्केट इंटरमीडिएटरीज नियमों में बदलाव का प्रस्ताव
SEBI का बड़ा कदम: मार्केट इंटरमीडिएटरीज नियमों में बदलाव का प्रस्ताव
SEBI के ये प्रस्ताव पूंजी बाजार में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago
भारतीय पूंजी बाजार के नियामक SEBI ने बुधवार को मार्केट इंटरमीडिएटरीज के लिए लागू ‘फिट एंड प्रॉपर पर्सन’ फ्रेमवर्क में बड़े बदलावों का प्रस्ताव पेश किया है. इसका उद्देश्य रेगुलेटरी प्रक्रियाओं में स्पष्टता, पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ाना है.
नियमों में बदलाव का मकसद
SEBI ने अपने कंसल्टेशन पेपर में मार्केट इंटरमीडिएटरीज रेगुलेशन्स, 2008 की अनुसूची-2 में संशोधन का सुझाव दिया है. यह प्रावधान मुख्य रूप से मध्यस्थों, उनके प्रमुख प्रबंधन कार्मिकों (KMP) और नियंत्रण रखने वाले व्यक्तियों पर लागू होंगे.
मार्केट इंटरमीडिएटरीज की प्रमुख श्रेणियाँ:
1. शेयर ब्रोकर
2. म्युचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स
3. निवेश सलाहकार
SEBI का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों से नियमों की प्रक्रिया में अनिश्चितता कम होगी और सभी पक्षों के लिए सुनवाई का अधिकार सुनिश्चित होगा.
अयोग्यता और सुनवाई में बदलाव
नई सिफारिशों के तहत SEBI ने यह स्पष्ट किया है कि केवल अंतिम परिसमापन आदेश ही ‘उपयुक्त और सक्षम व्यक्ति’ के आकलन के लिए मान्य होगा.
ये होंगे बदलाव
1. किसी भी अयोग्यता से जुड़ी घटना की जानकारी सात दिन के भीतर SEBI को देना अनिवार्य होगी.
2. बिना उचित सुनवाई के किसी व्यक्ति को ‘उपयुक्त और सक्षम’ नहीं माना जाएगा.
3. सुनवाई के अधिकार को नियमों में स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाएगा, जिससे प्रक्रियात्मक अस्पष्टता दूर होगी.
SEBI ने मौजूदा प्रक्रिया में सुधार कर नियामक निष्पक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की है.
कारण बताओ नोटिस की अवधि घटाना
कंसल्टेशन पेपर में SEBI ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद आवेदन पर विचार की अवधि को एक साल से घटाकर छह महीने किया जाए. इसके अलावा, ग्रुप संस्थाओं और सहयोगी इकाइयों से जुड़े प्रावधानों में भी स्पष्टता लाने का सुझाव दिया गया है. SEBI ने इन प्रस्तावों पर 25 फरवरी 2026 तक सार्वजनिक टिप्पणियाँ आमंत्रित की हैं.
टैग्स