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सेबी की बड़ी कार्रवाई, SME शेयर में हेरफेर के आरोप में 26 लोगों पर रोक और जुर्माना

नियामक का मानना है कि सख्त कदमों से न केवल दोषियों पर लगाम लगेगी, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा और बाजार की पारदर्शिता बनी रहेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago

एसएमई सेगमेंट में निवेशकों के हितों की सुरक्षा को लेकर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कड़ा रुख अपनाया है. डीयू डिजिटल ग्लोबल के शेयरों में कथित कीमत हेरफेर के मामले में सेबी ने 26 व्यक्तियों को प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है. इसके साथ ही इन पर कुल 1.85 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है और अवैध रूप से कमाए गए 98.78 लाख रुपये वापस करने का आदेश भी दिया गया है.

12 रुपये से 296 रुपये तक पहुंची थी शेयर कीमत

सेबी ने 142 पृष्ठों के विस्तृत आदेश में साफ कहा है कि संबंधित व्यक्तियों ने संगठित तरीके से ट्रेडिंग कर शेयर की कीमत और वॉल्यूम में कृत्रिम बढ़ोतरी की. नियामक ने माना कि यह गतिविधियां निवेशकों को गुमराह करने वाली थीं और इससे बाजार की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचा.सेबी की जांच शेयर की असामान्य तेजी के बाद शुरू की गई थी. डीयू डिजिटल ग्लोबल का शेयर अगस्त 2021 में करीब 12 रुपये प्रति शेयर था, जो नवंबर 2022 में बढ़कर 296.05 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया. इतनी तेज बढ़त के पीछे किसी ठोस कारोबारी आधार के बजाय संभावित हेरफेर की आशंका जताई गई थी.

जुड़े हुए ट्रेडरों ने अपनाई धोखाधड़ी वाली रणनीति

जांच के दौरान सेबी ने पाया कि कुछ आपस में जुड़े ट्रेडरों के समूह ने सर्कुलर ट्रेडिंग और अन्य धोखाधड़ी वाली रणनीतियों का इस्तेमाल किया. इससे शेयर में नकली मांग का माहौल बनाया गया और कीमत तथा कारोबार के वॉल्यूम को कृत्रिम रूप से बढ़ाया गया.

पहले भी दंडित हो चुके हैं कुछ आरोपी

सेबी ने यह भी कहा कि इस मामले में शामिल कुछ व्यक्तियों को पहले भी बाजार नियामक के आदेशों में दंडित किया जा चुका है. इसके बावजूद उन्होंने दोबारा ऐसे ही नियमविरोधी तरीके अपनाए, जिसे गंभीर उल्लंघन माना गया है.

निवेशकों के भरोसे को नुकसान

अपने आदेश में सेबी ने कहा कि जब नोटिसधारक और उनसे जुड़ी संस्थाएं समन्वित ट्रेडिंग के जरिए कीमतों में हेरफेर करती हैं, तो इसका सीधा नुकसान आम निवेशकों को होता है. नियामक के मुताबिक ऐसी गतिविधियां एसएमई सेगमेंट की लिस्टिंग और ट्रेडिंग की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं.

सर्कुलर ट्रेडिंग का कोई आर्थिक औचित्य नहीं

सेबी ने स्पष्ट किया कि सर्कुलर ट्रेडिंग का उद्देश्य केवल कीमत और वॉल्यूम में हेरफेर करना होता है और इसका कोई वास्तविक आर्थिक मकसद नहीं होता. इसी वजह से नियामक प्रतिक्रिया को मजबूत और प्रभावी बनाना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके.

 


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