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सेबी की आय में जबरदस्त बढ़ोतरी, FY25 में 31% उछाल के साथ 2,713 करोड़ रुपये पर पहुंची कमाई
कैग की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय विवरणों में दिखाए गए लीज डिपॉजिट और निष्पादित लीज समझौतों के आधार पर गणना की गई लीज देनदारी के आंकड़ों में अंतर पाया गया. इससे संकेत मिलता है कि कुछ वित्तीय रिकॉर्ड्स में समन्वय की आवश्यकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की आय में वित्त वर्ष 2025 के दौरान मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है. नियामक की कुल आय 31 प्रतिशत बढ़कर 2,713 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष 2024 में 2,075 करोड़ रुपये थी. सेबी के ऑडिटेड वार्षिक खातों के अनुसार इसी अवधि में उसका कैपिटल फंड भी बढ़कर 7,235 करोड़ रुपये हो गया, जो सालाना आधार पर करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है.
सेटलमेंट और कंपाउंडिंग चार्ज से आय में उछाल
वित्त वर्ष 2025 में सेबी की आय बढ़ने का एक बड़ा कारण सेटलमेंट और कंपाउंडिंग चार्ज से होने वाली कमाई में तेज बढ़ोतरी रहा. ये आय पिछले साल के 104 करोड़ रुपये से बढ़कर 815 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. सेबी के सेटलमेंट ढांचे के तहत किसी भी जांच या कार्रवाई का सामना कर रही कंपनियां या संस्थाएं बिना गलती स्वीकार किए तय राशि का भुगतान कर मामले को निपटा सकती हैं.
निवेश पोर्टफोलियो में भी हुआ इजाफा
बीते वित्त वर्ष के दौरान सेबी का निवेश पोर्टफोलियो भी मजबूत हुआ है. नियामक ने सरकारी प्रतिभूतियों में करीब 2,857 करोड़ रुपये का निवेश किया. इसके अलावा अनुसूचित बैंकों में जमा के रूप में 2,215 करोड़ रुपये रखे गए, जबकि नेशनल सेंटर फॉर फाइनेंशियल एजुकेशन में 30 करोड़ रुपये का निवेश किया गया.
कैग ने उठाए आंतरिक नियंत्रण से जुड़े सवाल
हालांकि, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट में कुछ आंतरिक नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर चिंता भी जताई गई है. रिपोर्ट के अनुसार सेबी के मुख्य कार्यालय और विभिन्न शाखाओं के खातों में कुछ बैलेंस का मिलान नहीं हो पाया, जिससे लेनदेन के रिकॉर्ड में विसंगति की आशंका जताई गई है.
लीज जमा से जुड़ी विसंगतियों का जिक्र
कैग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्तीय विवरणों में दिखाए गए लीज डिपॉजिट और निष्पादित लीज समझौतों के आधार पर गणना की गई लीज देनदारी के आंकड़ों में अंतर पाया गया. इससे संकेत मिलता है कि कुछ वित्तीय रिकॉर्ड्स में समन्वय की आवश्यकता है.
नियामक की वित्तीय स्थिति और मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि आय और कैपिटल फंड में बढ़ोतरी से सेबी की वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है. इससे बाजार नियामक को पूंजी बाजार में निगरानी, निवेशक संरक्षण और वित्तीय जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों को और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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