बाजार नियामक सेबी निवेशकों के हित में कार्रवाई करता रहता है. इस बार भी उसकी तरफ से ऐसा किया गया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
बाजार नियामक SEBI की एक कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई है. सेबी ने एक न्यूज चैनल के गेस्ट एक्सपर्ट्स सहित 10 फर्मो को इक्विटी मार्केट से प्रतिबंधित कर दिया है. साथ ही गैर-कानूनी तरीके से इनके द्वारा कमाए गए 7.41 करोड़ रुपए लौटाने का भी आदेश दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चैनल के ऐसे एक्सपर्ट्स पर कार्रवाई हुई है, जो 1 फरवरी 2022 से 31 दिसंबर 2022 तक सक्रिय थे. सेबी ने अपनी जांच में पाया है कि कुछ एक्सपर्ट्स ने गैर-कानूनी ट्रेड में सीधे तौर पर हिस्सा लिया, जबकि कुछ सहायक के तौर पर सक्रिय थे.
इन पर चला SEBI का चाबुक
सेबी की जांच में यह सामने आया था कि कुछ गेस्ट एक्सपर्ट संबंधित न्यूज चैनल पर शेयर संबंधी अपनी सिफारिशों के प्रसारण से पहले ही कुछ फर्मों को अपनी अनुशंसाओं के बारे में बता देते थे. बाजार नियामक ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि गेस्ट एक्सपर्ट किरण जाधव, आशीष केलकर, मुदित गोयल, हिमांशु गुप्ता और सिमी भौमिक से मिलने वाली शेयर अनुशंसा संबंधी अग्रिम जानकारी के आधार पर पार्थ सारथी धर, निर्मल कुमार सोनी, एसएएआर कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड, कन्हैया ट्रेडिंग कंपनी और मनन शेयरकॉम प्राइवेट लिमिटेड ने उन सौदों से अनुचित रूप से लाभ कमाया.
3 कैटेगरी में किया विभाजित
सेबी ने कहा कि आरोपी संस्थाओं ने ऐसे शेयर सौदों के निपटान से 7.41 करोड़ रुपए का गैरकानूनी लाभ कमाया और इस लाभ को सहमति के तहत गेस्ट एक्सपर्ट्स के साथ साझा भी किया गया. सेबी ने आरोपियों को 3 कैटेगरी में विभाजित किया है. मुनाफा कमाने वाले (Profit Makers), जिन्हें इंसाइडर इंफोर्मेशन से फायदा मिला, इनेबलर्स यानी प्रॉफिट कमाने वालों को मदद करने वाले और गेस्ट एक्सपर्ट्स, जो गैर-सार्वजनिक जानकारी देते हैं. सेबी की जांच फरवरी और दिसंबर 2022 के बीच चली. इस दौरान, बैंक और अन्य डिटेल्स के साथ SMS, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम चैट का विश्लेषण किया गया.
बताया जा रहा है कि कुछ गेस्ट एक्सपर्ट ने शो से पहले सिफारिशें साझा करने और प्रॉफिट शेयरिंग की बात को स्वीकार किया है.
21 दिन में देना होगा जवाब
रिपोर्ट्स के अनुसार, SEBI ने जांच के तहत तलाशी और जब्ती अभियान चलाकर कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे. बाजार नियामक ने आरोपी संस्थाओं के बैंक खातों से डेबिट को बैन कर दिया है. सेबी ने संस्थाओं को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए 21 दिन का समय दिया है. साथ ही संबंधित चैनल को अंतिम आदेश पारित होने तक अपने शो के सभी रिकॉर्ड, दस्तावेज और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है. बता दें कि सेबी निवेशकों के हित में इस तरह की कड़ी कार्रवाई पहले भी कर चुका है.
IMF ने 2028 में भारत की अर्थव्यवस्था के 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान घटाकर 2029 कर दिया है. रुपये की कमजोरी से डॉलर में जीडीपी का आकार घटने का अनुमान है, जबकि मजबूत घरेलू मांग के कारण वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 फीसदी किया गया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी देश के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य में देरी कर सकती है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अक्टूबर 2026 के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के अनुसार, भारत अब 2028 के बजाय 2029 में इस आंकड़े को पार कर सकता है. हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की रैंकिंग में भारत की स्थिति मजबूत होने का अनुमान है. वर्ष 2027 में भारत जापान और ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
आईएमएफ ने भारत की घरेलू आर्थिक वृद्धि को लेकर सकारात्मक अनुमान जताया है. मजबूत घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों के चलते वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर का अनुमान 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया गया है. ऐसे में सवाल है कि जब देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार मजबूत है, तो 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में देरी क्यों हो रही है?
रुपये की कमजोरी ने बिगाड़ा 5 ट्रिलियन डॉलर का गणित
किसी देश की अर्थव्यवस्था का वैश्विक आकार और रैंकिंग तय करने के लिए उसकी जीडीपी को डॉलर में भी मापा जाता है. रुपये की विनिमय दर में बदलाव का सीधा असर इस गणना पर पड़ता है. रुपये की कीमत गिरने पर समान घरेलू आर्थिक उत्पादन का डॉलर में मूल्य कम हो जाता है.
आईएमएफ ने अप्रैल 2026 में अनुमान लगाया था कि भारत की अर्थव्यवस्था 2028 में 5.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगी. अक्टूबर के नए अनुमान में इसे घटाकर 4.996 ट्रिलियन डॉलर कर दिया गया है. यानी भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार करने के लिए अब 2029 तक इंतजार करना पड़ सकता है.
आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2026 में 4.06 ट्रिलियन डॉलर और 2027 में 4.52 ट्रिलियन डॉलर रहेगा. वर्ष 2028 में इसके 4.996 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इसके बाद 2029 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार बढ़कर 5.54 ट्रिलियन डॉलर हो सकता है.
रुपये में बढ़ेगी जीडीपी, फिर भी डॉलर में घटा अनुमान
आईएमएफ के ताजा अनुमानों में रुपये के हिसाब से भारत की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ा है. वर्ष 2028 में देश की नाममात्र जीडीपी 477.1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जबकि अप्रैल में यह अनुमान 471.9 लाख करोड़ रुपये था. यानी रुपये के हिसाब से अनुमान में करीब 1.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
इसके बावजूद डॉलर में जीडीपी का अनुमान घट गया है. इसकी प्रमुख वजह रुपये की विनिमय दर में संभावित गिरावट है. आईएमएफ ने 2027 के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये की अनुमानित विनिमय दर 93 रुपये से बढ़ाकर 95 रुपये प्रति डॉलर कर दी है. वहीं, 2028 के लिए औसत विनिमय दर का अनुमान 93.3 रुपये से बढ़ाकर 95.5 रुपये प्रति डॉलर किया गया है.
रुपये की कीमत में गिरावट का असर इस बात से समझा जा सकता है कि समान राशि को डॉलर में बदलने पर पहले की तुलना में कम डॉलर मिलते हैं. इसी वजह से घरेलू अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ने के बावजूद डॉलर में उसका मूल्य अपेक्षाकृत कम रह सकता है.
इस साल रुपये में 5 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को रुपया 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. रुपये में गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को भी कदम उठाने पड़े हैं.
2027 में जापान और ब्रिटेन से आगे निकल सकता है भारत
5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में देरी के बावजूद वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में भारत की स्थिति मजबूत होने का अनुमान है. आईएमएफ के अनुमानों के मुताबिक, 2027 में भारत की जीडीपी 4.52 ट्रिलियन डॉलर रह सकती है. इसके साथ भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
तुलना करें तो 2027 में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का आकार 4.49 ट्रिलियन डॉलर और जापान का 4.47 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. हालांकि, इन तीनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच अंतर कम है. ऐसे में विनिमय दरों में बदलाव से उनकी वास्तविक रैंकिंग प्रभावित हो सकती है.
आईएमएफ के अनुमान के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 2030 में 6.13 ट्रिलियन डॉलर और 2031 में 6.74 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. इस अनुमान के आधार पर भारत 2031 में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. फिलहाल भारत से आगे अमेरिका, चीन और जर्मनी हैं.
घरेलू मांग से मजबूत रहेगी आर्थिक वृद्धि
डॉलर में जीडीपी के अनुमान में कमी के बीच भारत के लिए राहत की बात यह है कि आईएमएफ ने आर्थिक विकास दर का अनुमान बढ़ाया है. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी किया गया है. इसके अलावा, 2027 में रुपये के हिसाब से नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर 10.8 फीसदी के पुराने अनुमान से बढ़कर 11.7 फीसदी रहने की संभावना जताई गई है.
ये अनुमान बताते हैं कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था में विकास की रफ्तार मजबूत बनी हुई है. हालांकि, डॉलर में अर्थव्यवस्था का आकार केवल घरेलू उत्पादन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि रुपये और डॉलर के बीच विनिमय दर भी इसमें अहम भूमिका निभाती है. इसलिए भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का समय आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ रुपये की चाल पर भी निर्भर करेगा.
भारतीय विज्ञापन एजेंसियों के संगठन ने वर्ष 2026-27 के एजेंडे के तहत क्रिएटिव काउंसिल का गठन किया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय विज्ञापन एजेंसियों के संगठन एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने पहली बार क्रिएटिव काउंसिल का गठन किया है. इस परिषद का नेतृत्व बीबीडीओ ग्रुप इंडिया के चेयरमैन और ग्रुप चीफ क्रिएटिव ऑफिसर जोसी पॉल करेंगे. इस पहल के जरिए संगठन भारतीय विज्ञापन उद्योग में रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और इसके पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में काम करेगा.
क्रिएटिव काउंसिल का उद्देश्य स्वतंत्र विज्ञापन एजेंसियों, क्षेत्रीय प्रतिभाओं और उभरते रचनात्मक पेशेवरों सहित अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों को एक मंच पर लाना है. इसके माध्यम से सहयोग, नए प्रयोग, मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों व पीढ़ियों के बीच विचारों के आदान-प्रदान के अवसर तैयार किए जाएंगे.
विज्ञापन जगत से बाहर के विशेषज्ञ भी होंगे शामिल
जोसी पॉल ने इस पहल पर कहा कि क्रिएटिव काउंसिल प्रतिभाओं को निखारने, विविधता को प्रोत्साहित करने और नए विचारों के विकास के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने का अवसर है. उन्होंने बताया कि परिषद के तहत अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों के बीच संवाद, प्रयोग, बहस, प्रदर्शन, पाठ सत्र और फिल्मों की स्क्रीनिंग जैसे कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है.
उन्होंने कहा कि विज्ञापन जगत के बाहर के लोगों को भी इस पहल से जोड़ा जाएगा. इनमें कलाकार, वैज्ञानिक, फिल्म निर्माता, डिजाइनर, उद्यमी और विचारक शामिल होंगे. इससे रचनात्मक समुदाय को नए दृष्टिकोण मिल सकेंगे और उद्योग में नए विचारों को बढ़ावा मिलेगा.
जोसी पॉल के काम को मिल चुके हैं 25 से अधिक कान्स लायंस पुरस्कार
जोसी पॉल के नेतृत्व में तैयार किए गए अभियानों को 25 से अधिक कान्स लायंस पुरस्कार मिल चुके हैं. इनमें ग्रां प्री और कई गोल्ड पुरस्कार शामिल हैं. एरियल के ‘शेयर द लोड’ अभियान को वार्क (WARC) ने लगातार दो बार दुनिया का सबसे प्रभावी अभियान माना था. यह अभियान लंबे समय तक ब्रांड निर्माण और विज्ञापन प्रभावशीलता के क्षेत्र में एक प्रमुख उदाहरण बना हुआ है.
एएएआई अध्यक्ष ने क्या कहा?
एएएआई के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संदीप गोयल ने कहा कि संगठन के इतिहास में पहली बार रचनात्मकता को संस्थागत ढांचे में सबसे प्रमुख स्थान दिया जा रहा है. उनके मुताबिक, जोसी पॉल के नेतृत्व में क्रिएटिव काउंसिल नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को मार्गदर्शन देने और देश की स्वतंत्र तथा क्षेत्रीय विज्ञापन एजेंसियों की विविधता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी. उन्होंने कहा कि विज्ञापन उद्योग ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां रणनीतिक नवाचार और रचनात्मक उत्कृष्टता को साथ लेकर आगे बढ़ने पर जोर होगा.
मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने कर्मचारियों को अक्टूबर महीने का वेतन तय समय से करीब 15 दिन पहले जारी किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अपने कर्मचारियों को जियो प्लेटफॉर्म्स के आगामी आईपीओ में निवेश करने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने कर्मचारियों को अक्टूबर महीने की सैलरी निर्धारित समय से करीब 15 दिन पहले दे दी है. कंपनी का यह कदम जियो प्लेटफॉर्म्स के आगामी आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) से पहले आया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिलायंस समूह अपने कर्मचारियों को इस आईपीओ में निवेश करने पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.
रिपोर्ट में मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया गया है कि कंपनी ने अपने समूह की विभिन्न कंपनियों में काम करने वाले करीब 4.20 लाख कर्मचारियों में से अधिकांश से संपर्क किया है. कंपनी का लक्ष्य लगभग 3.2 अरब डॉलर यानी करीब 30,213 करोड़ रुपये के प्रस्तावित शेयर निर्गम में कर्मचारियों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना है. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, कर्मचारियों को वेतन जल्दी जारी करने की कोई वजह नहीं बताई गई.
कर्मचारियों और उनके परिवारों के डीमैट खातों की जानकारी ली
रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस की ओर से कर्मचारियों से यह भी पता किया गया है कि उनके या उनके परिवार के सदस्यों के पास शेयरों में निवेश के लिए जरूरी डीमैट खाते हैं या नहीं. जिन कर्मचारियों के पास ऐसे खाते नहीं हैं, उन्हें खाते खुलवाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है.
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज में कुल 4,19,911 कर्मचारी कार्यरत थे. वहीं, कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, जियो में 74,822 कर्मचारी काम करते हैं.
जियो कर्मचारियों के लिए अलग श्रेणी में आवेदन का विकल्प
जियो प्लेटफॉर्म्स के पात्र कर्मचारी आईपीओ में कर्मचारियों के लिए आरक्षित श्रेणी के तहत आवेदन कर सकते हैं. रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों के कर्मचारी खुदरा निवेशक श्रेणी के तहत आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा, पात्र रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए भी आईपीओ में एक अलग हिस्सा आरक्षित है.
21 अक्टूबर से खुलेगा जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक सदस्यता के लिए खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. कंपनी इस निर्गम के जरिए करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. इसके लिए प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया है.
कंपनी की ओर से दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, कर्मचारियों के लिए आरक्षित हिस्से के तहत पात्र कर्मचारियों को शेयरों पर छूट भी मिलेगी. ऐसे में आईपीओ में कर्मचारियों की भागीदारी पर बाजार की नजर रहेगी.
पश्चिम एशिया में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों से वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है. रूस से ईंधन निर्यात बढ़ने की संभावना के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस पर कुछ प्रमुख प्रतिबंधों और टैरिफ में छूट दिए जाने के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई. इस फैसले से रूस से ईंधन का निर्यात बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है.
सोमवार को 23:40 GMT तक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.43 डॉलर यानी 1.30 फीसदी गिरकर 108.43 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 19 मई के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुआ था. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 53 सेंट यानी 0.52 फीसदी गिरकर 100.88 डॉलर प्रति बैरल रही.
रूस पर प्रतिबंधों में छूट से बढ़ सकती है तेल की आपूर्ति
ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर ग्राहम एक्ट के तहत कुछ प्रमुख प्रतिबंधों और टैरिफ में छूट दी. यह कानून उन्होंने पिछले महीने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की मांग कर रहे सांसदों के दबाव के बाद हस्ताक्षरित किया था. रूस पर यह दबाव यूक्रेन के साथ जारी युद्ध के कारण बनाया जा रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप इस छूट के आर्थिक प्रभावों का आकलन करने के लिए 60 दिन तक का समय ले सकते हैं.
यह फैसला ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अमेरिका को डीजल निर्यात करने को लेकर हुए समझौते के बाद आया है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका के ये कदम यूक्रेन को नुकसान पहुंचाएंगे.
रूस से अतिरिक्त ईंधन की आपूर्ति बढ़ने की संभावना ने तेल की कीमतों पर दबाव डाला. इससे पहले शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत कुछ समय के लिए 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी. मई के बाद यह पहला मौका था, जब कीमत इस स्तर पर पहुंची. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री परिवहन से जुड़े जोखिमों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं.
पश्चिम एशिया में जहाजों पर हमलों से आपूर्ति प्रभावित
रूस से अतिरिक्त तेल और ईंधन मिलने की संभावना के बावजूद पश्चिम एशिया में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल का प्रवाह काफी घट गया है. इससे कीमतों में गिरावट सीमित रही.
एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के मुताबिक, पिछले सप्ताह खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल का औसत प्रवाह सात दिन के आधार पर करीब 85 लाख बैरल प्रतिदिन रहा. इससे पिछले सप्ताह यह मात्रा 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन से अधिक थी.
केप्लर ने बताया कि पिछले सप्ताह वाणिज्यिक जहाजों से जुड़ी कम से कम 10 घटनाओं की पुष्टि हुई. ये घटनाएं क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन के सामने बढ़ते जोखिम को दर्शाती हैं.
यमन के हूती आंदोलन को लेकर भी बढ़ी चिंता
क्षेत्रीय तनाव के बीच मिस्र ने कहा कि वह यमन के ईरान समर्थित हूती आंदोलन से अपनी सुरक्षा और स्थिरता को होने वाले खतरों से निपटने के लिए सऊदी अरब को जरूरी सहयोग देने के लिए तैयार है. पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम और रूस से संभावित अतिरिक्त आपूर्ति के बीच तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका बनी हुई है.
21 अक्टूबर को खुलेगा जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ, 10.3 लाख करोड़ रुपये वैल्यूएशन का लक्ष्य
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
19 अक्टूबर से शुरू हो रहे छोटे कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजरें जियो प्लेटफॉर्म्स और पारस हेल्थकेयर के आईपीओ पर रहेंगी. दोनों कंपनियों के मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कुल 31,637.6 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है. जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ आकार के लिहाज से भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है. वहीं, दशहरा के कारण 20 अक्टूबर को शेयर बाजार बंद रहेगा.
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम सेवाओं से जुड़ी कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स अपने आईपीओ के जरिए 30,187.6 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. कंपनी का यह आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. आईपीओ के लिए कंपनी का लक्ष्य करीब 10.3 लाख करोड़ रुपये का वैल्यूएशन हासिल करना है.
इस इश्यू में 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे. कर्मचारियों को अंतिम ऑफर प्राइस पर 54 रुपये प्रति शेयर की छूट भी दी जाएगी. आईपीओ की एंकर बुक 19 अक्टूबर को खुलेगी, जिसके जरिए करीब 8,000 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है.
इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का 27,859 करोड़ रुपये का आईपीओ देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था. इसके बाद 2026 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और 2022 में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के आईपीओ आए थे.
निवेशकों के लिए कितना होगा न्यूनतम निवेश?
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेशक कम से कम 12 शेयरों के लिए बोली लगा सकेंगे. इसके बाद 12 शेयरों के गुणक में आवेदन किया जा सकेगा. प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये के प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर एक लॉट के लिए न्यूनतम निवेश 13,428 रुपये होगा. वहीं, खुदरा निवेशक अधिकतम 14 लॉट यानी 168 शेयरों के लिए 1,87,992 रुपये का निवेश कर सकेंगे.
कंपनी ने आईपीओ के तहत 50 प्रतिशत हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों (QIBs), 15 प्रतिशत गैर-संस्थागत निवेशकों (NIIs) और 35 प्रतिशत खुदरा निवेशकों के लिए निर्धारित किया है. इसके अलावा, कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये के शेयर आरक्षित किए गए हैं.
आईपीओ से मिलने वाली रकम से चुकाया जाएगा कर्ज
जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ से मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये अपनी प्रमुख सहायक कंपनी रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करेगी. जून 2026 के बजाय उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कंपनी की सहायक इकाई पर कुल 29,917.1 करोड़ रुपये का कर्ज था. बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा.
कंपनी के चेयरमैन आकाश अंबानी ने आईपीओ से पहले कहा था कि जियो प्लेटफॉर्म्स कर्ज-मुक्त स्थिति की ओर बढ़ रही है. कर्ज चुकाने से कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत होने और भविष्य की विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
पारस हेल्थकेयर का आईपीओ भी 21 अक्टूबर को खुलेगा
गुरुग्राम स्थित पारस हेल्थकेयर भी इसी सप्ताह अपना आईपीओ लेकर आ रही है. कंपनी का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. कंपनी की योजना आईपीओ के जरिए करीब 1,450 करोड़ रुपये जुटाने की है.
इसमें 500 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि प्रमोटर धर्मिंदर कुमार नागर और निवेशक कॉमेलिना (Commelina) 650 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत बेचेंगे.
जून 2026 तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पारस हेल्थकेयर उत्तर भारत, बिहार और झारखंड में आठ अस्पतालों का संचालन कर रही थी. इन अस्पतालों की कुल क्षमता 2,211 बेड की है. कंपनी नए शेयरों से मिलने वाली रकम में से 375 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने पर खर्च करेगी. शेष राशि सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए इस्तेमाल की जाएगी.
अगले सप्ताह इन आईपीओ की सब्सक्रिप्शन अवधि होगी खत्म
19 अक्टूबर को चार मेनबोर्ड आईपीओ बंद होने वाले हैं. इनमें जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस, सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज, बॉनफिग्लिओली ट्रांसमिशन और टोंबो इमेजिंग इंडिया शामिल हैं. एसएमई सेगमेंट में शेल्ज इंडिया का आईपीओ भी इसी दिन बंद होगा.
उपलब्ध सब्सक्रिप्शन आंकड़ों के अनुसार, जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के 5,012 करोड़ रुपये के आईपीओ को 31 प्रतिशत, बॉनफिग्लिओली ट्रांसमिशन के 2,534 करोड़ रुपये के इश्यू को 99 प्रतिशत, सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज के 475 करोड़ रुपये के इश्यू को 82 प्रतिशत और शेल्ज इंडिया के 60 करोड़ रुपये के आईपीओ को 91 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन मिला था. वहीं, टोंबो इमेजिंग इंडिया के 852 करोड़ रुपये के आईपीओ को 7.78 गुना बोलियां मिली थीं.
अगले सप्ताह 9 कंपनियों की लिस्टिंग
आने वाले सप्ताह में नौ कंपनियों के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की योजना है. एचडी फायर प्रोटेक्ट की लिस्टिंग 21 अक्टूबर और फ्यूजन सीएक्स की लिस्टिंग 22 अक्टूबर को प्रस्तावित है. जेटवर्क मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस, सहजानंद मेडिकल टेक्नोलॉजीज, बॉनफिग्लिओली ट्रांसमिशन और टोंबो इमेजिंग इंडिया के शेयर 23 अक्टूबर को बाजार में उतरने वाले हैं.
एसएमई सेगमेंट में वैभव व्यापार और रविता इंजीनियरिंग सर्विसेज के शेयर क्रमशः 21 और 22 अक्टूबर को एनएसई इमर्ज प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने वाले हैं. वहीं, शेल्ज इंडिया के शेयरों में 23 अक्टूबर से बीएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर कारोबार शुरू होने की योजना है.
शुक्रवार को सेंसेक्स 413.66 अंक चढ़कर 74,729.27 पर और निफ्टी 148.80 अंक मजबूत होकर 23,146.15 पर बंद हुआ था.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 19 अक्टूबर को सपाट शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. वैश्विक बाजारों में कमजोरी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में बिकवाली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से निवेशक सतर्क रह सकते हैं. इससे पहले शुक्रवार को सेंसेक्स 413.66 अंक चढ़कर 74,729.27 पर और निफ्टी 148.80 अंक मजबूत होकर 23,146.15 पर बंद हुआ था. अब निवेशकों की नजर गिफ्ट निफ्टी, कच्चे तेल की चाल, होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी. इसके अलावा, आज HDFC बैंक, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक समेत 10 शेयरों में खबरों और कारोबारी गतिविधियों के चलते हलचल देखने को मिल सकती है.
गिफ्ट निफ्टी से सपाट शुरुआत के संकेत
सोमवार सुबह शुरुआती संकेतों के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सपाट रह सकती है. गिफ्ट निफ्टी 23,120 के आसपास कारोबार कर रहा था. दूसरी ओर, एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिला. जापान का निक्केई शुरुआती कारोबार में 2.3 फीसदी तक गिरने के बाद करीब 1.1 फीसदी की कमजोरी पर था, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी हल्की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था.
अमेरिकी वायदा बाजारों में मजबूती के संकेत मिले. हालांकि, पिछले सप्ताह अमेरिकी बाजारों में AI से जुड़े निवेश की स्थिरता को लेकर चिंताओं के कारण दबाव देखा गया था. ऐसे में घरेलू बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक संकेतों की अहम भूमिका रहेगी.
शुक्रवार को सेंसेक्स 413 अंक चढ़ा, निफ्टी में भी तेजी
शुक्रवार, 16 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई. आईटी, मीडिया और मेटल शेयरों में खरीदारी से प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला. सेंसेक्स 413.66 अंक यानी 0.56 फीसदी की बढ़त के साथ 74,729.27 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 148.80 अंक यानी 0.65 फीसदी चढ़कर 23,146.15 पर पहुंच गया. इस तेजी के साथ दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुए. पूरे सप्ताह में सेंसेक्स में 3.1 फीसदी और निफ्टी में 2.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई.
AI शेयरों में बिकवाली से वैश्विक बाजारों पर दबाव
अमेरिकी बाजारों में पिछले सप्ताह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. AI में बड़े निवेश से मिलने वाले रिटर्न और इस तेजी के टिकाऊ रहने को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया.
पिछले सप्ताह S&P 500 में करीब 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक करीब 4.5 फीसदी फिसल गया. AI से जुड़े कुछ शेयरों में भी भारी गिरावट देखने को मिली. वैश्विक टेक शेयरों में कमजोरी का असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी पड़ सकता है.
महंगे कच्चे तेल से बाजार की चिंता बढ़ी
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सत्र के दौरान सतर्कता बनी रह सकती है. कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितता बाजार के लिए जोखिम बढ़ा रही हैं. WTI क्रूड करीब 97-98 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ था. कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से भारत के आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है. इससे महंगाई को लेकर चिंताएं भी बढ़ सकती हैं.
होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी खबरों पर रहेगी नजर
कच्चे तेल की आगे की चाल काफी हद तक होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर करेगी. ईरान ने दोहराया है कि अमेरिका उसकी शर्तें स्वीकार कर ले, तो इस समुद्री मार्ग को छह दिनों के भीतर दोबारा खोला जा सकता है. इन शर्तों में अमेरिकी नाकेबंदी, प्रतिबंधों और व्यापक स्तर पर संघर्ष रोकने से जुड़ी मांगें शामिल हैं.
हालांकि, किसी समझौते पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है. तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है और बाजार का भरोसा बढ़ सकता है. इसके विपरीत, तनाव बढ़ने या ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है.
आज इन 10 शेयरों पर रहेगी नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार को HDFC बैंक, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, टेक महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, हिंदुस्तान जिंक और ऑयल इंडिया के शेयर फोकस में रह सकते हैं. HDFC बैंक के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा के इस्तीफे से जुड़ी खबरों के कारण बैंक का शेयर चर्चा में रह सकता है. वहीं, ICICI बैंक और एक्सिस बैंक में तिमाही नतीजों से जुड़ी गतिविधियों पर निवेशकों की नजर रहेगी.
टेक महिंद्रा के शेयर में आईटी सेक्टर के रुझान और वैश्विक AI शेयरों में बिकवाली का असर देखने को मिल सकता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज पर जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित IPO से जुड़ी खबरों के कारण फोकस रहेगा, जबकि भारती एयरटेल की नई प्रीपेड योजनाओं से जुड़ी खबरें शेयर की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं. इसके अलावा, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट और हिंदुस्तान जिंक के तिमाही नतीजे निवेशकों के लिए अहम रहेंगे. कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच ऑयल इंडिया के शेयर पर भी नजर रखी जा सकती है.
कुल मिलाकर, शुक्रवार की तेजी के बावजूद वैश्विक अनिश्चितता और महंगे कच्चे तेल के कारण बाजार में सतर्कता बनी रह सकती है. निवेशकों के लिए कारोबारी सत्र के दौरान वैश्विक संकेतों और सेक्टरवार गतिविधियों पर नजर रखना अहम होगा.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
केंद्र सरकार ने 17 अक्टूबर को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि IDBI बैंक में हिस्सेदारी घटाने पर रोक लगाने के लिए 2003 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया. यह संशोधन न तो पारित हुआ और न ही IDBI (Repeal) Act, 2003 का हिस्सा बना.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने या बेचने के कानूनी अधिकार को दोहराया है. सरकार ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के दिसंबर 2018 के फैसले का हवाला दिया है. अदालत ने कहा था कि संसद में विधायी प्रक्रिया के दौरान दिए गए बयानों के आधार पर सरकार को बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने से नहीं रोका जा सकता, जब संबंधित कानून में ऐसी कोई रोक नहीं है.
केंद्र सरकार ने 17 अक्टूबर को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि IDBI बैंक में हिस्सेदारी घटाने पर रोक लगाने के लिए 2003 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया. यह संशोधन न तो पारित हुआ और न ही IDBI (Repeal) Act, 2003 का हिस्सा बना. सरकार का यह बयान बैंक में रणनीतिक विनिवेश को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों और चर्चाओं के बीच आया है.
हिस्सेदारी घटाने पर क्या कहता है हाईकोर्ट का फैसला?
केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के 17 दिसंबर 2018 के फैसले का उल्लेख किया. यह फैसला *All India IDBI Officers’ Association बनाम Union of India एवं अन्य* मामले में सुनाया गया था. अदालत ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि संसद में विधेयक पर चर्चा के दौरान दिए गए बयान बाद में लागू किए गए कानून के प्रावधानों को बदल नहीं सकते.
अदालत ने कहा था कि सरकार की हिस्सेदारी घटाने की शक्ति पर रोक लगाने वाला प्रस्तावित संशोधन IDBI (Repeal) Act, 2003 में शामिल नहीं किया गया था. इसलिए संसद में दिए गए बयानों के आधार पर सरकार को अपनी हिस्सेदारी घटाने या बेचने से रोकने की मांग नहीं की जा सकती.
फैसले में यह भी कहा गया था कि संबंधित कानून में कोई अस्पष्टता नहीं है और न ही ऐसा कोई प्रावधान है, जो सरकार को IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने या पूरी तरह बेचने से रोकता हो.
क्या है Promissory Estoppel का सिद्धांत?
सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में *Promissory Estoppel* के सिद्धांत से जुड़े पहलू का भी उल्लेख किया. इस कानूनी सिद्धांत के तहत कुछ परिस्थितियों में किसी पक्ष को अपने वादे या आश्वासन से पीछे हटने से रोका जा सकता है, यदि दूसरे पक्ष ने उस पर भरोसा करके कदम उठाया हो.
हालांकि, इस मामले में अदालत ने माना था कि संसद में कानून पर चर्चा के दौरान दिए गए बयानों को ऐसा आश्वासन नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर सरकार की कानूनी शक्तियों को सीमित कर दिया जाए. अदालत के मुताबिक, जब लागू कानून में सरकार की हिस्सेदारी घटाने पर रोक नहीं है, तो संसदीय बहस के बयानों के आधार पर ऐसी रोक नहीं लगाई जा सकती.
2016 के बजट में भी हिस्सेदारी घटाने का जिक्र
केंद्र सरकार ने IDBI बैंक को लेकर अपनी नीति के समर्थन में पिछले वर्षों के केंद्रीय बजट भाषणों का भी हवाला दिया. वित्त वर्ष 2016-17 के बजट भाषण में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने IDBI बैंक के बदलाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और इसमें सरकार की हिस्सेदारी 50% से नीचे लाने की संभावना पर विचार करने की बात कही थी.
बजट भाषण के पैराग्राफ 93 में इसका उल्लेख किया गया था. यह घोषणा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को मजबूत बनाने, बैंक बोर्ड ब्यूरो को सक्रिय करने और बैंकों के एकीकरण की रूपरेखा तैयार करने से जुड़े व्यापक एजेंडे का हिस्सा थी.
2021-22 के बजट में रणनीतिक विनिवेश का लक्ष्य
सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के बजट भाषण का भी हवाला दिया. तत्कालीन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने IDBI बैंक को उन सौदों में शामिल किया था, जिन्हें उस वित्त वर्ष के दौरान पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था.
यह घोषणा सरकार के रणनीतिक विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा थी. इसी बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी के निजीकरण से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया था.
सरकार ने विधायी और न्यायिक रिकॉर्ड का दिया हवाला
केंद्र सरकार के मुताबिक, IDBI (Repeal) Act, 2003 का विधायी इतिहास, दिल्ली हाईकोर्ट का 2018 का फैसला और अलग-अलग वर्षों के बजट भाषण बैंक में हिस्सेदारी को लेकर सरकार की नीति में हुए बदलाव को स्पष्ट करते हैं.
सरकार ने दोहराया कि 2018 के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया था कि संसद में दिए गए बयानों के आधार पर सरकार की हिस्सेदारी घटाने की शक्ति पर रोक नहीं लगाई जा सकती, जब लागू कानून में ऐसी कोई पाबंदी मौजूद न हो.
HDFC बैंक के कर्ज वितरण और जमा, दोनों में वृद्धि दर्ज की गई. 30 सितंबर 2026 तक बैंक का कुल ग्रॉस एडवांस सालाना आधार पर 16.3% बढ़कर 32,19,500 करोड़ रुपये हो गया.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
HDFC बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 19,510 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है. सालाना आधार पर इसमें 4.7% की बढ़ोतरी हुई है. बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 9.7% बढ़कर 34,619.2 करोड़ रुपये पर पहुंच गई. इस दौरान बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार हुआ और ग्रॉस NPA घटकर 1.11% रह गया. वहीं, कर्ज वितरण में 16.3% और जमा राशि में 18.8% की वृद्धि दर्ज की गई.
NII बढ़कर ₹34,619 करोड़ पहुंची
देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल HDFC बैंक ने 30 सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं. बैंक का शुद्ध मुनाफा पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 4.7% बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये हो गया. यह आंकड़ा बाजार के अनुमानों के अनुरूप रहा.
इस दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) सालाना आधार पर 9.7% बढ़कर 34,619.2 करोड़ रुपये हो गई. NII बैंक को कर्ज पर मिलने वाले ब्याज और जमा पर दिए जाने वाले ब्याज के बीच का अंतर है.
बैंक का कुल नेट रेवेन्यू भी बढ़कर 48,450 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 45,900 करोड़ रुपये था. तिमाही के दौरान बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) कुल परिसंपत्तियों के आधार पर 3.16% और ब्याज कमाने वाली परिसंपत्तियों के आधार पर 3.32% रहा.
ट्रेजरी से होने वाला मुनाफा घटा
दूसरी तिमाही में HDFC बैंक को फीस और कमीशन से 9,690 करोड़ रुपये की आय हुई. वहीं, अन्य स्रोतों से कुल आय 13,830 करोड़ रुपये रही. हालांकि, ट्रेजरी ट्रेडिंग से होने वाले मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई. इस मद में बैंक को 780 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 2,390 करोड़ रुपये था.
बैंक के मुताबिक, अगर ट्रेजरी ट्रेडिंग से होने वाले मुनाफे को हटा दिया जाए, तो दूसरी तिमाही में उसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 12.6% बढ़ा है.
ग्रॉस NPA घटकर 1.11% पर आया
HDFC बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला है. 30 सितंबर 2026 तक बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) अनुपात घटकर 1.11% रह गया. जून तिमाही में यह 1.17% और पिछले साल की समान अवधि में 1.24% था.
अगर कृषि क्षेत्र से जुड़े NPA को हटा दिया जाए, तो ग्रॉस NPA अनुपात 0.87% रह जाता है. रकम के लिहाज से सितंबर तिमाही के अंत में बैंक का ग्रॉस NPA 35,810 करोड़ रुपये रहा, जबकि जून तिमाही में यह 35,846 करोड़ रुपये था.
वहीं, बैंक का नेट NPA भी घटा है. जून तिमाही के 12,357 करोड़ रुपये के मुकाबले सितंबर तिमाही में यह 4.1% घटकर 11,851 करोड़ रुपये रह गया. इस दौरान नेट NPA अनुपात 0.37% दर्ज किया गया.
हालांकि, बैंक का प्रोविजन और कंटीजेंसी पर होने वाला खर्च बढ़ा है. जून तिमाही के 3,010 करोड़ रुपये के मुकाबले यह 18.7% बढ़कर 3,574 करोड़ रुपये हो गया. सालाना आधार पर इसमें 2.1% की बढ़ोतरी हुई. तिमाही में बैंक का कुल क्रेडिट कॉस्ट अनुपात 0.44% रहा.
लोन में 16.3% और जमा में 18.8% की बढ़ोतरी
HDFC बैंक के कर्ज वितरण और जमा, दोनों में वृद्धि दर्ज की गई. 30 सितंबर 2026 तक बैंक का कुल ग्रॉस एडवांस सालाना आधार पर 16.3% बढ़कर 32,19,500 करोड़ रुपये हो गया.
सेगमेंट के लिहाज से रिटेल लोन में 11.7% की बढ़ोतरी हुई. वहीं, छोटे और मध्यम उद्योगों (SME) को दिए गए कर्ज में 23.5% और कॉरपोरेट व थोक कर्ज में 16.4% की वृद्धि दर्ज की गई.
बैंक की कुल जमा राशि भी सालाना आधार पर 18.8% बढ़कर 33,27,400 करोड़ रुपये हो गई. इसमें टाइम डिपॉजिट, जिसमें फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी शामिल हैं, 22.8% बढ़े. वहीं, चालू और बचत खातों (CASA) में जमा राशि में 10.8% की वृद्धि हुई. बैंक की कुल जमा राशि में CASA की हिस्सेदारी 31.6% रही.
कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो 18.9% रहा
पूंजी के मोर्चे पर भी बैंक की स्थिति मजबूत बनी हुई है. बेसल III नियमों के तहत HDFC बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो 18.9% रहा. यह 11.9% की नियामकीय न्यूनतम सीमा से काफी अधिक है. वहीं, बैंक का टियर-1 कैपिटल रेश्यो 17.2% और कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) रेश्यो 17.1% दर्ज किया गया.
नतीजों से पहले शेयर में मामूली तेजी
HDFC बैंक के तिमाही नतीजे जारी होने से पहले शुक्रवार को बैंक का शेयर 0.28% की बढ़त के साथ 728.85 रुपये पर बंद हुआ. इस भाव पर बैंक का बाजार पूंजीकरण करीब 11.24 लाख करोड़ रुपये था.
सिंडिकेट के कथित सरगना हरि शंकर तिबरेवाल (HST), स्काईएक्सचेंज के मालिक, ED का कहना है कि HST का स्काईएक्सचेंज और महादेव ऐप साझेदारी में संचालित होते थे और ये “एक ही आपराधिक उद्यम का अभिन्न हिस्सा” थे.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
दिल्ली की निचली अदालतों में HST ने मीडिया पर पाबंदियां लगवाईं, लेकिन ED की रायपुर की फाइलें एक अलग कहानी बताती हैं. उनके नाम में दो देवताओं के नाम हैं. हरि विष्णु हैं, जो सृष्टि के पालनकर्ता हैं. शंकर शिव हैं, जिन्हें भक्त महादेव भी कहते हैं.
भारत की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की फाइलों में, जो मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करने वाली एजेंसी है, तीसरा नाम भी इनके पीछे-पीछे आता है.
ED का कहना है कि हरि शंकर तिबरेवाल का सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म स्काईएक्सचेंज, महादेव ऑनलाइन बुक के प्रमोटरों के साथ “साझेदारी में सह-स्वामित्व और सह-प्रचार” के तहत चलाया जाता था. एजेंसी के शब्दों में, इस वजह से यह “एक ही आपराधिक उद्यम का अभिन्न हिस्सा” था. महादेव उस ऐप का नाम है, जो भारत की सबसे बड़ी सट्टेबाजी जांचों में से एक के केंद्र में है. ED का अनुमान है कि इस ऐप से 75,000–80,000 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ.
उनके आसपास के लोग उन्हें सिर्फ “हरि भाई” कहते थे. एक जेल में बंद कारोबारी के फोन से बरामद ज्योतिषी के व्हाट्सऐप चैट में उनका नाम सिर्फ तीन अक्षरों और जन्मतिथि के रूप में दर्ज है: “HST”. ED की चार्जशीट में वह आरोपी नंबर 24 हैं. ED ने उन्हें दो बार रायपुर बुलाया और दोनों बार रिकॉर्ड में दर्ज है: “पेश नहीं हुए” और 23 सितंबर को दिल्ली की एक अदालत में उन्होंने ऐसा अदालती आदेश हासिल किया, जिसने मीडिया द्वारा उन्हें संबोधित करने के तरीके पर पाबंदी लगा दी.
रहस्य
दिल्ली की अदालतों ने कुछ समाचार संस्थानों को उनके लिए कुछ विशेष उपाधियों का इस्तेमाल करने से रोक दिया है. लेकिन ED के अपने दस्तावेज, जिन पर कोई रोक नहीं है, उस व्यक्ति का विस्तार से वर्णन करते हैं, जिसे एजेंसी “HST” कहती है.
एक जज ने HST के दीवानी मानहानि मुकदमे में अंतरिम निषेधाज्ञाओं की पुष्टि की. जज ने पाया कि उन्हें “हवाला कारोबारी”, “शेयर बाजार में हेरफेर की योजना की अहम कड़ी” और “वित्तीय अंडरवर्ल्ड का रहस्यमय दिग्गज” कहने वाले प्रकाशनों ने प्रथम दृष्टया एक ऐसे व्यक्ति को आपराधिक गतिविधियों से जोड़ा, जिसे किसी अदालत ने दोषी नहीं ठहराया है. अदालत ने यह भी पाया कि बाद में प्रकाशित लेखों में “फरार”, “भगोड़ा” और “भारतीय न्याय से भागा हुआ” जैसे शब्दों का इस्तेमाल उस सामग्री की श्रेणी में आता है, जिसे पहले ही हटाने का आदेश दिया जा चुका था.
तिबरेवाल के लिए यह अपने पक्ष में फैसला था. लेकिन बढ़ती संख्या में समाचार संस्थानों के लिए यह कुछ और बन गया है: एक ऐसा कानूनी औजार, जो उनके बारे में लिखने की कोशिश करने वाले किसी भी मीडिया संस्थान पर मंडराता है.
दिल्ली की एक प्रमुख समाचार एजेंसी के वकील ने BW से कहा, “व्हाइट-कॉलर अपराधों के आरोपी मीडिया की आवाज दबाने के लिए कानून का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उन्हें संरक्षण मिलता है और उस मीडिया को डराया जाता है, जो उनकी रक्षा करने वाली व्यवस्था पर दबाव बना सकता है.”
HST के मामले में यह आदेश खबर बताने से नहीं रोकता. अदालत ने तिबरेवाल पर रिपोर्टिंग करने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया. जैसा कि रिपोर्ट किया गया है, अदालत ने किसी व्यक्ति को अपराधी करार देने और जांचकर्ताओं तथा अदालतों ने जो कहा है, उसकी निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने के बीच अंतर किया और दूसरे विकल्प को नहीं रोका. यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि जांचकर्ताओं ने काफी कुछ कहा है.
फाइलों में दर्ज व्यक्ति
ED ने इस साल महादेव सट्टेबाजी ऐप मामले में दो दस्तावेज दाखिल किए हैं. पहला 5 जून का अस्थायी कुर्की आदेश संख्या 16/2026 है. दूसरा सितंबर में रायपुर में दाखिल 375 पन्नों की पूरक अभियोजन शिकायत है. इनमें से कोई भी दस्तावेज तिबरेवाल को कोई मामूली या हाशिये की भूमिका वाला व्यक्ति नहीं बताता.
कुर्की आदेश में उन्हें “HST” कहा गया है.
इसमें कहा गया है कि सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म स्काईएक्सचेंज कोलकाता से हरि शंकर तिबरेवाल द्वारा “संचालित” किया जाता था और इसका “महादेव के प्रमोटरों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के साथ साझेदारी में सह-स्वामित्व और सह-प्रचार” किया जाता था. इस वजह से यह “एक ही आपराधिक उद्यम का अभिन्न हिस्सा” था. ED के पास तिबरेवाल के खिलाफ पहला सुराग कोलकाता के बर्टोला पुलिस स्टेशन में 2020 में दर्ज FIR थी.
चार्जशीट में उनका नाम आरोपी नंबर 24 के रूप में है और उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया गया है, जो “कोलकाता का रहने वाला है, लेकिन फिलहाल दुबई में रह रहा है”. ईजमाईट्रिप के सह-संस्थापक निशांत पिट्टी से जुड़े हिस्से में एजेंसी ने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जिन्हें दिल्ली की किसी अदालत ने ED की फाइलिंग से नहीं हटाया है: “सिंडिकेट के सरगना श्री हरि शंकर तिबरेवाल (स्काईएक्सचेंज के मालिक).”
दो बार समन, एक बार भी पेश नहीं हुए
दोनों दस्तावेजों में एक ही बात दर्ज है. ED ने PMLA की धारा 50 के तहत तिबरेवाल को 22 अप्रैल 2024 और फिर 25 अप्रैल 2024 को समन भेजा. दोनों बार रिकॉर्ड में लिखा है: “पेश नहीं हुए.”
दस्तावेजों के अनुसार, इसके बाद से भी वह पेश नहीं हुए हैं. तब से एजेंसी ने ऐसी प्रतिभूतियों में 580.78 करोड़ रुपये फ्रीज किए हैं, जिन पर उसका कहना है कि तिबरेवाल का लाभकारी स्वामित्व है. उन्हें आरोपी बनाया गया है, एक कथित कारोबारी साझेदार से जुड़ी 940 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई हैं और छठी पूरक चार्जशीट दाखिल की गई है, जिसके लगभग हर महत्वपूर्ण पन्ने पर उनका नाम है. सूत्रों के मुताबिक, अब उनके लंदन में होने की जानकारी है.
हर हफ्ते 22 करोड़ रुपये
ED ने स्काईएक्सचेंज के कारोबार का अनुमान एक ऐसे लेजर के आधार पर लगाया है, जिसे प्रशांत बागरी से जब्त किया गया था. चार्जशीट के मुताबिक, बागरी 2017 से “श्री हरि शंकर तिबरेवाल के कर्मचारी” थे. इस लेजर में प्लेटफॉर्म के सुपर-एडमिन और एक सप्ताह की कमाई दर्ज थी, जो करीब 22 करोड़ रुपये थी. 2016 से अनुमान लगाते हुए ED ने स्काईएक्सचेंज से हुई कमाई 11,000–12,000 करोड़ रुपये आंकी है. वहीं, महादेव से 75,000–80,000 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान लगाया गया है.
एजेंसी का कहना है कि महादेव के प्रमोटरों के पास स्काईएक्सचेंज पर एडमिन आईडी थीं और वे “मास्टर और सुपर आईडी” बना सकते थे. ED के शब्दों में, वे साझेदार थे और “दोनों ऐप्लिकेशन को समान कार्यप्रणाली के साथ समानांतर रूप से चला रहे थे.”
उसी चार्जशीट में इस धन से जुड़ी दुनिया का भी वर्णन है:
- रास अल खैमाह में चंद्राकर की 200 करोड़ रुपये की शादी, जिसका भुगतान नकद में किया गया.
- नागपुर से निजी जेट और एक इवेंट कंपनी को हवाला के जरिए भेजे गए 112 करोड़ रुपये.
- दुबई के अल बरशा इलाके में विला से संचालित कॉल सेंटर, जिनमें हर जगह 50 से 70 लोग रहते थे.
30% कैशबैक
सबसे गंभीर आरोप उन अंशों में हैं, जिनमें ED बताती है कि उसके मुताबिक सट्टेबाजी से आया पैसा शेयर बाजार में कैसे पहुंचा. चार्जशीट में कहा गया है कि तिबरेवाल “भारतीय सूचीबद्ध कंपनियों के प्रमोटरों के साथ सौदे करने के बाद उनमें बड़ी रकम निवेश करते हैं और बदले में संबंधित कंपनियों को कुल निवेश के 30% से 40% तक की राशि नकद कैशबैक के रूप में देनी होती है.” ED के अनुसार, यह नकदी दिल्ली में उनके सहयोगी गगन गुप्ता (“गगन भाई”) और उसके लोगों द्वारा एकत्र की जाती थी.
ED ने इन सौदों के नाम बताए:
सलासर टेक्नो इंजीनियरिंग: 2022 में 81.9 करोड़ रुपये और 2024 में करीब 130 करोड़ रुपये का निवेश. ED का कहना है कि प्रमोटरों ने “नकद और हवाला चैनलों” के जरिए करीब 25 करोड़ रुपये और 40 करोड़ रुपये वापस किए.
टाइगर लॉजिस्टिक्स: एक बिचौलिए ने ED को बताया कि उसने प्रमोटर से 5–6 करोड़ रुपये नकद “कैशबैक (कुल निवेश का 30%)” के रूप में लिए और गुप्ता के सहयोगियों को सौंप दिए.
ईजमाईट्रिप: आरोप है कि तिबरेवाल के फ्रंट फंड AG Dynamic Funds ने पिट्टी के साथ पहले से तय सौदे के बाद 59.6 करोड़ रुपये मूल्य के 1.51 करोड़ शेयर खरीदे. पिट्टी ने इन आरोपों को “पूरी तरह निराधार” बताया है.
टोयम स्पोर्ट्स: जब्त की गई एक ट्रैकिंग शीट में “हरि” नाम के तहत शेयरों की हिस्सेदारी दर्ज है.
विकास गर्ग की कंपनियां: कथित तौर पर 765.77 करोड़ रुपये गर्ग की कंपनियों में लगाए गए. दिल्ली के कारोबारी गर्ग की इन कंपनियों ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी एबिक्स को खरीदने के लिए इस रकम का इस्तेमाल किया.
फंडों का जाल
सिर्फ अवैध नकदी जमा करने के बजाय, तिबरेवाल ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) मार्ग का इस्तेमाल करते हुए सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को भारतीय शेयर बाजार में डालने के लिए एक व्यवस्था बनाई. छोटे, मिड-कैप और SME में सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए इस मार्ग का सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया गया.
ED ने उनसे जुड़ी कई विदेशी कंपनियों और निवेश माध्यमों की सूची दी है:
- फंड: AG Dynamic Funds, Forbes EMF, Coeus Global, Ebisu Global, Oyster Bay, Plutus और मॉरीशस में Tano Investment Opportunities.
- दुबई की कंपनियां: Zenith Multi Trading DMCC, Plus Commodities, Ecotek General Trading, Caterfiled Global और JE Impex.
ED ने इन कंपनियों के पीछे छिपी पहचान का भी ब्योरा दिया है:
इकोटेक: एक गवाह ने ED को बताया कि रिकॉर्ड में दर्ज 100% मालिक “सिर्फ हरि शंकर तिबरेवाल का बेनामीदार था.”
जेनिथ: ED के मुताबिक, कंपनी का पंजीकृत ईमेल पता तिबरेवाल का है.
टानो: कुर्की आदेश के अनुसार, उन्होंने “समन जारी होने के तुरंत बाद, जांच के बीच में ही लाभकारी स्वामित्व बदल दिया.”
जब ED ने टानो से उसके मालिक की पहचान बताने को कहा, तो उसने चार संस्थाओं के नाम दिए. इन सभी ने समन को नजरअंदाज किया. इसके बाद मॉरीशस के वित्तीय सेवा आयोग ने सेबी को पत्र लिखकर तिबरेवाल को लाभकारी मालिक बताया. ED ने उल्लेख किया कि यह पत्र “हर उस कोशिश के बाद आया, जिसमें यह दिखाने की कोशिश की गई थी कि हरि शंकर तिबरेवाल लाभकारी मालिक नहीं हैं.”
ताज में “हरि भाई”
चार्जशीट HST को एबिक्स के अधिग्रहण के केंद्र में भी रखती है. दो गवाहों के मुताबिक, 2024 के मध्य में तिबरेवाल लंदन के ताज होटल में विकास गर्ग के साथ बैठकों में शामिल हुए थे. उनकी तस्वीर दिखाए जाने पर उनकी पहचान “सभी संस्थाओं की ओर से मुख्य निवेशक” के रूप में की गई. ED का कहना है कि यात्रा रिकॉर्ड भी इन बयानों का समर्थन करते हैं.
एक अन्य आरोपी सुनील भंडारी ने जांचकर्ताओं को बताया कि गर्ग और तिबरेवाल “साझेदार हैं और स्काईएक्सचेंज से प्राप्त धन का इस्तेमाल करके कुछ सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की कीमतों में हेरफेर करने में शामिल हैं.”
गर्ग, जो गिरफ्तार किए गए 14 आरोपियों में से अब भी हिरासत में रहने वाले एकमात्र व्यक्ति हैं, ने शुरुआत में ED को बताया था कि उन्हें पता था कि तिबरेवाल अवैध सट्टेबाजी में शामिल थे. गिरफ्तारी के बाद उन्होंने कहा कि वह उन्हें नहीं जानते. ED का कहना है कि गर्ग के जब्त आईफोन में फरवरी 2025 की एक कॉल है, जिसमें वह गगन गुप्ता के साथ पैसे पर चर्चा करते हुए “हरि, हरि भाई” का जिक्र करते हैं. फोन में एक ज्योतिषी के साथ “HST” के बारे में व्हाट्सऐप बातचीत भी है, जिसमें जन्मतिथि दर्ज है. ED का कहना है कि यह तिबरेवाल की जन्मतिथि से मेल खाती है.
कोलकाता का नेटवर्क
दुबई से पहले कोलकाता था. ED के कुर्की आदेश के अनुसार, स्काईएक्सचेंज “कोलकाता से श्री हरि शंकर तिबरेवाल द्वारा संचालित” किया जाता था. इस मामले के तार भी इसी शहर से जुड़ते हैं. उनसे जुड़ा पहला मामला 24 सितंबर 2020 को उत्तर कोलकाता के पुराने व्यापारिक इलाके के केंद्र में स्थित बर्टोला पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR था. कोलकाता पुलिस ने 29 अक्टूबर 2024 को IPC और पश्चिम बंगाल जुआ एवं पुरस्कार प्रतियोगिता अधिनियम के तहत इस मामले में चार्जशीट दाखिल की. (चार्जशीट, बर्टोला FIR का विवरण; कुर्की आदेश.)
ED का कहना है कि पैसा शहर की शेल-कंपनियों के नेटवर्क से होकर गुजरता था.
बैंक में नकद के बदले एंट्री: कोलकाता के एंट्री ऑपरेटर अमित सरावगी (A-37) ने ED को बताया कि उसने Ability Games Ltd, Swamim Vanijya और Nischaya Trading को “नकद के बदले 150 करोड़ रुपये की बैंक एंट्री” उपलब्ध कराई. चार्जशीट में इन कंपनियों को “हरि शंकर तिबरेवाल की कंपनियां” बताया गया है. उसने कहा कि यह काम उसने संजीव बेरा के निर्देश पर किया, जिसे ED तिबरेवाल का कर्मचारी बताती है. (चार्जशीट, सरावगी का बयान.)
200 करोड़ रुपये की अन्य एंट्री: इसी तरह 200 करोड़ रुपये की अन्य एंट्री सूरज चोखानी (A-25) की कंपनियों में गईं. ED के मुताबिक, चोखानी वह व्यक्ति हैं, जो “हरि शंकर तिबरेवाल की भारतीय कंपनियों का संचालन संभालते हैं.” (चार्जशीट, सरावगी का बयान; गगन गुप्ता के कॉल रिकॉर्ड.)
शेल कंपनियों का नेटवर्क: सरावगी की कंपनियां डमी निदेशकों का इस्तेमाल करती थीं. उनके बयान की रिपोर्टों के मुताबिक, वह 40–50 शेल कंपनियां चलाते थे, डमी निदेशकों को हर महीने 1,500–3,000 रुपये देते थे और 1.25% कमीशन कमाते थे. (चार्जशीट; edatabook, मई 2024.)
फोन रिकॉर्ड: गगन गुप्ता के कॉल रिकॉर्ड बताते हैं कि वह तिबरेवाल, सरावगी, चोखानी और बागरी के लगातार संपर्क में थे. ED इसे स्काईएक्सचेंज के आसपास का अंदरूनी समूह बताती है. (चार्जशीट.)
पैसे का रास्ता: चार्जशीट में बार-बार कहा गया है कि विकास गर्ग की कंपनियों और सुनील भंडारी की फर्मों तक पहुंचा पैसा मूल रूप से “कोलकाता स्थित शेल कंपनियों” से आया था, जिसकी व्यवस्था तिबरेवाल ने की थी.
कैसिनो का सौदा: ED की जांच के निष्कर्षों पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, Ability Games Ltd (A-26), जिसे चार्जशीट में तिबरेवाल की कंपनियों में शामिल किया गया है, ने सूचीबद्ध गेमिंग कंपनी डेल्टा कॉर्प के नेपाल स्थित कैसिनो कारोबार को खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. (edatabook/Free Press Journal; इस्तेमाल से पहले डेल्टा कॉर्प की स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग से इसकी पुष्टि करें.)
वे सवाल जिनके जवाब भारत को अब तक नहीं मिले
ED का कहना है कि तिबरेवाल दो बार उसके सामने पेश होने से इनकार कर चुके हैं. एजेंसी उन्हें 11,000 करोड़ रुपये के सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म का मालिक बताती है और मनी लॉन्ड्रिंग के अभियोजन मामले में आरोपी के रूप में सूचीबद्ध करती है. इससे ऐसे सवाल उठते हैं, जिनका एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से जवाब नहीं दिया है.
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम: 2018 का कानून ED को विशेष अदालत से किसी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की मांग करने की अनुमति देता है, बशर्ते उसके खिलाफ वारंट जारी हुआ हो, अपराध 100 करोड़ रुपये से अधिक का हो और वह भारत छोड़कर चला गया हो तथा लौटने से इनकार कर रहा हो. क्या ED ने तिबरेवाल के खिलाफ ऐसा आवेदन दिया है?
वारंट: क्या उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट है? नई चार्जशीट में गगन गुप्ता और दो अन्य लोगों के खिलाफ वारंट की मांग की गई है, लेकिन तिबरेवाल का नाम उनमें नहीं है. ऐसा क्यों?
प्रत्यर्पण: भारत का UAE के साथ प्रत्यर्पण समझौता है और दूसरे मामलों में इसका इस्तेमाल भी किया गया है. क्या भारत ने उनके प्रत्यर्पण या रेड नोटिस की मांग की है? विदेश मंत्रालय और ED को इस पर जवाब देना चाहिए.
यदि वह ब्रिटेन में हैं, तो भारत-ब्रिटेन प्रत्यर्पण की कार्यवाही धीमी है. नीरव मोदी और विजय माल्या के मामले इसके उदाहरण हैं. क्या यही वजह है कि HST जैसे मामलों में वांछित लोग लंदन चले जाते हैं?
जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, रिकॉर्ड एक विरोधाभास दिखाता है. जिस व्यक्ति को ED “सिंडिकेट का सरगना” कहती है, वह रायपुर में उसके समन का जवाब नहीं दे पाया है, जबकि दिल्ली में उसने अपने बारे में लिखने वाले मीडिया संस्थानों के खिलाफ निषेधाज्ञा हासिल की है.
भारत से भागा हुआ एक ऐसा व्यक्ति, जिसे अब तक भगोड़ा घोषित नहीं किया गया है. दिल्ली की निचली अदालतों को ED के मामलों और समन को ध्यान में रखने की जरूरत है.
तिबरेवाल ने महादेव ऐप या स्काईएक्सचेंज में किसी भी भूमिका से इनकार किया है और अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज किया है. किसी भी आरोप की सुनवाई के दौरान अभी तक पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि, वह भारत से बाहर हैं और ED के सामने पेश नहीं हुए हैं.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.
19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)
एक विशेष इंटरव्यू में लोपेज ने ब्रांड की आवाज, कंटेंट की प्रभावशीलता, तेजी से प्रतिस्पर्धी होते मार्केटिंग इकोसिस्टम में अलग पहचान बनाने और भारत को वैश्विक व क्षेत्रीय नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करने की ओमनीकॉम प्रोडक्शन की रणनीति पर बात की.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सौम्या सहगल भूटानी
प्रोडक्शन का काम बुनियादी बदलाव के दौर से गुजर रहा है. पहले इसे मुख्य रूप से विज्ञापन के क्रियान्वयन से जुड़ी इकाई के रूप में देखा जाता था, जो किसी विचार को एक कैंपेन में बदलती थी. अब प्रोडक्शन ब्रांड्स के कंटेंट, डेटा, पर्सनलाइजेशन और तेजी से वितरण के प्रबंधन में रणनीतिक भूमिका निभा रहा है.
ओमनीकॉम प्रोडक्शन के ग्लोबल CEO सर्जियो लोपेज के मुताबिक, यह बदलाव अधिक कंटेंट तैयार करने के बजाय इस बात से जुड़ा है कि ब्रांड्स उसे किस तरह बनाते हैं, उसका प्रबंधन कैसे करते हैं और उसे किस तरह वितरित करते हैं.
लोपेज ने कहा, “प्रोडक्शन लीडर्स या प्रोडक्शन की पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों की भूमिका हमेशा क्रियान्वयन से जुड़ी रही है. किसी के पास कोई विचार होता था और हम उसे हकीकत में बदलते थे. लेकिन पिछले एक-दो वर्षों में मार्केटिंग के बदलते स्वरूप के कारण प्रोडक्शन एक क्रियान्वयन विभाग से बदलाव लाने वाले माध्यम में तब्दील हो रहा है.”
यह बदलाव विभिन्न प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की तेजी से बढ़ती मात्रा और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप, लक्षित और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक संवाद की बढ़ती मांग से प्रेरित है. इसके परिणामस्वरूप, प्रोडक्शन मार्केटिंग संगठनों के केंद्र के करीब आ रहा है. उन्होंने कहा, “अब काम का दायरा काफी अलग है. आज हर क्लाइंट की मार्केटिंग में बदलाव की यात्रा में इसकी बड़ी भूमिका है.”
प्रोडक्शन से कंटेंट एक्सपीरियंस तक
ओमनीकॉम का अपना पुनर्गठन भी इसी बदलाव को दर्शाता है. कंपनी ने दुनियाभर की 86 प्रोडक्शन इकाइयों को एक साथ लाकर ओमनीकॉम प्रोडक्शन बनाया. इसके बाद IPG के अधिग्रहण के जरिए 25 अन्य प्रोडक्शन परिसंपत्तियां भी इसमें शामिल की गईं.
लोपेज के मुताबिक, पिछले साल इस कारोबार में 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई. हालांकि, यह बदलाव केवल कारोबार का आकार बढ़ने तक सीमित नहीं है. वह कहते हैं, “यह एकीकरण नहीं, बल्कि बदलाव है.”
दो साल पहले ओमनीकॉम प्रोडक्शन के कारोबार में प्रिंट की हिस्सेदारी 72 प्रतिशत थी. आज यह घटकर 20 प्रतिशत रह गई है. लोपेज के अनुसार, यह बदलाव कंटेंट ट्रांसफॉर्मेशन और ब्रांड कम्युनिकेशन के प्रबंधन के लिए अधिक एकीकृत दृष्टिकोण की ओर बढ़ने को दर्शाता है.
लोपेज ने कहा, “किसी क्लाइंट को अपने दर्शकों के साथ एक संपूर्ण कंटेंट एक्सपीरियंस की जरूरत होती है. यह अनुभव लगातार एक जैसा होना चाहिए और इसे इस तरह प्रस्तुत करना जरूरी है, जो पहले के मुकाबले कहीं अधिक जटिल हो गया है.”
अब उपभोक्ताओं की यात्रा टेलीविजन के जरिए ब्रांड के बारे में जागरूकता और डिजिटल माध्यमों से विचार या खरीदारी करने तक सीमित नहीं है. दर्शक अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जाते हैं और उम्मीद करते हैं कि ब्रांड उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार संवाद में बदलाव करते हुए अपनी आवाज में निरंतरता बनाए रखेंगे.
लोपेज के मुताबिक, युवा दर्शकों के मामले में यह जटिलता और अधिक है. उनका कहना है कि यह वह पीढ़ी है जो नेटफ्लिक्स और अमेजन के साथ बड़ी हुई है और कंटेंट में उसी स्तर के पर्सनलाइजेशन की अपेक्षा करती है.
ओमनीकॉम कंटेंट एक्सपीरियंस (OCX) के पीछे भी यही सोच है. लोपेज इसे क्रिएटिविटी, मीडिया और क्लाइंट्स के बीच काम करने वाले मॉडल के रूप में देखते हैं.
प्रोडक्शन का नया समीकरण
प्रोडक्शन पर दबाव का स्वरूप भी बदल रहा है. ब्रांड्स को पहले से अधिक कंटेंट चाहिए, लेकिन बजट उसी गति से जरूरी नहीं कि बढ़ रहे हों. लोपेज का मानना है, “प्रोडक्शन में दक्षता पहली जरूरत है. अगर आप दक्ष नहीं हैं, तो आज इस क्षेत्र में टिक नहीं सकते.”
उनके मुताबिक, कुछ क्लाइंट्स के लिए कंटेंट की मात्रा दोगुनी या तिगुनी हो रही है, जबकि मार्केटिंग बजट काफी धीमी गति से बढ़ रहे हैं. ऐसे में लागत, गति और ऑटोमेशन सफलता के महत्वपूर्ण पैमाने बन गए हैं. हालांकि, सफलता केवल दक्षता तक सीमित नहीं है.
ओमनीकॉम कंटेंट के प्रदर्शन के आधार पर उसकी प्रभावशीलता भी मापता है. लोपेज ने निसान के साथ कंपनी के काम का उदाहरण दिया. उनके मुताबिक, दर्शकों के लिए संवाद को अधिक प्रासंगिक बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए नए कंटेंट वर्कफ्लो से निवेश पर रिटर्न (ROI) दोगुना हुआ है. वह कहते हैं, “जब आप कंटेंट ट्रांसफॉर्मेशन करते हैं, तो केवल बचत नहीं होती, बल्कि इससे कहीं अधिक मूल्य भी मिलता है.”
AI की भूमिका दक्षता से आगे बढ़ेगी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोडक्शन के इस नए समीकरण का हिस्सा बन रहा है. लोपेज का कहना है कि ओमनीकॉम के प्रमुख क्लाइंट्स के साथ होने वाले एक-तिहाई से अधिक काम में वर्जनिंग और लोकलाइजेशन जैसी गतिविधियों के लिए AI का इस्तेमाल किया जा रहा है. हालांकि, वह इन उपयोगों को AI के बदलाव की प्रक्रिया का शुरुआती चरण मानते हैं.
उनके मुताबिक, “हम एक ऐसे मुकाम पर पहुंचेंगे, जहां AI ऐसी संभावनाओं के रास्ते खोलेगा, जिनके बारे में हम आज सोच भी नहीं रहे हैं.” उनका मानना है कि भविष्य में इसका इस्तेमाल केवल तेजी से कंटेंट बनाने या बड़े स्तर पर उसे पर्सनलाइज करने तक सीमित नहीं रहेगा.
AI के कारण उद्योग को असीमित कंटेंट तैयार करने के नकारात्मक पहलुओं पर भी विचार करना पड़ सकता है. ब्रांड्स के पास अधिक संवाद तैयार करने की क्षमता होगी, लेकिन इससे उपभोक्ताओं पर जरूरत से ज्यादा कंटेंट का बोझ पड़ने का जोखिम भी है. लोपेज कहते हैं, “कंटेंट की मात्रा और उसकी गुणवत्ता के बीच एक तरह का तनाव पैदा होने वाला है.”
ब्रांड्स के लिए इसका मतलब स्पष्ट है. AI प्रोडक्शन को आसान बना सकता है, लेकिन इससे संवाद अपने आप बेहतर नहीं हो जाता.
ब्रांड की आवाज बनाए रखने की चुनौती
लोपेज के मुताबिक, प्रोडक्शन नेटवर्क की एक और बड़ी भूमिका ब्रांड की विशिष्ट पहचान और उसकी आवाज को सुरक्षित रखना तथा बड़े स्तर पर उसे बनाए रखना है.
वह जोर देकर कहते हैं, “बाजार में ब्रांड की आवाज को परिभाषित करने और उसकी निगरानी करने की सख्त जरूरत है.” ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में उनका तर्क है कि उत्पादों और उनकी विशेषताओं के बीच अंतर कम होने से ब्रांड्स के एक जैसी पहचान वाले बाजार में खो जाने का जोखिम बढ़ रहा है.
लोपेज कहते हैं, “कीमतों को लेकर पर्सनलाइजेशन, ऑप्टिमाइजेशन और सुधार पर काफी ध्यान दिया गया है, लेकिन जरूरी नहीं कि ब्रांड निर्माण पर भी उतना ही ध्यान दिया गया हो.”
इसका समाधान क्रिएटिविटी को छोड़कर टेक्नोलॉजी या परफॉर्मेंस मार्केटिंग को अपनाना नहीं है. इसके बजाय, क्रिएटिव और ब्रांड एजेंसियों को ब्रांड की विशिष्ट आवाज और भावनात्मक पहचान तय करनी होगी. वहीं, प्रोडक्शन नेटवर्क को तेजी से जटिल होते कंटेंट इकोसिस्टम में उस विचार को बड़े स्तर पर लागू करना होगा.
वैश्विक स्तर और स्थानीय प्रासंगिकता
अलग-अलग बाजारों में काम करने वाले ब्रांड्स के लिए यह चुनौती और जटिल हो जाती है. ओमनीकॉम वैश्विक ब्रांड प्लेटफॉर्म को स्थानीय संदर्भ के अनुरूप ढालने के लिए उस प्रक्रिया का इस्तेमाल करता है, जिसे लोपेज ‘ट्रांसक्रिएशन’ कहते हैं. एप्पल, डिज्नी, निसान और लॉरियल जैसे वैश्विक ब्रांड्स के लिए इसका उद्देश्य उनकी वैश्विक पहचान को बनाए रखते हुए अलग-अलग बाजारों को स्थानीय संस्कृति और उपभोक्ता व्यवहार के अनुसार उसे अपनाने की गुंजाइश देना है.
वह कहते हैं, “उस पहचान को व्यक्त कर पाना और हर बाजार की जरूरतों तथा ब्रांड की वास्तविक पहचान के अनुरूप लागू कर पाना ही पिछले कुछ वर्षों से ट्रांसक्रिएशन का उद्देश्य रहा है.” कंटेंट के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर बंटने और दर्शकों की सांस्कृतिक प्राथमिकताएं अधिक विशिष्ट होने के साथ निरंतरता और स्थानीय जरूरतों के बीच संतुलन बनाना लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है.
भारत क्यों महत्वपूर्ण है
भारत भी ओमनीकॉम प्रोडक्शन की वैश्विक रणनीति का तेजी से महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है. लोपेज के मुताबिक, डिजिटल तकनीक को तेजी से अपनाने और भारत, चीन तथा जापान जैसे देशों के बड़े आकार व विविधता के कारण एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र नवाचार के लिए एक प्रमुख बाजार है.
वह कहते हैं, “मुझे लगता है कि डिजिटल दुनिया में इस समय नवाचार दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से की तुलना में इस क्षेत्र में तेजी से हो रहा है.” लोपेज के अनुसार, पिछले साल ओमनीकॉम प्रोडक्शन के भारत स्थित कारोबार में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई. अब कंपनी के कुल कर्मचारियों में 20 प्रतिशत से अधिक भारत में कार्यरत हैं. कंपनी ने देश में अपने कार्यालयों की संख्या भी एक से बढ़ाकर तीन कर दी है. हालांकि, लोपेज इस रणनीति को पारंपरिक ऑफशोर प्रोडक्शन से अलग बताते हैं.
वह कहते हैं, “हमारी रणनीति भारत को ऑफशोरिंग सेंटर बनाने की नहीं है. यह रणनीति बहुत सीमित सोच पर आधारित है और भारत में किए जा सकने वाले सभी कामों को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता.”
इसके बजाय, वह भारत को एक ऐसे वैश्विक और क्षेत्रीय केंद्र के रूप में देखते हैं, जहां से नए विचार और काम शुरू हो सकें.
यह बदलाव प्रोडक्शन के आयोजन के तरीके में व्यापक परिवर्तन को दर्शाता है. पहले कंटेंट बनाने और उसे अलग-अलग बाजारों के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया रैखिक थी, लेकिन अब यह क्षमताओं, तकनीक, क्रिएटिविटी और डेटा से जुड़ी वैश्विक व्यवस्था में बदल रही है.
पर्सनलाइजेशन बनाम सामूहिक अनुभव
भविष्य की बात करते हुए लोपेज मार्केटिंग के सामने एक और चुनौती की पहचान करते हैं. यह चुनौती अत्यधिक व्यक्तिगत अनुभवों की मांग और साझा सांस्कृतिक अनुभवों की जरूरत के बीच संतुलन बनाने से जुड़ी है.
उपभोक्ता चाहते हैं कि ब्रांड उनकी व्यक्तिगत पसंद को समझें. साथ ही, वे मनोरंजन, खेल और सांस्कृतिक आयोजनों जैसे साझा अनुभवों का हिस्सा भी बनना चाहते हैं.
लोपेज कहते हैं, “इन दोनों चीजों को एक साथ लाना और इनके बीच जुड़ाव स्थापित कर पाना पूरे मार्केटिंग इकोसिस्टम को बदल देगा.”
यह बदलाव फिजिकल रिटेल को भी प्रभावित कर रहा है. ई-कॉमर्स के बढ़ने के बावजूद लोपेज का कहना है कि बड़ी खरीदारी करने वाले उपभोक्ता तेजी से खरीदने से पहले उत्पादों को वास्तविक रूप में अनुभव करना चाहते हैं.
ब्रांड्स के लिए इसका मतलब है कि मार्केटिंग का भविष्य पूरी तरह डिजिटल या केवल पर्सनलाइजेशन पर आधारित नहीं होगा. इसमें व्यक्तिगत अनुभवों को सामूहिक अनुभवों से जोड़ना, डिजिटल माध्यमों से उत्पादों की खोज को वास्तविक अनुभवों से जोड़ना और बड़े स्तर पर काम करने के साथ विशिष्ट पहचान बनाए रखना शामिल होगा. इससे प्रोडक्शन की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है.
लोपेज के अनुसार, चुनौती अब केवल कंटेंट तैयार करना नहीं है. असली सवाल यह है कि जब हर कोई बड़ी मात्रा में कंटेंट तैयार कर रहा है, तो ब्रांड्स इस भीड़ में अपनी अलग पहचान कैसे बनाएंगे और उपभोक्ताओं का भरोसा दोबारा कैसे हासिल करेंगे. कभी मुख्य रूप से क्रियान्वयन तक सीमित माने जाने वाले उद्योग के लिए यह कहीं बड़ी जिम्मेदारी है.
सौम्या सहगल भूटानी, BW रिपोर्टर्स
(BW Marketing World में सीनियर एडिटोरियल लीड के रूप में सौम्या भारत के मीडिया, मार्केटिंग और विज्ञापन इकोसिस्टम पर विस्तृत रिपोर्टिंग और विश्लेषण प्रस्तुत करती हैं.)