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SEBI सनसनी: रातोंरात निलंबित हुए CFD के शीर्ष जनरल मैनेजर, घोटाले की गुत्थी खुली

SME IPO जांच में छेड़छाड़ और कथित नकद वसूली का मामला

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

पलक शाह

देर रात की नाटकीय कार्रवाई में, भारत के बाजार नियामक भारीतय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (SEBI) ने अपने ही एक जनरल मैनेजर को “संवेदनशील विजिलेंस मामले” में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जिससे वॉचडॉग के क्रिटिकल फंक्शंस डिवीजन (CFD) के भीतर गहरे स्तर पर सड़न उजागर हुई है.

20 फरवरी 2026 को जारी आधिकारिक कार्यालय आदेश संख्या 08/2026 के अनुसार, संबंधित जीएम को SEBI (कर्मचारी सेवा) विनियम, 2001 के विनियम 86(1)(a) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, क्योंकि उनके खिलाफ अब अनुशासनात्मक कार्यवाही पर विचार किया जा रहा है.

आदेश में स्पष्ट रूप से निलंबित जीएम को बिना मुख्य महाप्रबंधक, HRD की पूर्व लिखित अनुमति के किसी भी SEBI कार्यालय परिसर में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया गया है. निलंबन अवधि के दौरान उन्हें केवल निर्वाह भत्ता ही मिलेगा.

सूत्रों ने विस्फोटक ट्रिगर का खुलासा किया 

यह मामला C2C एडवांसेज सिस्टम्स से जुड़ा है, विवादास्पद SME IPO, जिसे रोकने की कोशिश एक पूर्व पूर्णकालिक SEBI सदस्य ने बेताबी से की थी, लेकिन वे असफल रहे थे. जीएम पर आरोप है कि उन्होंने कंपनी से संबंधित CFD विभाग की चल रही जांच में सीधे हस्तक्षेप किया और अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए कथित तौर पर धन उगाही की.

हाल के महीनों में CFD से जुड़े घोटालों की श्रृंखला में यह नवीनतम मामला है, जिसने बार-बार SEBI को झकझोर दिया है और यह सवाल खड़े किए हैं कि नियामक के प्रमुख बाजार निगरानी प्रकोष्ठ के भीतर समस्या कितनी गहरी है. यह केवल उस कहीं अधिक गहरे, प्रणालीगत कैंसर का लक्षण मात्र है, जो भारत के कुछ शीर्ष नियामक कार्यालयों को भीतर से खोखला कर रहा है. पिछले कई वर्षों में भारत के नियामक और कर अधिकारियों के बीच “निजी क्षेत्र जैसी व्यक्तिगत संपत्ति अधिकतम करने” की एक विषैली प्रवृत्ति घर कर गई है, जिसने सार्वजनिक सेवकों को लाभ-केंद्रित संचालकों में बदल दिया है. कथित तौर पर असीमित शक्तियों, शून्य जांच, शून्य समीक्षा या स्वतंत्र निगरानी के अभाव में, ऐसे अंदरूनी लोग मनमाने ढंग से जांच रोकने, धन एकत्र करने और फिर उन्हीं कंपनियों, ब्रोकरों और मध्यस्थों के मामलों को बिना तथ्यों या परिस्थितियों में किसी बदलाव के साफ करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिससे विनियमन एक निर्लज्ज, अनियंत्रित निजी संपत्ति अर्जन मशीन में बदल जाता है.

SEBI का शीर्ष प्रबंधन अब तक इस सनसनीखेज निलंबन पर पूरी तरह मौन बनाए हुए है, जबकि यह आदेश अध्यक्ष कार्यालय, सभी पूर्णकालिक सदस्यों, मुख्य सतर्कता अधिकारी और सभी कर्मचारियों को ईमेल के माध्यम से प्रसारित किया गया है.

यह घटनाक्रम देश के प्रमुख प्रतिभूति नियामक के लिए एक बड़ा झटका है, खासकर SME IPO क्षेत्र में शासन मानकों को लेकर बार-बार दी गई चेतावनियों के कुछ ही दिनों बाद,  SEBI ने आधिकारिक आदेश से आगे कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है . आगे भी जुड़े रहिए, यह कहानी अभी विकसित हो रही है.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के निडर लेखक हैं. मुंबई में लगभग दो दशकों की ग्राउंड रिपोर्टिंग के अनुभव के साथ, पालक ने खुद को एक अडिग सच की खोज करने वाले पत्रकार के रूप में स्थापित किया है, जो पैसे, सत्ता और नियमन के गठजोड़ की तहों में गहराई तक जाते हैं. उनके लेख भारत के सबसे प्रतिष्ठित वित्तीय अखबारों जैसे The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line में प्रकाशित हुए हैं जहां उनकी तीखी रिपोर्टिंग ने नरेटिव गढ़े और कॉर्पोरेट बोर्डरूम्स को हिला कर रख दिया.

19 साल की उम्र में ही अपराध पत्रकारिता की ओर खिंचाव महसूस करने वाले पालक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के मुंबई के गिरोह युद्ध अब एक और अधिक चिकने, लेकिन कहीं अधिक खतरनाक संगठित अपराध यानी कॉर्पोरेट टावरों में रची जाने वाली सफेदपोश साजिशों में बदल चुके हैं. यह अहसास ही उन्हें फाइनेंशियल जर्नलिज्म की ओर ले गया, जहां उन्होंने भारत की ‘सफेद धन’ अर्थव्यवस्था की जटिल चालों को वर्षों तक समझा और उजागर किया है. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामक खामियों तक, पलक का काम हाई-फाइनेंस की चमक-दमक से पर्दा हटाकर दिखाता है कि असली धागे खींच कौन रहा है.)

 
 


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