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सेबी ने म्यूचुअल फंड नियम कड़े किए, पोर्टफोलियो ओवरलैप पर सीमा और स्कीम कैटेगरी का विस्तार

फंड नामकरण पर भी सेबी ने कड़ा नियम लागू किया है ताकि स्कीम का नाम उसकी कैटेगरी और निवेश मैनडेट को सही ढंग से दर्शाए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

भारतीय स्टॉक मार्केट के नियामक, सेबी (Securities and Exchange Board of India) ने म्यूचुअल फंड्स के लिए नए, कड़े नियम लागू किए हैं. इन नियमों के तहत फंड कैटेगरी को स्पष्ट किया गया है और पोर्टफोलियो ओवरलैप को सीमित किया गया है ताकि स्कीम्स “ट्रू-टू-लेबल” बनी रहें और डुप्लीकेशन कम हो.

सेबी ने अपने नए ढांचे के तहत म्यूचुअल फंड कैटेगरी की संख्या 36 से बढ़ाकर 40 कर दी है. इसमें 13 इक्विटी कैटेगरी, 17 डेट कैटेगरी, 7 हाइब्रिड कैटेगरी, 2 ‘अन्य’ सेक्शन की कैटेगरी (इंडेक्स फंड, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड और फंड ऑफ फंड्स) और 1 नई लाइफ-साइकिल कैटेगरी शामिल है. इससे निवेशकों को स्कीम्स के बीच स्पष्ट अंतर समझने में आसानी होगी और वे अपनी निवेश रणनीति के अनुसार सही विकल्प चुन सकेंगे.

नए नियमों की एक प्रमुख विशेषता पोर्टफोलियो ओवरलैप पर कड़ी सीमा है. सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स के अलावा वैल्यू और कॉन्ट्रा स्ट्रैटेजी में 50% से अधिक ओवरलैप नहीं हो सकता. थीमैटिक इक्विटी फंड्स में किसी भी स्कीम की होल्डिंग्स का आधा हिस्सा अन्य थीमैटिक या इक्विटी कैटेगरी के साथ ओवरलैप नहीं कर सकता, सिवाय लार्ज-कैप फंड्स के. इसके अलावा, ओवरलैप की गणना अब तिमाही आधार पर की जाएगी, जिसमें पूरे पीरियड के दौरान दैनिक पोर्टफोलियो ओवरलैप का औसत लिया जाएगा.

फंड नामकरण पर भी सेबी ने कड़ा नियम लागू किया है ताकि स्कीम का नाम उसकी कैटेगरी और निवेश मैनडेट को सही ढंग से दर्शाए. फंड हाउस को अब अपनी वेबसाइट पर हर महीने कैटेगरी-वार ओवरलैप की जानकारी प्रकाशित करनी होगी, जिसमें इक्विटी, डेट और हाइब्रिड सेक्शन अलग-अलग दिखाए जाएंगे.

एक और महत्वपूर्ण कदम के तहत सेबी ने तत्काल प्रभाव से सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स को बंद कर दिया है. इन स्कीम्स के तहत नई सब्सक्रिप्शन पर रोक लगाई गई है और मौजूदा स्कीम्स को इसी तरह की अन्य स्कीम्स में विलय करने का प्रावधान है, बशर्ते नियामक अनुमति दे.

इसके अलावा, कुछ इक्विटी रणनीतियों के लिए न्यूनतम 80% एलोकेशन अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें डिविडेंड यील्ड, वैल्यू और कॉन्ट्रा फंड्स शामिल हैं. नए फंड स्ट्रक्चर जैसे लाइफ-साइकिल फंड और सेक्टोरल डेट फंड पेश किए गए हैं, ताकि निवेशकों को स्पष्ट और परिभाषित विकल्प मिल सकें.

वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, सेबी का यह कदम म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में पारदर्शिता बढ़ाने और निवेशकों के हितों की रक्षा करने की दिशा में महत्वपूर्ण है. पोर्टफोलियो ओवरलैप पर सीमा और स्कीम कैटेगरी का विस्तार निवेशकों को बेहतर विकल्प चुनने में मदद करेगा और नई संरचनाओं से निवेशकों के लिए रणनीतिक निवेश और जोखिम प्रबंधन आसान होगा.


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