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सेबी ने NCDEX और MSE को इक्विटी डेरिवेटिव्स लॉन्च करने से रोका

सेबी का यह निर्देश नए एक्सचेंजों के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि बाजार में तेजी से विस्तार की तुलना में स्थिर और मजबूत कैश इक्विटी आधार बनाना प्राथमिकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं अधिनियम (SEBI) ने नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) और मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (MSE) को नए इक्विटी डेरिवेटिव उत्पाद लॉन्च करने से रोकने का निर्देश दिया है. यह कदम देश के डेरिवेटिव्स बाजार में तेजी से विस्तार को लेकर नियामक की सतर्कता को दर्शाता है.

नए एक्सचेंज और डेरिवेटिव्स की मंजूरी

पिछले साल के अंत में, दोनों एक्सचेंजों ने अलग-अलग सेबी से इक्विटी कैश और डेरिवेटिव्स सेगमेंट में प्रवेश की मंजूरी मांगी थी. NCDEX मुख्यतः कृषि कमोडिटी ट्रेडिंग में सक्रिय है, जबकि MSE मुख्य रूप से मुद्रा डेरिवेटिव्स प्रदान करता है और इसके इक्विटी वॉल्यूम सीमित हैं. दोनों एक्सचेंज अपने व्यवसाय का विस्तार करने के लिए डाइवर्सिफिकेशन पर विचार कर रहे थे.

सेबी ने स्पष्ट किया है कि जब तक पर्याप्त लिक्विड कैश इक्विटी मार्केट स्थापित नहीं होती, नए एक्सचेंजों को इक्विटी डेरिवेटिव्स पेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

नियामक की सतर्कता और बाजार का आकार

यह कदम भारत के इक्विटी डेरिवेटिव्स बाजार के आकार को लेकर सेबी की बढ़ती चिंता को दर्शाता है, जहां ट्रेडेड प्रीमियम अब कैश मार्केट के लगभग दोगुने अनुमानित हैं. इसके विपरीत, वैश्विक प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में डेरिवेटिव्स आमतौर पर कैश मार्केट वॉल्यूम का केवल 2-3 प्रतिशत होते हैं.

हालांकि हाल के उपायों के बावजूद, भारत अभी भी दुनिया का सबसे सक्रिय इक्विटी डेरिवेटिव्स बाजार बना हुआ है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) वैश्विक स्तर पर ट्रेड होने वाले सभी इंडेक्स ऑप्शन्स कॉन्ट्रैक्ट्स का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा नियंत्रित करता है, वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजेस के आंकड़ों के अनुसार.

सरकार और सेबी के कदम

इस महीने की शुरुआत में, सरकार ने स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग को नियंत्रित करने के प्रयासों के तहत इक्विटी डेरिवेटिव्स पर लेन-देन कर बढ़ा दिया. अध्ययन दिखाते हैं कि इस सेगमेंट में लगभग 90 प्रतिशत रिटेल निवेशकों को नुकसान होता है.

सेबी यह सुनिश्चित करना चाहता है कि नए प्रवेशकर्ता बिना मजबूत कैश इक्विटी बेस विकसित किए डेरिवेटिव्स गतिविधि को और बढ़ावा न दें. इसके अलावा, सेबी ने NCDEX और MSE से कहा है कि वे इक्विटी मार्केट में प्रवेश करने से पहले अपनी तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करें.

वित्तीय तैयारी और पूंजी जुटाना

दोनों एक्सचेंजों ने 2025 में अपने विस्तार योजनाओं को समर्थन देने के लिए पूंजी जुटाई. NCDEX ने 61 निवेशकों से 770 करोड़ रुपये (लगभग 85 मिलियन USD) जुटाए, जिसमें वैश्विक ट्रेडिंग फर्म Citadel Securities और Tower Research शामिल हैं. MSE ने 12 बिलियन रुपये जुटाए, जिनमें निजी इक्विटी निवेशक Peak XV Venture Partners और भारतीय ब्रोकरेज जैसे Groww और Zerodha की इकाई शामिल हैं.

 


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