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SEBI ने ODIs नियम को जारी करने की समयसीमा को 6 महीने बढ़ाया, जानिए क्या हैं ये?

शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों के लिए बड़ी खबर है. सर्कुलर में बताया गया है कि नए नियम 17 नवंबर 2025 को लागू होंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) ने एफआईआई/एफपीआई यानी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स (ODIs) जारी करने के नियमों को लागू करने की समयसीमा को 6 महीने बढ़ाकर 17 नवंबर 2025 कर दिया है. SEBI ने दिसंबर 2024 में एक सर्कुलर के जरिए ODI से जुड़े कड़े नियमों का स्ट्रक्चर पेश किया था, जो 17 मई 2025 से लागू होने वाला था. अब इसे बढ़ाकर नवंबर कर दिया गया है.

क्या होते हैं ODIs?

पहले आपको बताते हैं कि ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स (ODIs) क्या होते है. ये एक ऐसे फाइनेंशियल टूल्स होते हैं जो विदेशी निवेशक भारत के शेयर बाजार में बिना सीधे निवेश किए इस्तेमाल करते हैं.इन्हें आमतौर पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा जारी किया जाता है.

मान लीजिए कोई विदेशी निवेशक (जो SEBI के नियमों के अनुसार भारत में FPI के रूप में रजिस्टर्ड नहीं है) भारतीय कंपनी Reliance में निवेश करना चाहता है. लेकिन वह सीधे भारत में निवेश नहीं करना चाहता या नहीं कर सकता. तो वह किसी रजिस्टर्ड FPI से ODI खरीद लेता है, जो खुद Reliance का शेयर खरीदता है.शेयर FPI के नाम पर होते हैं.लेकिन मालिकाना हक (economic interest) उस विदेशी निवेशक का होता है, जिसने ODI खरीदा है

क्या है SEBI का सर्कुलर?

1. पहला-FPIs अब ऐसे ODI नहीं जारी कर सकेंगे जिनका आधार डेरिवेटिव्स हों.साथ ही FPIs ODI को हेज करने के लिए भारतीय डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे

2. दूसरा-ODI को उसी सिक्योरिटी से वन-टू-वन हेज करना होगा, जो उसके पीछे है (Non-derivative only)

3. तीसरा- ODI जारी करने वाले FPIs को अलग रजिस्ट्रेशन करना होगा. यह रजिस्ट्रेशन मौजूदा PAN के तहत होगा, लेकिन नाम में "ODI" का उपसर्ग जोड़ा जाएगा. अगर किसी FPI का ODI सरकारी सिक्योरिटीज पर आधारित है, तो अलग रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होगी.

ODI होल्डर्स को अंतिम स्तर तक मालिकाना जानकारी देनी होगी (Natural Person तक), अगर- किसी एक भारतीय कॉरपोरेट ग्रुप से जुड़े सिक्योरिटीज में उनकी इक्विटी ODI पोजिशन 50% या उससे अधिक हो या, भारतीय बाजारों में उनकी कुल इक्विटी पोजिशन ₹25,000 करोड़ से अधिक हो. इसमें एक या एक से अधिक FPIs के माध्यम से ली गई ODI पोजिशन, सामान्य स्वामित्व/नियंत्रण वाली संस्थाएं और पंजीकृत FPI की होल्डिंग शामिल होंगी.

किन्हें मिलेगी छूट?

सरकारी या सरकार से जुड़े निवेशक- Public Retail Funds (PRFs), ऐसे ETFs जिनका भारतीय इक्विटी में एक्सपोजर 50% से कम है. SEBI का यह कदम ODI के जरिए होने वाले रेगुलेटरी आर्बिट्राज को रोकने और FPIs के ट्रांसपेरेंसी स्टैंडर्ड को मजबूत करने की दिशा में है. हालांकि, बाजार सहभागियों की तकनीकी और प्रक्रियागत तैयारी को ध्यान में रखते हुए समयसीमा बढ़ाई गई है. अब निगाह इस बात पर होगी कि कितनी FPIs नई व्यवस्था के अनुसार खुद को तैयार करती हैं.
 


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