होम / बिजनेस / इन्वेस्टर्स को जोखिम से बचाने के लिए SEBI ने उठाया एक और बड़ा कदम
इन्वेस्टर्स को जोखिम से बचाने के लिए SEBI ने उठाया एक और बड़ा कदम
सेबी ने स्टॉक ब्रोकरों और क्लियरिंग सदस्यों को मौजूदा बैंक गारंटी सितंबर के अंत तक वापस लेने का निर्देश भी दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) निवेशकों के हित में लगातार फैसले ले रहा है. हाल ही में उसने निवेश सलाहकारों (IA) और रिसर्च एनालिस्ट (RA) के लिए एक नया विज्ञापन कोड जारी किया था और अब सेबी ने स्टॉक ब्रोकरों और क्लीयरिंग मेंबर्स के लिए एक आदेश जारी किया है. सेबी ने कहा है कि स्टॉक ब्रोकरों और क्लियरिंग मेंबर्स अब क्लाइंट्स के पैसों को गारंटी के रूप में बैंकों के पास गिरवी नहीं रख सकते. नया नियम आगामी 1 मई 2023 से लागू हो जाएगा.
वापस लेनी होगी गारंटी
मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) के इस कदम का उद्देश्य निवेशकों के हितों को सुरक्षित करना है. इसके साथ ही सेबी ने स्टॉक ब्रोकरों और क्लियरिंग सदस्यों को मौजूदा बैंक गारंटी सितंबर के अंत तक वापस लेने का निर्देश भी दिया है. बाजार नियामक के सर्कुलर में कहा गया है - एक मई 2023 से शेयर ब्रोकर्स और क्लियरिंग मेंबर्स ग्राहकों के पैसे से कोई भी बैंक गारंटी नहीं ले पाएंगे. साथ ही ग्राहकों से फंड से अब तक ली गईं बैंक गारंटी 30 सितंबर से पहले वापस लेनी होंगी.
अभी क्या है व्यवस्था?
मौजूदा व्यवस्था के तहत ब्रोकर्स अपनी जरूरत के हिसाब से क्लाइंट्स के पैसे को बैंकों के पास गांरटी के रूप में रख देते हैं. इसके बदल में बैंक उन्हें अधिक राशि के लिए क्लियरिंग कॉरपोरेशन को बैंक गारंटी जारी करते हैं. SEBI का मानना है कि इस प्रक्रिया से ग्राहकों का पैसा जोखिम के अधीन आ जाता है. इसलिए विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया गया है कि ग्राहकों के फंड से बैंक गारंटी की अनुमति नहीं होगी. हालांकि, नई व्यवस्था शेयर ब्रोकरों और क्लियरिंग सदस्यों के स्वामित्व वाले फंड पर लागू नहीं होगी.
ये भी होगा अनिवार्य
इसके अलावा, 1 जून से, एक्सचेंजों और क्लियरिंग हाउसों के लिए कोलैटरल डेटा जमा करना अनिवार्य हो जाएगा, जिसमें बैंक गारंटी सहित अन्य जानकारी देनी होगी. इससे पहले, सेबी ने निवेश सलाहकारों (IA) और रिसर्च एनालिस्ट (RA) के लिए एक नया विज्ञापन कोड जारी किया था. यह कोड उन सभी प्रकार के संचारों पर लागू होगा, जो ऐसे सलाहकारों और एनालिस्ट द्वारा या उनकी ओर से जारी किए जाते हैं, जिनसे निवेश निर्णयों के प्रभावित होने की पूरी संभावना है. सलाहकारों के विज्ञापन कोड में पारंपरिक संचार चैनलों के साथ-साथ सभी इलेक्ट्रॉनिक, वायर्ड या वायरलेस कम्युनिकेशन जैसे कि ई-मेल, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया, रेडियो, टेलीफोन और इंटरनेट आदि शामिल हैं.
टैग्स