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भारतीय बैंकों में इकट्ठा हुआ Russia का रूपया, क्यों नहीं हो रहा इस्तेमाल?
इस पैसे को इस्तेमाल करने की जरूरत है लेकिन उसके लिए पहले भारतीय रुपये को किसी और करेंसी में बदलना होगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
रूस और भारत के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्तों की ओर इशारा करते हुए रूस के विदेश मंत्री Sergei Lavrov ने दिल्ली में चल रही SCO (शंघाई को-ऑपरेशन आर्गेनाईजेशन) मीटिंग के दौरान हाल ही में मीडिया से कहा कहा कि रूस ने भारतीय बैंकों में अरबों रुपये इकट्ठा कर लिए हैं और रूस इनका इस्तेमाल नहीं कर सकता और यह एक समस्या है.
विदेश मंत्री ने क्या कहा?
विदेश मंत्री ने कहा कि रूस द्वारा इन पैसों को इस्तेमाल न कर पाना एक समस्या है. हमें इस पैसे को इस्तेमाल करने की जरूरत है लेकिन उसके लिए पहले भारतीय रुपये को किसी और करेंसी में बदलना होगा और फिलहाल इस विषय पर बातचीत जारी है. कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय की मानें तो वित्त वर्ष 2022-23 के पहले 11 महीनों के दौरान भारत द्वारा रूस को किये जाने वाले एक्सपोर्ट्स में कुल 11.6% की गिरावट देखने को मिली थी जिसके बाद भारत द्वारा रूस को किये जाने वाले एक्सपोर्ट्स की कीमत कम होकर 2.8 बिलियन डॉलर्स रह गयी थी. इसके साथ ही भारत द्वारा रूस से किये जाने वाले इम्पोर्ट्स की कीमत पांच गुना बढ़कर 41.56 बिलियन डॉलर्स हो गयी है.
क्यों बढ़ रहे हैं भारत के इम्पोर्ट?
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो पिछले एक साल के दौरान रूसी तेल पर डिस्काउंट काफी बढ़ा है जिसकी वजह से भारतीय रिफाइनरों ने जमकर रूसी तेल को इम्पोर्ट किया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि युक्रेन पर रूस द्वारा किये गए हमले को देखते हुए भारत द्वारा रूसी तेल खरीदे जाने के फैसले की पश्चिमी देशों द्वारा बहुत आलोचना की गयी थी. अप्रैल 2023 में भारत द्वारा कच्चे रूसी तेल के इम्पोर्ट्स का आंकड़ा 1.68 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंच गया था. अगर सालाना आधार पर इसकी तुलना करें तो इस संख्या में 6 गुना वृद्धि देखि जा सकती है.
व्यापार में क्यों इस्तेमाल हुई नेशनल करेंसी?
आमतौर पर दो देशों के बीच व्यापार में अंतरराष्ट्रीय करेंसी यानी कि अमेरिकी डॉलर्स का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन युक्रेन पर रूस द्वारा किये गए हमले की वजह से रूसी बैंकों और ट्रांजेक्शनों पर रोक लगा दी गयी थी. इसीलिए पहले रूस द्वारा ही भारत को यह सुझाव दिया गया कि दोनों देशों के बीच राष्ट्रीय करेंसियों में ही ट्रांजेक्शन किये जाएं. लेकिन युद्ध की वजह से रूसी करेंसी रूबल में बदलाव होने लगे जिसकी वजह से तेल के इम्पोर्ट्स के लिए रुपये और रूबल के ट्रांजेक्शन का रास्ता बंद होने लगा. इसीलिए रूस ने भारतीय करेंसी रुपये में ही भारतीय बैंकों में ही पैसे इकट्ठा करने शुरू कर दिए और अब रूस को इन्हीं पैसों को इस्तेमाल करने में दिक्कत आ रही है. रूस और युक्रेन के बीच श्हुरु होने के बाद से ही भारत रूस के साथ रिश्ते खत्म करने के अमेरिकी दबाव तले दबा हुआ है.
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