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डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड गिरावट पर, पहली बार 93 के पार; RBI ने बढ़ाया दखल
रुपये की यह गिरावट केवल एक अल्पकालिक उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि वैश्विक और घरेलू कारकों का संयुक्त असर है. ऐसे में आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक तनाव और डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
वैश्विक तनाव, महंगे कच्चे तेल और मजबूत डॉलर के दबाव के बीच भारतीय रुपया ऐतिहासिक गिरावट पर पहुंच गया है. शुक्रवार को यह पहली बार डॉलर के मुकाबले 93 के स्तर को पार कर गया, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गई है. स्थिति को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी आक्रामक हस्तक्षेप तेज कर दिया है.
शुक्रवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 93.12 के स्तर तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. इससे पहले बुधवार को रुपया 92.63 पर बंद हुआ था. इस तरह एक ही सत्र में रुपये में करीब 0.55% की गिरावट दर्ज की गई.
पश्चिम एशिया तनाव का असर
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर सीधे भारतीय मुद्रा पर पड़ा है. इस भू-राजनीतिक संकट के चलते निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिससे रुपये पर दबाव बना हुआ है. पिछले कुछ समय में रुपया करीब 2% तक कमजोर हो चुका है.
रुपये में गिरावट के 3 बड़े कारण
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: मिडिल ईस्ट संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. इससे भारत का आयात बिल बढ़ता है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है.
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर दिया है. गुरुवार को ही करीब ₹7,558 करोड़ की बिकवाली दर्ज की गई.
3. डॉलर की वैश्विक मजबूती: डॉलर इंडेक्स में मजबूती के चलते उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं कमजोर हो रही हैं. इसी ट्रेंड का असर रुपये पर भी साफ दिख रहा है.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये के लिए 93.20–93.40 का स्तर रेजिस्टेंस के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि 92.70 और 92.50–92.40 के स्तर सपोर्ट का काम कर सकते हैं.
आम आदमी पर क्या होगा असर
रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है.
1. विदेश यात्रा और पढ़ाई महंगी हो जाएगी.
2. आयातित सामान जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं.
3. महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है.
RBI ने बढ़ाया हस्तक्षेप
रुपये को सहारा देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बाजार में दखल बढ़ा दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई की फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर बेचने की पोजीशन करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंच गई है. जनवरी में यह 67.8 अरब डॉलर और फरवरी में 88.8 अरब डॉलर थी. आरबीआई मुख्य रूप से नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) और बाय-सेल स्वैप जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है. इससे वह सीधे विदेशी मुद्रा भंडार खर्च किए बिना रुपये को सपोर्ट दे पा रहा है.
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