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रुपये की सेहत और पतली! डॉलर के मुकाबले पहली बार 82.33 तक लुढ़का

एक्सपर्ट्स के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में लौटी तेजी और अमेरिकी बॉन्‍ड यील्‍ड में इजाफे के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा है

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्ली: रुपये की सेहत दिनों दिन खराब होती जा रही हैं, आज रुपया शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 16 पैसे की गिरावट के साथ 82.33 के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया. 

और कितना गिरेगा रुपया

आज इंटरबैंक विदेशी मुद्रा में, रुपया ग्रीनबैक के मुकाबले 82.19 पर खुला, फिर गिरकर 82.33 पर आ गया, जो अपने पिछले बंद के मुकाबले 16 पैसे कमजोर है. रुपये में गुरूवार के बंद भाव से 44 पैसे की कमजोरी रही. रुपया गुरूवार को 81.89 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. आज के कारोबार में यह 82.19 प्रति डॉलर के भाव पर खुला और कुछ ही देर में 82.33 के लेवल तक कमजोर हुआ. एक्सपर्ट्स के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में लौटी तेजी और अमेरिकी बॉन्‍ड यील्‍ड में इजाफे के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा है, इसके अलावा डॉलर इंडेक्‍स की मजबूती ने भी रुपये पर दबाव बनाया है. डॉलर इंडेक्स, जो छह करेंसीज की एक बास्केट है, उसके मुकाबले डॉलर की ताकत का अनुमान लगाता है, फिलहाल ये 112 के ऊपर कारोबार कर रहा है. 

क्यों गिर रहा है रुपया 
1. रुपये में  गिरावट की सबसे बड़ी वजह डॉलर इंडेक्स में लौटी जबरदस्त रिकवरी है. डॉलर इंडेक्स में मजबूती का मतलब है कि डॉलर की डिमांड बाकी करेंसीज के मुकाबले बढ़ रही है. डॉलर इंडेक्स बीते दिनों 106 तक चला गया था, जो अब फिर से लौटकर 112 के लेवल पर आ गया है. 

2. दूसरी सबसे बड़ी वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी है, ब्रेंट ऑयल, जो 26 सितंबर 2022 को लगभग 82.5 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर तक गिर गया था, वैश्विक मंदी पर बढ़ती आशंकाओं के कारण अब लगभग 94.5 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया है क्योंकि OPEC+ ने प्रति दिन 2 मिलियन बैरल तेल उत्पादन में कटौती करने का फैसला किया है. भारत कच्चे तेल का इंपोर्टर है, अपने कच्चे तेल की खपत का लगभग 80% आयात करता है. जब भी तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इससे रुपये पर दबाव बढ़ जाता है. 

3. तीसरी सबसे बड़ी वजह है कि वर्ल्ड बैंक ने भारत की जीडीपी को लेकर कुछ निगेटिव कमेंट किये हैं और साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी अनुमानों को 7.5% से घटाकर 6.5% कर दिया है, जो कि एक बड़ी कटौती है. बाकी एशियाई देशों के मुकाबले भारत की स्थिति बेहतर है, बावजूद इतनी बड़ी कटौती हैरान करने वाली है, इससे भी निवेशकों का भारत पर भरोसा हिला है और रुपया कमजोर हुआ है. 

कई एक्सपर्ट इस बात की भी आशंका जता रहे हैं कि रुपया डॉलर के मुकाबले जिस हिसाब से कमजोर हो रहा है, जल्द ही ये 83 के नीचे भी फिसल जाएगा.

VIDEO: लैपटॉप के बदले ग्राहक को मिला डिटर्जेंट साबुन 


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