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100 करोड़ रुपये के मिसिंग इन्वेस्टमेंट: रामालिंगा राजू जैसे घोटाले में फंसा एविओम हाउसिंग

सत्यं कंप्यूटर्स जैसे घोटाले का खुलासा एविओम इंडिया हाउसिंग फाइनेंस में, आरबीआई द्वारा व्हिसलब्लोअर की शिकायत के बाद जांच का आदेश

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

लगभग 15 साल पहले, भारत में कॉर्पोरेट गवर्नेंस के प्रतीक माने जाने वाले रामालिंगा राजू ने यह स्वीकार किया था कि वे "शेर की सवारी कर रहे थे और उन्हें नहीं पता था कि कैसे उतरें." अपने कबूलनामे में, उन्होंने माना था कि उनकी कंपनी सत्यं कंप्यूटर्स, जो उस समय की मशहूर आईटी कंपनी थी, ने फर्जी लोन, निवेश और बकाया रकम के झूठे आंकड़े दिखाए थे. अब ऐसा ही एक बड़ा घोटाला एविओम इंडिया हाउसिंग फाइनेंस में सामने आया है. यह कंपनी, जो Underserved लोगों, खासकर महिलाओं को लोन देने का दावा करती थी, ने 1,752 करोड़ रुपये का लोन बुक तैयार किया था. इस कंपनी की स्थापना काजल इल्मी ने की थी, जो ऐजाज इल्मी (एक राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्ति) की पत्नी हैं. 

घोटाले का पता तब चला जब एक व्हिसलब्लोअर ने एविओम (Aviom's) के फर्जी अकाउंट्स की जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को दी. इसके बाद, RBI ने अपनी शाखा नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) को इस मामले की गहराई से जांच करने का निर्देश दिया. अचानक की गई जांच में NHB को कई संदिग्ध लेनदेन मिले, और उन्होंने रवि राजन एंड कंपनी को फॉरेंसिक ऑडिट करने के लिए नियुक्त किया. ऑडिट में खुलासा हुआ कि एविओम के 1,750 करोड़ रुपये के लोन बुक का लगभग 1/6 हिस्सा फर्जी हो सकता है. इसमें फर्जी लोन और निवेश शामिल हैं. सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने लगभग 95 करोड़ रुपये के निवेश के आंकड़े भी फर्जी दिखाए थे.

घोटाले के सामने आने के बाद, कंपनी के एमडी, सीएफओ और सीएक्सओ ने एक-दूसरे पर आरोप लगाना शुरू कर दिया. एविओम के पहले ऑडिटर्स, ग्रांट थॉर्नटन (आंतरिक ऑडिटर) और एससीवी एंड कंपनी (स्टेट्यूटरी ऑडिटर) ने इन फर्जी निवेशों और गुम हुए पैसों पर ध्यान नहीं दिया, जो आश्चर्यजनक है.  

जनवरी 2025 तक, एविओम इंडिया हाउसिंग फाइनेंस ने कुल $51.6 मिलियन की फंडिंग जुटाई है. यह फंडिंग 17 निवेशकों से आठ राउंड्स में मिली है. 31 मार्च 2024 तक, पूरी तरह से डाइलेटेड आधार पर, प्रमोटर काजल इल्मी और उनके परिवार के सदस्य एविओम में 30.9 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं. अन्य प्रमुख हिस्सेदारों में न्यूवीन (35.1 प्रतिशत), गोजो एंड कंपनी इंक (19.8 प्रतिशत), SABRE पार्टनर्स AIF ट्रस्ट (9.9 प्रतिशत), और कैपिटल 4 डेवलपमेंट एशिया फंड कोऑपरेटिव यूए (3.8 प्रतिशत) शामिल हैं. बाकी हिस्सेदारी प्रमोटर के दोस्तों और परिवार के सदस्यों के पास है. एविओम ने डिबेंचर भी जारी किए हैं, जो 11.5 प्रतिशत ब्याज पर बेचे गए थे.

एविओम (Aviom's) का लेटर लेंडर्स के नाम

पिछले साल नवंबर में, एविओम (Aviom's) ने घोषणा की थी कि वह अपने कर्जदाताओं को भुगतान करने में देरी कर सकता है. लेंडर्स को भेजे गए पत्र में, एविओम ने बताया कि NHB (नेशनल हाउसिंग बैंक) ने एक स्नैप इंस्पेक्शन के बाद फॉरेंसिक ऑडिट शुरू किया है. इस जांच में कई गड़बड़ियां पाई गईं, जिनमें "म्यूचुअल फंड्स के स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट्स" में अनियमितताएं शामिल थीं.

एविओम ने स्वीकार किया कि इस ऑडिट के कारण पहले से जमा किए गए वित्तीय डेटा को फिर से संशोधित करना पड़ सकता है. कंपनी ने यह भी बताया कि 19 नवंबर 2024 को उसके डायरेक्टर्स के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में एक आपराधिक शिकायत दर्ज कराई गई थी. 

इसके अलावा, कंपनी के पूर्व ऑडिटर्स ने सलाह दी थी कि बीते तीन साल के वित्तीय आंकड़ों पर भरोसा न करें. मौजूदा ऑडिटर्स ने कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 143(12) के तहत चिंता जताई, जिसके बाद बोर्ड ने स्वतंत्र सलाहकारों के साथ एक आंतरिक जांच शुरू की.  NHB के विशेष ऑडिट की घोषणा से पहले, एविओम 2000 करोड़ रुपये और जुटाने की योजना बना रहा था, जिसके लिए उसने अलग-अलग कर्ज उपकरण (Debt Instruments) जारी करने की योजना बनाई थी.

(लेखक- पलक शाह, "द मार्केट माफिया - क्रॉनिकल ऑफ इंडिया’ हाई-टेक स्टॉक मार्केट स्कैंडल एंड द कबाल दैट वेंट स्कॉट-फ्री" किताब के लेखक हैं. पलक शाह पिछले दो दशकों से मुंबई में पत्रकारिता कर रहे हैं. उन्होंने द इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द हिंदू बिजनेस लाइन जैसे प्रमुख पिंक पेपरों में काम किया है. वह 19 साल की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग से जुड़े थे, लेकिन कुछ सालों में इस क्षेत्र में काम करने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि अपराध की संरचना बदल चुकी थी और वह संगठित गिरोह, जैसा कि मुंबई ने 80 के दशक में देखा था, अब अस्तित्व में नहीं थे. 'व्हाइट मनी' अर्थव्यवस्था की जटिलताओं को समझने के उनके जुनून ने पलक को वित्त और नियामकों की दुनिया में पहुंचा दिया.)
 


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