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रोबर्ट कियोसाकी ने कहा, नई विश्व व्यवस्था में भारत उभरती शक्ति
वित्तीय लेखक और निवेशक रोबर्ट कियोसाकी ने हालिया टिप्पणी में कहा है कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत का बढ़ता प्रभाव भू-राजनीति से अधिक उसकी मजबूत आर्थिक संरचना और बदलते पूंजी प्रवाह पर आधारित है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रही है, जहां शक्ति संतुलन पारंपरिक ध्रुवों से हटकर नए केंद्रों की ओर बढ़ रहा है. इसी बदलते परिदृश्य में वित्तीय लेखक और निवेशक रोबर्ट कियोसाकी ने भारत को उभरती हुई प्रमुख आर्थिक ताकत के रूप में रेखांकित किया है. उनका मानना है कि नई विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और इसके पीछे ठोस आर्थिक कारण हैं.
कियोसाकी के अनुसार, वैश्विक शक्ति संतुलन अब राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि वित्तीय धाराओं से तय हो रहा है. उन्होंने कहा कि कई दशकों तक विश्व अर्थव्यवस्था ऐसे मॉडल पर चली, जिसमें अमेरिका उपभोग का प्रमुख केंद्र था, जबकि चीन विनिर्माण का आधार बनकर उभरा. इस मॉडल ने चीन को वैश्विक औद्योगिक उत्पादन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा देने वाली सबसे बड़ी औद्योगिक शक्ति बना दिया.
हालांकि, 2018 के बाद से टैरिफ, व्यापार प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक तनावों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित किया है. व्यापार अब राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बनता जा रहा है. बढ़ते जोखिमों के चलते कंपनियों और निवेशकों ने प्रोडक्शन के ठिकानों में विविधता लानी शुरू की है, जिससे चीन पर निर्भरता कम हुई है और पूंजी का प्रवाह अन्य देशों की ओर मुड़ा है.
घरेलू खपत बनी भारत की ताकत
कियोसाकी का कहना है कि भारत का उदय चीन के निर्यात-आधारित मॉडल की नकल पर नहीं, बल्कि एक अलग आर्थिक ढांचे पर आधारित है. भारत की जीडीपी का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा घरेलू खपत से संचालित होता है, जो इसे बाहरी झटकों के प्रति अधिक लचीला बनाता है.
उनका तर्क है कि आंतरिक मांग से संचालित अर्थव्यवस्था को अस्थिर करना कठिन होता है, जबकि निर्यात पर अधिक निर्भर देश वैश्विक मांग घटने पर अधिक प्रभावित होते हैं.
जनसांख्यिकीय लाभ और बढ़ता निवेश
भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और विशाल घरेलू बाजार उसकी संभावनाओं को और मजबूत बनाते हैं. कियोसाकी ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक संस्थाएं और बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में निवेश बढ़ा रही हैं. उनके अनुसार, यह बदलाव अस्थायी नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक निर्णय का हिस्सा है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन आने वाले समय में भी एक बड़ी आर्थिक शक्ति बना रहेगा, लेकिन आपूर्ति श्रृंखलाओं के विविधीकरण और दीर्घकालिक बुनियादी ढांचे में निवेश के चलते वैश्विक संतुलन धीरे-धीरे बदल रहा है.
निवेशकों के लिए संदेश
कियोसाकी ने निवेशकों को सलाह दी कि वे उन क्षेत्रों पर ध्यान दें जहां घरेलू मांग बढ़ रही है, आपूर्ति श्रृंखलाएं स्थानांतरित हो रही हैं और दीर्घकालिक बुनियादी ढांचा विकसित हो रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अपनी वित्तीय हिस्सेदारी को केवल एक ही आर्थिक तंत्र में केंद्रित करना जोखिम भरा हो सकता है.
उनका व्यापक संदेश साफ है, जो लोग आर्थिक बदलावों को समय रहते समझ लेते हैं, वे अवसरों का लाभ उठाते हैं; जबकि अन्य लोग तब जागरूक होते हैं, जब परिवर्तन पूरी तरह शुरू हो चुका होता है.
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