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इतनी घट गई रिटेल महंगाई, दाल-सब्जी से लेकर दूध भी हुआ सस्ता!
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, रिटेल महंगाई दिसंबर में घटकर 5.22 प्रतिशत पर आ गई. नवंबर में यह 5.48 प्रतिशत पर थी, जबकि ठीक एक साल पहले दिसंबर 2023 में खुदरा महंगाई 5.69 प्रतिशत पर थी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बढ़ती मंहगाई और शेयर बाजार में गिरावट के बीच सोमवार को देशवासियों को राहत देने वाली खबर सामने आई है. दरअसल, सोमवार यानी 13 जनवरी, 2025 को सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (consumer price Index) पर आधारित खुदरा महंगाई घटकर चार महीने के निचले स्तर यानी 5.22 प्रतिशत पर आ गई है. वहीं, नवंबर में यह 5.48 प्रतिशत थी और दिसंबर 2023 में 5.69 प्रतिशत थी. तो आइए इन आंकड़ों पर एक नजर डालते हैं.
इसलिए कंट्रोल हुई महंगाई
खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में आई नरमी के कारण खुदरा महंगाई में गिरावट देखने को मिली है. दरअसल, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी सीपीआई आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में खाद्य वस्तुओं की महंगाई घटकर 8.39 प्रतिशत रह गई. नवंबर में यह 9.04 प्रतिशत और दिसंबर 2023 में 9.53 प्रतिशत थी. एनएसओ ने कहा कि दिसंबर 2024 में सीपीआई (सामान्य) और खाद्य महंगाई पिछले चार महीनों में सबसे कम है. इसने यह भी कहा कि खाद्य कीमतों पर दबाव के कारण दिसंबर तिमाही में मुख्य महंगाई के ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना है. सीपीआई आधारित मुख्य महंगाई जुलाई-अगस्त के दौरान औसतन 3.6 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 5.5 प्रतिशत और अक्टूबर 2024 में 6.2 प्रतिशत हो गई. बता दें, इससे पहले अप्रैल 2022 में खुदरा महंगाई 7.79 फीसदी के हाई पर पहुंच गई थी।
तब गवर्नर ने कही थी ये बात
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले महीने चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अपने महंगाई के अनुमान को 4.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 4.8 प्रतिशत कर दिया था. केंद्रीय बैंक ने खाद्य कीमतों पर दबाव के कारण अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कुल महंगाई के उच्चस्तर पर बने रहने की भी आशंका जतायी थी. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित कुल महंगाई जुलाई-अगस्त के दौरान औसतन 3.6 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 5.5 प्रतिशत और अक्टूबर, 2024 में 6.2 प्रतिशत रही थी. सरकार ने आरबीआई को खुदरा महंगाई को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने की जिम्मेदारी दी है. केंद्रीय बैंक ने महंगाई को लक्ष्य के अनुरूप लाने के मकसद से पिछले महीने पेश मॉनेटरी पॉलिसी में प्रमुख नीतिगत दर रीपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं किया था.
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