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महंगी चीनी से राहत की तैयारी, सरकार ने 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात को दी मंजूरी

16 साल के उच्च स्तर पर पहुंची चीनी की कीमतों के बीच सरकार ने लिया फैसला, 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा आयात

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

घरेलू बाजार में चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दे दी है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें 16 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं और आगामी त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की संभावना है. सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, कच्ची चीनी का आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा. फिलहाल भारत कच्ची चीनी के आयात पर 100 फीसदी शुल्क लगाता है.

16 साल के हाई पर चीनी की कीमत

चीनी की कीमतों में हाल के दिनों में तेज उछाल देखने को मिला है. NCDEX के आंकड़ों के मुताबिक, 19 अगस्त 2026 को देश के प्रमुख बाजारों में हाजिर चीनी की कीमत बढ़कर 5,530 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, जो करीब 16 साल का उच्च स्तर है. वहीं, एक उद्योग संगठन के अनुसार 18 अगस्त को देशभर में चीनी की औसत एक्स-मिल कीमत 5,400-5,500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल थी. उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त तक खुदरा चीनी की कीमत सालाना आधार पर करीब 13 फीसदी बढ़कर 52.30 रुपये प्रति किलो हो गई.

त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी चिंता

अगस्त से नवंबर के बीच चीनी की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है. इस अवधि में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार आते हैं. ऐसे में सरकार के सामने घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित करने की चुनौती है. शुल्क-मुक्त आयात के फैसले से बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

जमाखोरी रोकने के लिए भी सख्ती

चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने इससे पहले थोक खरीदारों के स्टॉक पर भी सीमा तय की है. खाद्य मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ता 15 दिनों की खपत से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेंगे. यह आदेश 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा. इसके दायरे में कन्फेक्शनरी कंपनियां, सॉफ्ट ड्रिंक निर्माता, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, मिठाई विक्रेता और अन्य संस्थागत खरीदार शामिल हैं.

चीनी की कमी की आशंका क्यों बढ़ी?

घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सीमित उपलब्धता की आशंका भी एक प्रमुख कारण है. भारत ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 20 लाख टन कर दिया गया. उद्योग के अनुमान के मुताबिक, इसमें से करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात हो चुका है. ऐसे में घरेलू खपत और निर्यात दोनों को देखते हुए सीजन के अंत में बचने वाले स्टॉक को लेकर चिंता बढ़ी है.

अनुमानों के मुताबिक, 2025-26 सीजन की शुरुआत में करीब 47 लाख टन का शुरुआती स्टॉक था, जबकि एथेनॉल के लिए इस्तेमाल की गई चीनी को घटाने के बाद वास्तविक शुद्ध उत्पादन करीब 2.79 करोड़ टन रहा. घरेलू खपत करीब 2.8 करोड़ टन रहने का अनुमान है. निर्यात को भी शामिल करने पर सीजन के अंत में बचने वाला स्टॉक घटकर करीब 35-39 लाख टन रह सकता है.

चीनी मिलों के लिए क्या होगा असर?

सरकार के इस फैसले से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतों में नरमी आ सकती है. हालांकि, कीमतों में गिरावट के बावजूद चीनी मिलों के लिए मार्जिन पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कीमतों में करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट भी आती है, तो भी कीमतें उत्पादन लागत से ऊपर रह सकती हैं. इससे मिलों को गन्ना किसानों का बकाया चुकाने में मदद मिल सकती है.

साथ ही, शुल्क-मुक्त आयात से चीनी मिलों और कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्ची चीनी मंगाने का अवसर भी मिलेगा. इससे घरेलू आपूर्ति में कमी की आशंका को कम करने और त्योहारी सीजन में कीमतों को नियंत्रित रखने में सरकार को मदद मिल सकती है.
 


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