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माइनिंग और कंस्ट्रक्शन कंपनियों को राहत, रोड टैक्स पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इंडस्ट्रियल और माइनिंग सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है. इससे उन वाहनों को रोड टैक्स से राहत मिलेगी, जो कभी भी सार्वजनिक सड़कों पर नहीं चलते.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

कोल इंडिया, सेल, टाटा स्टील, एलएंडटी, अल्ट्राटेक सीमेंट और अन्य माइनिंग व कंस्ट्रक्शन कंपनियों को सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने साफ किया है कि जो हैवी इंडस्ट्रियल और कंस्ट्रक्शन वाहन कभी भी पब्लिक रोड पर नहीं चलते और केवल फैक्ट्रियों, खदानों या बंद परिसरों में इस्तेमाल होते हैं, उन पर रोड टैक्स नहीं लगाया जा सकता.

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

जस्टिस पंकज मित्तल की अगुवाई वाली बेंच ने गुरुवार को अपने फैसले में कहा कि डंपर, एक्सकेवेटर, सरफेस माइनर और इस तरह के अन्य भारी वाहन, जो खासतौर पर औद्योगिक और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों के लिए डिजाइन किए गए हैं, उन्हें मोटर व्हीकल की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. इसलिए, इन वाहनों पर रोड टैक्स लगाने का कोई आधार नहीं बनता.

हाई कोर्ट के फैसले को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2011 में गुजरात हाई कोर्ट द्वारा दिए गए उस फैसले को पलट दिया, जिसमें कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और फैक्ट्री या कंस्ट्रक्शन साइट पर चलने वाले वाहनों पर रोड टैक्स लगाने की अनुमति दी गई थी. यह मामला अल्ट्राटेक सीमेंट की अपील पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जिसमें कंपनी ने राज्य सरकार द्वारा लगाए गए टैक्स को चुनौती दी थी.

पब्लिक रोड पर नहीं चलने वाले वाहन टैक्स के दायरे से बाहर

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि ये वाहन केवल फैक्ट्री परिसर, खदानों और अन्य बंद क्षेत्रों में ही चलते हैं. इन्हें पब्लिक सड़कों पर चलाने के लिए बनाया ही नहीं गया है. ऐसे में न तो ये मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आते हैं और न ही इन पर रोड टैक्स लगाया जा सकता है.

साथ ही कोर्ट ने संविधान की सातवीं अनुसूची का हवाला देते हुए कहा कि राज्यों को टैक्स लगाने का अधिकार सिर्फ उन्हीं वाहनों पर है, जो सार्वजनिक सड़कों पर चलते हैं.

नियम तोड़ने पर लगेगा टैक्स और जुर्माना

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ऐसे इंडस्ट्रियल या कंस्ट्रक्शन वाहन पब्लिक रोड पर चलते हुए पाए जाते हैं, तो उन पर रोड टैक्स तो लगेगा ही, साथ में जुर्माना भी वसूला जाएगा. यह फैसला टैक्स छूट का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए अहम माना जा रहा है.

कंपनियों को क्यों मिली राहत

दरअसल, राज्य सरकारों के तहत आने वाली ट्रांसपोर्ट अथॉरिटीज़ ने पहले हैवी कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और फैक्ट्री या खदानों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों से रोड टैक्स की मांग शुरू कर दी थी. इसके खिलाफ अल्ट्राटेक समेत कई कंपनियां कोर्ट पहुंची थीं. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब ऐसी कंपनियों पर टैक्स का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.
 


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