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निवेशकों के वारिसों को राहत! SEBI का बड़ा प्रस्ताव, 21 दिनों में मिलेगा शेयर और निवेश का क्लेम

सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद 21 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा करना अनिवार्य होना चाहिए. यदि किसी कारण से क्लेम में देरी होती है या उसे खारिज किया जाता है, तो इसकी वजह स्पष्ट रूप से बतानी होगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है. बाजार नियामक सेबी ने निवेशक की मृत्यु के बाद उनके शेयर और निवेश वारिसों या नॉमिनी को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है. नए प्रस्ताव के तहत क्लेम से जुड़ी कागजी औपचारिकताओं को कम किया जाएगा और सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद 21 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा करना अनिवार्य होगा.

क्लेम प्रक्रिया आसान बनाने की तैयारी
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का कहना है कि कई मामलों में निवेशकों की मृत्यु के बाद उनके परिवारों को निवेश की रकम हासिल करने में काफी कठिनाई होती है. जटिल कागजी प्रक्रिया और पुराने नियमों के कारण क्लेम में देरी होती है. इसी को देखते हुए नियामक ने नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव दिया है ताकि नॉमिनी और कानूनी वारिसों को निवेश की रकम आसानी से मिल सके.

सेबी के अनुसार मौजूदा क्लेम सीमाएं काफी समय पहले तय की गई थीं. पिछले कुछ वर्षों में शेयर बाजार में तेजी और निवेश की बढ़ती वैल्यू को देखते हुए इन सीमाओं को संशोधित करना जरूरी हो गया है.

छोटे क्लेम के लिए नया STP सिस्टम
सेबी ने छोटे क्लेम के लिए ‘स्ट्रेट-थ्रू प्रोसेसिंग’ (STP) सिस्टम शुरू करने का प्रस्ताव दिया है. इसका उद्देश्य यह है कि कम राशि वाले दावों में निवेशकों के परिवारों को ज्यादा कागजी प्रक्रिया और भागदौड़ से न गुजरना पड़े. इस व्यवस्था के तहत कम मूल्य वाले क्लेम को बिना ज्यादा दस्तावेजों के तेजी से प्रोसेस किया जा सकेगा, जिससे क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया काफी तेज हो जाएगी.

दस्तावेजों को लेकर दी गई बड़ी राहत
नए प्रस्ताव के तहत दस्तावेजों से जुड़े नियमों में भी ढील दी गई है. मृत्यु प्रमाण पत्र के तौर पर अब मूल प्रमाण पत्र के अलावा नॉमिनी द्वारा सत्यापित कॉपी, नोटरी या गजटेड अधिकारी से प्रमाणित कॉपी या क्यूआर कोड वाला डिजिटल प्रमाण पत्र भी मान्य होगा. इसके अलावा कानूनी वारिस होने का प्रमाण पत्र तहसीलदार या उससे उच्च अधिकारी द्वारा जारी किया जाना पर्याप्त होगा.

क्लेम लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव
सेबी ने क्लेम के लिए तय सीमा बढ़ाने का भी सुझाव दिया है. प्रस्ताव के अनुसार फिजिकल शेयरों के लिए 10,000 रुपये और डीमैट शेयरों के लिए 30,000 रुपये तक के क्लेम को STP सिस्टम के जरिए तुरंत निपटाया जा सकेगा. वहीं आसान कागजी प्रक्रिया के लिए फिजिकल होल्डिंग की सीमा बढ़ाकर 10 लाख रुपये और डीमैट होल्डिंग की सीमा 30 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है. कंपनियों को यह भी छूट दी जा सकती है कि वे फिजिकल शेयरों के लिए इस सीमा को और बढ़ा सकें.

नॉमिनी होने पर प्रक्रिया होगी बेहद आसान
यदि निवेशक ने पहले से किसी नॉमिनी का नाम दर्ज किया हुआ है, तो क्लेम की प्रक्रिया और आसान हो जाएगी. ऐसे मामलों में नॉमिनी को केवल एक क्लेम फॉर्म, डीमैट अकाउंट की जानकारी (CML), मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान पत्र जमा करना होगा. इसके बाद क्लेम का निपटारा जल्दी किया जा सकेगा.

नॉमिनी या वसीयत नहीं होने पर क्या होगा
जिन मामलों में निवेशक ने नॉमिनी नहीं बनाया है या वसीयत नहीं है, वहां सेबी ने जोखिम के आधार पर अलग-अलग प्रक्रिया तय करने का सुझाव दिया है. छोटे दावों के लिए सिर्फ बेसिक फॉर्म और पहचान पत्र देना होगा. वहीं तय सीमा के भीतर लेकिन उससे बड़े दावों के मामलों में क्षतिपूर्ति बॉन्ड और अन्य कानूनी वारिसों से एनओसी (NOC) लेना जरूरी होगा.

21 दिनों में क्लेम निपटाना होगा
सेबी ने प्रस्ताव दिया है कि सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद 21 दिनों के भीतर क्लेम का निपटारा करना अनिवार्य होना चाहिए. यदि किसी कारण से क्लेम में देरी होती है या उसे खारिज किया जाता है, तो इसकी वजह स्पष्ट रूप से बतानी होगी.

विदेश में रहने वाले निवेशकों के लिए भी व्यवस्था
यदि निवेशक विदेश में रहता था और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उस स्थिति में संबंधित देश के बैंक अधिकारियों या भारतीय दूतावास द्वारा सत्यापित दस्तावेज भी स्वीकार किए जाएंगे. इससे विदेशी निवेशकों के परिवारों को भी क्लेम करने में आसानी होगी.

2 अप्रैल तक मांगी गई है जनता की राय
सेबी ने इन प्रस्तावों पर आम जनता और बाजार से जुड़े लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. इच्छुक लोग 2 अप्रैल तक इस पर अपनी राय दे सकते हैं. इसके बाद नियामक इन सुझावों के आधार पर अंतिम नियम लागू कर सकता है.
 


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