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Reliance Power का शेयर बना रॉकेट, 10 साल के हाई पर पहुंचा भाव! जानें वजह
Reliance Power के शेयर में तेजी केवल शेयर बाजार की चाल नहीं, बल्कि मुनाफे में सुधार, कर्ज घटाने की रणनीति और अक्षय ऊर्जा में मजबूत उपस्थिति जैसे कारणों का नतीजा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर (Reliance Power) का शेयर मंगलवार यानी 10 जून को 11 प्रतिशत उछलकर 71.35 रुपये पर पहुंच गया, जो नवंबर 2014 के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है. सुबह 10:49 बजे तक बीएसई पर यह शेयर 8 प्रतिशत की तेजी के साथ 69.96 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, जबकि इसी दौरान बीएसई सेंसेक्स में सिर्फ 0.05 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई. यह शेयर लगातार तीसरे दिन चढ़ा है और बीते तीन सत्रों में कुल 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर चुका है. वहीं, शाम को ये शेयर 10.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 71.24 रुपये के भाव पर बंद हुआ. आइए उन वजहों पर एक नजर डालते हैं, जिनसे इस शेयर में इतनी तेजी आई है?
एक महीने में 85 % की बढ़त
एक महीने में इसमें लगभग 85 प्रतिशत की जबरदस्त रैली देखने को मिली है. NSE और BSE दोनों पर ट्रेडिंग वॉल्यूम भी काफी भारी रहा, दोनों एक्सचेंज पर कुल मिलाकर 266 मिलियन से ज्यादा शेयरों की खरीद-फरोख्त हुई, जो कंपनी की कुल हिस्सेदारी का करीब 6.5 प्रतिशत है.
रिटेल निवेशकों की मजबूत पकड़
7 मई 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस पावर में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रिटेल निवेशकों के पास है. 2 लाख रुपये तक की निवेश राशि वाले रिटेल निवेशकों के पास 27.02 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि 2 लाख रुपये से अधिक निवेश करने वाले रिटेल इन्वेस्टर्स के पास 21.59 प्रतिशत हिस्सेदारी है. इसके अलावा, एलआईसी के पास 2.49 प्रतिशत और VFSI Holdings PTE LTD के पास 4.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है. प्रमोटर कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के पास अब भी 24.90 प्रतिशत स्टेक है.
Q4 में हुआ मुनाफा, कर्ज घटा और बैलेंस शीट हुई मजबूत
9 मई 2025 को घोषित वित्तीय नतीजों में रिलायंस पावर ने मार्च तिमाही (Q4FY25) में 126 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी को 397.56 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. हालांकि कंपनी की आय घटकर 2,066 करोड़ रुपये रह गई (पिछले साल 2,194 करोड़ रुपये थी), लेकिन खर्चों में कटौती और कर्ज में गिरावट के चलते मुनाफे में यह सुधार आया. FY24 में कंपनी का डेब्ट-टू-इक्विटी रेशियो 1.61:1 था, जो FY25 में घटकर 0.88:1 रह गया है, जो इंडस्ट्री के सबसे मजबूत बैलेंस शीट में से एक माना जा रहा है.
सोलर और बैटरी स्टोरेज में बड़ी डील
रिलायंस पावर की यूनिट Reliance NU Suntech ने SECI के साथ 25 साल के लिए एक पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) साइन किया है. यह एशिया का सबसे बड़ा सोलर और बैटरी एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट होगा जिसकी लागत 10,000 करोड़ रुपये है. इसमें 930 मेगावॉट की सोलर क्षमता और 465 मेगावॉट/1860 MWh की बैटरी स्टोरेज शामिल है. यह प्रोजेक्ट 3.53 रुपये प्रति यूनिट की दर से संचालित होगी. 28 मई 2025 को कंपनी की एक और यूनिट Reliance NU Energies को SJVN से 350 मेगावॉट का ISTS-कनेक्टेड सोलर प्रोजेक्ट भी मिला है, जिसमें 175 मेगावॉट/700 MWh की बैटरी स्टोरेज शामिल है. इस प्रोजेक्ट का टैरिफ 3.33 रुपये प्रति यूनिट तय हुआ है.
विदेशी कर्ज चुका कर सुधारी फाइनेंशियल स्थिति
31 दिसंबर 2024 को कंपनी की सब्सिडियरी Sasan Power ने IIFCL, UK को $150 मिलियन (करीब 1,250 करोड़ रुपये) का भुगतान किया. कंपनी का कहना है कि इससे उसकी तरलता (liquidity) में सुधार हुआ है और आने वाले समय में क्रेडिट रेटिंग बेहतर हो सकती है.
थर्मल और नॉन-फॉसिल सेक्टर दोनों में ग्रोथ के मौके
भारत सरकार 2032 तक 80 गीगावॉट नई कोल-बेस्ड थर्मल पावर कैपेसिटी जोड़ने की योजना बना रही है, जिसे रिलायंस पावर जैसे प्लेयर्स एक बड़े मौके के रूप में देख रहे हैं. इसके साथ ही भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल फ्यूल पावर क्षमता विकसित की जाए. इस दोहरी दिशा में बढ़ती ऊर्जा मांग, जैसे कि ईवी की बढ़ती संख्या और गांवों तक बिजली पहुंचाना पावर कंपनियों के लिए बड़े स्तर पर विकास के दरवाजे खोल सकती है.
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