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हर दिन कोई न कोई डील करते हैं अंबानी-अडानी , फिर इस पर क्यों है इतनी चर्चा?
देश के दो सबसे रईस कारोबारी मुकेश अंबानी और गौतम अडानी के बीच पहली बार प्रत्यक्ष रूप से कोई डील हुई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
मुकेश अंबानी और गौतम अडानी (Mukesh Ambani & Gautam Adani) तेजी से अपना कारोबार फैला रहे हैं. दोनों पिछले कुछ वक्त में इस उद्देश्य से कई देशी-विदेशी कंपनियों से हाथ मिला चुके हैं. अब दोनों की एक और डील की खबर आई है. हालांकि, इस डील की चर्चा इसलिए ज्यादा हो रही है, क्योंकि ये दोनों के बीच हुई है. पहली बार देश के इन दो सबसे अमीर कारोबारियों के बीच प्रत्यक्ष रूप से कोई डील हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries Limited) ने अडानी पावर (Adani Power) की सहयोगी कंपनी महान एनर्जन (Mahan Energen) में हिस्सेदारी खरीदी है. इस डील पर कुछ महीने पहले ही सहमति बनी थी.
RIL के पास इतनी हिस्सेदारी
रिलायंस ने महान एनर्जन के पांच करोड़ शेयर 50 करोड़ रुपए में खरीदे हैं. इस तरह उसके पास अडानी पावर की इस सहायक कंपनी में 26% हिस्सेदारी आ गई है. रिलायंस ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि उसने डील पूरी कर ली है. अंबानी की कंपनी ने 20 सालों तक 500 मेगावाट बिजली कैप्टिव यूज के लिए महान एनर्जन के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस डील की खबर सामने आते ही अडानी पावर के शेयरों में उछाल देखने को मिला है. आज के गिरावट वाले बाजार में भी यह शेयर बढ़त के साथ 727 रुपए पर कारोबार कर रहा है. इस साल अब तक अडानी की इस कंपनी का शेयर 38.94% रिटर्न दे चुका है. जबकि पिछले एक साल में यह आंकड़ा 200.35% रहा है.
क्या करती है महान एनर्जन?
महान एनर्जन की बात करें, तो इसकी स्थापना 2005 में हुई थी. महान का मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में थर्मल प्लांट है, जिसकी कैपेसिटी 1200 मेगावाट है. अडानी समूह की अडानी पावर ने मार्च 2022 में इसे 4250 रुपए में खरीदा था. महान एनर्जन की वित्तीय ठीक है. फाइनेंशियल ईयर 2023 में कंपनी की इनकम 2,730.68 करोड़ रुपए रही थी. जबकि 2022 में कंपनी ने 1393.59 करोड़ और 2021 में 692 करोड़ रुपए का रिवेन्यु दर्ज किया था. अडानी पावर महान एनर्जन की पावर जनरेशन कैपेसिटी को बढ़ाकर 4400 मेगावाट करने में जुटी है. इसके लिए अडानी समूह करीब 30,000 करोड़ का निवेश कर रहा है.
यहां भी हाथ आजमाएगा समूह
वहीं, अडानी समूह अब शिपबिल्डिंग में भी उतरने की तैयारी कर रहा है. गुजरात के मुंद्रा में समूह के फ्लैगशिप पोर्ट पर जहाज निर्माण का काम शुरू हो सकता है. दरअसल, चीन, दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में अब 2028 तक नए जहाज नहीं बन सकते, क्योंकि यहां के बड़े शिपयार्ड पूरी तरह बुक हो चुके हैं. ऐसे में जहाजी बेडे़ रखने वाली ग्लोबल कंपनियां नए जहाज बनाने के लिए भारत सहित अन्य मैन्युफैक्चरिंग साइट पर फोकस कर रही हैं. अडानी समूह इस अवसर का फायदा उठाते हुए जहाज निर्माण में हाथ आजमाने की कोशिश कर रहा है. बता दें कि मौजूदा समय में भारत जहाज बनाने के मामले में दुनिया का 20वां सबसे बड़ा देश है. दुनिया के कमर्शियल शिपबिल्डिंग मार्केट में भारत की हिस्सेदारी बस 0.05% है. जबकि सरकार ने अपने ‘मैरीटाइम इंडिया विजन 2030’ में भारत को इस मामले में टॉप-10 में पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.
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