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ब्‍याज दरों में हुए इजाफे को लेकर आरबीआई गवर्नर ने कही अहम बात, जानिए क्‍या है ये? 

मार्च में खुदरा मुद्रास्फीति 15 महीने के निचले स्तर 5.66 प्रतिशत पर आ गई और रिजर्व बैंक के कंफर्ट स्‍तर 6 प्रतिशत से नीचे आ गई थी. आरबीआई ने इस बार ब्‍याज दर नहीं बढ़ाई.

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

आरबीआई के द्वारा महंगाई को कम करने को लेकर पिछले कई टर्म तक उसे बढ़ाने के बाद इस बार स्थिर करने के बाद आरबीआई गवर्नर का एक अहम बयान सामने आया है. आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस महीने की शुरुआत में रेट-सेटिंग पैनल की बैठक में कहा था कि पिछले एक साल में मौद्रिक नीति को लेकर जो भी कदम उठाए गए हैं उनका प्रभाव अभी भी सामने आ रहा है. रिजर्व बैंक के इस बार न बढ़ाने के फैसले के बाद हालातों पर पैनी तरीके से नजर बनाए हुए है.


मिनटस ऑफ मीटिंग के जरिए आया सामने 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने इस महीने की शुरुआत में रेट-सेटिंग पैनल की बैठक में आरबीआई के पिछले कदमों को लेकर कहा था कि पिछले एक साल में मौद्रिक नीति को लेकर जो भी कदम उठाए गए हैं उनका कुल प्रभाव अभी सामने आ रहा है. ये बात गुरुवार को जारी हुई मिनट्स ऑफ मीटिंग्र में निकलकर सामने आई. आरबीआई गवर्नर ने ये भी कहा है कि इसकी बहुत बारीकी से जांच किए जाने की जरूरत है. गौरतलब बात ये है कि इस महीने की शुरुआत में मौद्रिक नीति समिति के पांच अन्य सदस्यों के साथ, इस महीने की शुरुआत में ब्‍याज दरों में वृद्धि में ठहराव लगा दिया था. 


पिछले 6 टर्म के बाद आरबीआई ने लिया विराम का फैसला 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिछले 6 टर्म से लगातार रेपो रेट में हो रही बढ़ोतरी के बीच इस बार उसे न बढ़ाने का फैसला लिया था. आरबीआई पिछले मई से लगातार रेपो रेट में इजाफा कर रहा है. मई 2022 से अब तक इसमें 250 बेसिस प्‍वॉइंट का इजाफा हो चुका है. शक्तिकांत दास ने 3-6 अप्रैल के दौरान आयोजित पिछली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के दौरान कहा था पिछले एक साल में हमारी मौद्रिक नीति कार्रवाइयों का कुल प्रभाव अभी भी सामने आ रहा है और इसकी बारीकी से निगरानी करने की जरूरत है.


पैनी नजर बनाए रखने की संभावना 
आरबीआई का अनुमान है कि 2023-24 के लिए मुद्रास्फीति नरम रह सकती है, लेकिन उसका मानना है कि लक्ष्य के प्रति उसकी स्‍पीड धीमी और लंबी रहने की संभावना है. उन्होंने कहा कि 2023-24 की चौथी तिमाही में 5.2 प्रतिशत पर अनुमानित मुद्रास्फीति अभी भी लक्ष्य से काफी ऊपर रह सकती है. इसलिए, इस समय, हमें मुद्रास्फीति में एक टिकाऊ संयम लाने पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा और साथ ही अपने पिछले कदमों के असर की निगरानी के लिए खुद को कुछ समय देना होगा. दास ने कहा, इसलिए, मेरा विचार है कि हम एमपीसी की इस बैठक में एक सामरिक विराम करते हैं.
 


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