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मई में फिर टूटा रिकॉर्ड: GST कलेक्शन 2 लाख करोड़ के पार!
GST कलेक्शन में लगातार हो रही वृद्धि देश की आर्थिक सेहत को दर्शाती है. इससे स्पष्ट होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था अब गति पकड़ रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने के बाद यह तीसरा मौका है जब मासिक जीएसटी संग्रह दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा है. मई 2025 में कुल जीएसटी कलेक्शन 2.01 लाख करोड़ रुपये रहा, जो साल-दर-साल आधार पर 16.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है. इससे पहले अप्रैल 2025 में 2.37 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सर्वाधिक जीएसटी कलेक्शन दर्ज किया गया था. आइए इस रिपोर्ट पर एक नजर डालते हैं.
राज्यवार प्रदर्शन में बड़ा अंतर, गुजरात से आगे निकला बंगाल
राज्यों के प्रदर्शन की बात करें तो जीएसटी कलेक्शन में व्यापक अंतर देखने को मिला है. महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों ने 17 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक की मजबूत वृद्धि दर्ज की है. वहीं गुजरात, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे बड़े राज्यों की वृद्धि 6 प्रतिशत के आसपास सीमित रही है. मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में औसतन 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस असमान वृद्धि के पीछे क्षेत्रीय और मौसमी कारक हो सकते हैं. उन्होंने राज्यवार डेटा के गहन विश्लेषण की आवश्यकता पर जोर दिया है.
अप्रैल-मई में कुल जीएसटी संग्रह 4.37 लाख करोड़
वित्त वर्ष 2025-26 के शुरुआती दो महीनों (अप्रैल-मई) में कुल जीएसटी संग्रह 4,37,767 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल की समान अवधि (3,83,006 करोड़ रुपये) की तुलना में 14.3% अधिक है. वहीं, पूरे वित्त वर्ष 2024-25 में जीएसटी राजस्व 22 लाख करोड़ रुपये रहा, जो इससे पिछले साल के 20.18 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 9.4% अधिक है.
मई में किससे आया कितना राजस्व?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मई 2025 में जीएसटी के तहत सेंटरल जीएसटी (CGST) ₹35,434 करोड़, स्टेट जीएसटी (SGST) ₹43,902 करोड़ इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) ₹1.09 लाख करोड़, सेस/उपकर ₹12,879 करोड़, आयात से प्राप्त जीएसटी ₹51,266 करोड़ (25.2% वृद्धि), घरेलू लेनदेन से जीएसटी ₹1.50 लाख करोड़ (13.7% वृद्धि) से राजस्व मिला है. वहीं, मई महीने में कुल रिफंड 4 प्रतिशत घटकर ₹27,210 करोड़ रहा है.
रिकॉर्ड कलेक्शन के पीछे क्या हैं वजहें?
विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी कलेक्शन में तेजी भारत में घरेलू मांग और खपत में मजबूती, सेवा और विनिर्माण क्षेत्र में तेज विस्तार, ई-इनवॉइसिंग की बढ़ती स्वीकार्यता, कर अनुपालन में सुधार, नए करदाताओं की वृद्धि और डिजिटलीकरण और पारदर्शिता में इजाफा आदि कारणों से आई है.
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