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कभी 1200 करोड़ रुपये था टर्न ओवर, पर इस उद्योग पर अब मंदी की मार; जानें कारण
रूस-युक्रेन के बीच शुरू हुए युद्ध की वजह से लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है. ऐसे में इस कारोबार में अभी तक करीब 30 से 35 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
कानपुर: कानपुर में चमड़े और सिंथेटिक से बनने वाले सेडलरी एंड हार्नेस का सबसे बड़ा बाजार यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया है. इस उद्योग से जुड़े मैनुफैक्चरर और निर्यातकों की मानें तो कानपुर में तैयार होने वाले करीब 90 फीसदी सेडलरी एंड हार्नेस का निर्यात इन्हीं तीन देशों में होता है, पर इन दिनों इस उद्योग को मंदी का सामना करना पड़ रहा है.
सेडलेरी एंड हार्नेस में मंदी की दो बड़ी वजह
साल 2020-21 और 2021-22 में कोरोना के महामारी की वजह से पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ था. लोग अपनी सभी जरूरतों को भूलकर अपनी जान बचाने में लगे हुए थे. सारे उद्योग धंधे बंद पड़े थे. ऐसे में सेडलेरी और हार्नेस के मैनुफैक्चरर और निर्यात से जुड़े Kings International Limited कानपुर के एमडी ताज आलम ने बताया कि सेडलेरी और हार्नेस के कारोबार में मंदी आने की दो सबसे बड़ी वजह है:
1. कोरोना के बाद एक तरफ जहां करीब 60 फीसदी लोगों ने ओवर खरीदारी कर ली तो वहीं 40 फीसदी लोग जमा पूंजी को निकालने से डर रहे हैं कि पता नहीं आगे क्या हालात होंगे.
2. वहीं साल 2022 की शुरुआत में रूस-युक्रेन के बीच शुरू हुए युद्ध की वजह से लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है. ऐसे में इस कारोबार में अभी तक करीब 30 से 35 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है और ये स्थिति साल 2023 के अंत तक बनी रह सकती है.
यूरोप है पसंदीदा बाजार
ताज आलम बताते हैं कि सेडलरी निर्यातकों के लिए यूरोप पसंदीदा बाजार है. यूरोप से ज्यादा अमेरिका में सेडलरी एंड हार्नेस की बिक्री है मगर यहां कीमत इनके मुताबिक नहीं मिलती. इनकी मानें तो यूरोप के खरीदार बल्क में खरीदारी तो नहीं करते मगर वो क्वालिटी पर विशेष ध्यान देते हैं, जिसके लिए वो कीमत भी अच्छी देते हैं. ऐसे में ज्यादातर निर्यातक पहले यूरोप के बाजार में जाना पसंद करते हैं.
अब सिंथेटिक मटीरियल में भी तैयार हो रहा सेडलरी एंड हार्नेस
ताज आलम ने कहा कि अब सेडलरी एंड हार्नेस में घोड़े की पीठ पर रखने वाला काठी यानी जिसपर घुड़सवार बैठता है, सिर्फ वही नहीं, बल्कि अब घोड़े के कंबल, घुड़सवार की पोशाक, घुड़सवार के जूते, जैकेट भी शामिल हो गए हैं. इनके मुताबिक वर्ष 2000 तक सेडलरी केवल चमड़े के ही बनाए जाते थे मगर उसके बाद से इसमें सिंथेटिक मटीरियल का भी इस्तेमाल किया जाने लगा है जिसमें बायोथेन, नायलॅान और पॉलिस्टर शामिल है.
उन्होंने बताया कि साल 2019 - 20 तक सेडलरी का कुल टर्न ओवर 1000 cr रुपये के आसपास था, जबकि साल 2021 - 22 में इसका टर्न ओवर 1200 cr रुपये के आसपास पहुंच गया था. मगर साल 2022 - 23 में इसका कारोबार 1000 cr रुपये के नीचे आने की उम्मीद है.
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