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RBI का नया निर्देश : अब 75% ATM से निकलेंगे केवल ₹100 और ₹200 के नोट! जानें परी डिटेल
RBI का यह कदम उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा देने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है. लेकिन इसे लागू करना बैंकों और सेवा प्रदाताओं के लिए एक गंभीर लॉजिस्टिक चुनौती बन गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देशभर के बैंकों और व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटरों को बड़ा निर्देश जारी किया है. इसके तहत अब एटीएम में 100 रुपये और 200 रुपये के नोटों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य कर दिया गया है. आरबीआई का यह कदम आम लोगों को छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की आसान पहुंच देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है. हालांकि, इस निर्देश को लागू करना बैंकों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां छोटे नोटों की आपूर्ति पहले से ही सीमित है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब 500 रुपये के नोटों की भूमिका कम होने वाली है? आइए, इस फैसले के पीछे की वजहों और इसके असर को विस्तार से समझते हैं.
सिंतबर तक 75 % ATM पर मिलेंगे केवल 100, 200 के नोट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटरों (WLAO) को निर्देश दिया है कि 30 सितंबर 2025 तक 75 प्रतिशत एटीएम से 100 रुपये और 200 रुपये के नोटों की नियमित निकासी सुनिश्चित की जाए. यह निर्देश मार्च 2026 तक 90 प्रतिशत एटीएम पर लागू करना होगा. इसका उद्देश्य आम लोगों को छोटे मूल्य वर्ग के नोटों की आसान उपलब्धता देना है.
नोटों की कैलिब्रेशन और आपूर्ति में मुश्किल
एक ओर इस कदम को उपभोक्ताओं के लिए सुविधा बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है. वहीं, बैंकों और नकदी प्रबंधन कंपनियों के लिए इस लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं होगा. फिलहाल, ज्यादातर बैंक एटीएम में चारों कैसेट में 500 रुपये के नोट भरते हैं, ताकि उन्हें बार-बार नकदी भरने की जरूरत न पड़े. विशेषज्ञों के अनुसार एटीएम में 100 रुपये या 200 रुपये के नोट भरने के लिए मशीनों को दोबारा कैलिब्रेट करना पड़ेगा, जिससे अतिरिक्त लागत और समय लगेगा. इसके अलावा, सबसे बड़ी समस्या इन नोटों की नियमित उपलब्धता है, खासकर छोटे शहरों और कस्बों में मौजूद बैंकों को काफी समस्या होने वाली है.
बदलता नोटों का अनुपात
आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2020 में जहां 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 25.4 प्रतिशत थी, वहीं यह मार्च 2025 में बढ़कर 40.9 प्रतिशत हो गई है. 200 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 5.6 प्रतिशत हो गई है, जबकि 100 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 2023 में गिरकर 13.3 प्रतिशत रह गई थी, जो अब 14.7 प्रतिशत हो चुकी है.
छोटे शहरों में स्थिति अधिक गंभीर
एक बैंक अधिकारी ने बताया कि छोटे शहरों में 100 रुपये और 200 रुपये के नोटों की उपलब्धता एक बड़ी चिंता है. बड़े बैंकों के पास करेंसी चेस्ट होते हैं, जहां सभी मूल्य वर्ग के नोट मिल सकते हैं, लेकिन छोटे बैंकों को आमतौर पर उन जमाओं पर निर्भर रहना पड़ता है जो ग्राहक शाखाओं में करते हैं और ये अधिकतर उच्च मूल्य वर्ग के होते हैं.
एटीएम खाली होने पर जुर्माना और छवि का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, एटीएम आमतौर पर 4 कैसेट वाले होते हैं और एक कैसेट में करीब 2,000 से 2,500 नोट रखे जा सकते हैं. यदि इन्हें कम मूल्य वर्ग के नोटों से भरा जाए, तो एटीएम जल्दी खाली हो सकते हैं. एक बैंक अधिकारी ने बताया कि अगर एटीएम महीने में 10 घंटे से ज्यादा खाली रहता है, तो 10,000 रुपये तक जुर्माना देना पड़ता है, जिससे बैंक की प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है.
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