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RBI का फैसला 5.5% पर रेपो दर स्थिर, विशेषज्ञों ने बताया सकारात्मक संकेत

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर को 5.5% पर स्थिर बनाए रखने का निर्णय देश की आर्थिक स्थिरता और संतुलित विकास रणनीति की ओर इशारा करता है.

रितु राणा 11 months ago

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अगस्त 2025 में रेपो दर को 5.5% पर स्थिर बनाए रखने का निर्णय लिया गया है. इस निर्णय ने रियल एस्टेट, बैंकिंग और आर्थिक नीति से जुड़े विभिन्न विशेषज्ञों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं. इस फैसले को जहां एक ओर आर्थिक स्थिरता की दिशा में संतुलित दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे उपभोक्ता विश्वास, कर्ज की वहनयोग्यता और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई के छह साल के न्यूनतम स्तर (2.1%) और 7.4% की मजबूत GDP वृद्धि के बीच यह निर्णय देश की आर्थिक स्थिति को लेकर आरबीआई के भरोसे को दर्शाता है.

रियल एस्टेट सेक्टर में दिखा भरोसा

सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लिमिटेड के संस्थापक एवं चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल का मानना है कि रेपो दर को स्थिर रखने का निर्णय आर्थिक सुधार को समर्थन देने की एक स्थिर नीति को दर्शाता है. उन्होंने कहा, “लगातार तीन बार की दर कटौती के बाद उधारी की लागत में आई कमी और अब की गई स्थिरता, रियल एस्टेट सहित अन्य प्रमुख क्षेत्रों में उपभोक्ता विश्वास बनाए रखेगी. इससे डेवलपर्स नई पेशकशों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे, जो GDP, रोजगार और शहरी बुनियादी ढांचे को और गति देगी.”

प्राइम डिवेलपमेंट्स के फाउंडर और डायरेक्टर राघव मल्होत्रा ने इस निर्णय को त्योहारों के मौसम में घरों की मांग को बढ़ाने वाला बताया. "होम लोन की EMI को लेकर उपभोक्ता का भरोसा बनेगा, खासकर पहली बार घर खरीदने वालों के लिए यह राहत की खबर है," उन्होंने कहा.

कॉन्शिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के बिजनेस हेड मोहित अग्रवाल ने कहा, “यह फैसला लग्जरी घर खरीदारों और निवेशकों के लिए सामर्थ्य बनाए रखने वाला है. एचएनआई और एनआरआई निवेशकों का रियल एस्टेट में भरोसा और भी मजबूत होगा, जिससे प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट को बल मिलेगा.”हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर ने कहा, “स्थिर ब्याज दरें होम लोन की EMI को सहज बनाएंगी, जिससे घर खरीदना आसान होगा और बाजार में मांग स्थिर बनी रहेगी. इससे डेवलपर्स को भी प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे करने में सहायता मिलेगी.”

रॉयल ग्रीन रियल्टी के , मैनेजिंग डायरेक्टर यशांक वासनने बताया कि “इस साल की शुरुआत में 100 आधार अंकों की कटौती के बाद अब दरों को स्थिर बनाए रखना यह दर्शाता है कि RBI की नीति पूर्वानुमेय और पारदर्शी बनी हुई है. इससे उपभोक्ताओं का भरोसा और बढ़ेगा और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी.”

आर्थिक और वित्तीय विशेषज्ञों की राय

क्रिसिल लिमिटेड के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी का मानना है कि “हालांकि हम रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद कर रहे थे क्योंकि महंगाई अपेक्षा से कम रही है, फिर भी अब तक की 1% दर कटौती का व्यापक असर देखने को मिल रहा है.” उन्होंने पीएम जनधन और मुद्रा योजनाओं के ज़रिए बैंकिंग पहुँच और बीमा कवरेज बढ़ाने के प्रयासों को भी सराहा.

एफआईए ग्लोबल की सह-संस्थापक एवं सीईओ, सीमा प्रेम ने फैसले को वित्तीय समावेशन के लिए सकारात्मक बताया. उनके अनुसार, “यह नीति न केवल बैंकिंग सेवाओं की पहुँच, बल्कि वहनयोग्यता और लचीलापन को भी बढ़ावा देती है. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और बिज़नेस करेस्पॉन्डेंट्स के माध्यम से देश के सबसे निचले स्तर तक वित्तीय गतिविधियों की पहुँच बन रही है.”

रेपो दर को स्थिर रखने का निर्णय केवल एक मौद्रिक नीति कदम नहीं है, बल्कि यह व्यापक रूप से उपभोक्ताओं, डेवलपर्स, निवेशकों और नीति निर्माताओं के बीच विश्वास बहाल करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा संकेत है. विशेषज्ञों की राय से स्पष्ट है कि आने वाले महीनों में रियल एस्टेट और वित्तीय गतिविधियों में स्थिरता और गति दोनों की संभावनाएं प्रबल हैं.

 


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