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RBI रिपोर्ट: दूसरी छमाही में आर्थिक मजबूती के संकेत, निवेश और विकास के चक्र की शुरुआत
RBI की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मौद्रिक नीति में नरमी, आयकर राहत और रोजगार सृजन जैसे कारकों ने एक सकारात्मक खपत-निवेश चक्र की शुरुआत कर दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 9 months ago
भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती की ओर बढ़ रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा मासिक रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि हाल के नीतिगत फैसले जैसे रीपो दर में कटौती, आयकर में राहत और रोजगार सृजन की पहलें देश में खपत और निवेश को नई गति दे रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, आर्थिक गतिविधियों में सुधार और नीति प्रोत्साहनों के चलते वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में विकास दर तेज हो सकती है. इसमें यह भी बताया गया है कि भारत का बाह्य क्षेत्र भी लचीला बना हुआ है, जो समग्र आर्थिक स्थिरता को समर्थन देता है. आइए जानते हैं इस रिपोर्ट में और क्या है?
रीपो दर में 100 आधार अंकों की कटौती से उधारी सस्ती
रिपोर्ट में कहा गया है कि रीपो रेट में फरवरी से अब तक 100 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती के कारण बैंकों की नई उधारी दरों में भी गिरावट आई है. नई कर्ज दरें 53 bps तक घटीं और घरेलू सावधि जमा दरें 101 bps कम हुईं हैं. इससे न केवल उधारी आसान हुई है, बल्कि निवेश और खपत को भी गति मिली है.
आयकर राहत और रोजगार योजनाओं से खपत को मिला बल
RBI की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि परिवारों को आयकर में दी गई राहत और रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाएं घरेलू मांग को बढ़ा रही हैं. इसके चलते उपभोग में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है, जो आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है.
साल भर में 6.5% की विकास दर संभव
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान निम्नलिखित रूप में दिया है.
- Q3 (अक्टूबर-दिसंबर): 6.6%
- Q4 (जनवरी-मार्च): 6.3%
- पूरे वित्त वर्ष के लिए अनुमान: 6.5%
हालांकि, Q1 में अनुमानित 6.5% की तुलना में वास्तविक वृद्धि 7.8% रही, जो बीते पांच तिमाहियों में सबसे ऊंचा आंकड़ा है.
जीएसटी सुधारों से कारोबार में सुविधा
रिपोर्ट में जीएसटी पर भी जोर दिया गया है. जैसे उल्टे शुल्क ढांचे को सुधारने के प्रयास, दरें सरल की गईं और खुदरा कीमतों में कमी और उपभोग मांग में तेजी का अनुमान है. इन सुधारों से व्यापार की सुगमता बढ़ी है और निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है.
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच लचीलापन
हालांकि अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने जैसे बाहरी दबाव भी बने हुए हैं, फिर भी RBI ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ने लचीलेपन का प्रदर्शन किया है. इससे चालू खाता घाटा नियंत्रण में रहने की संभावना और S&P द्वारा सॉवरिन रेटिंग में सुधार, अर्थव्यवस्था में भरोसे का संकेत है.
एलआरएस के अंतर्गत विदेश प्रेषण में गिरावट
उदार धन प्रेषण योजना (Liberalised Remittance Scheme - LRS) के अंतर्गत जुलाई 2025 में 2.45 अरब डॉलर विदेश भेजे गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.9% कम है.
मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा में गिरावट और विदेश शिक्षा पर खर्च में कमी है. RBI के अनुसार जुलाई 2024 में यह आंकड़ा 2.75 अरब डॉलर था.
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