होम / बिजनेस / RBI ने जारी किया जुलाई बुलेटिन, इस बात को लेकर जताई चिंता!
RBI ने जारी किया जुलाई बुलेटिन, इस बात को लेकर जताई चिंता!
खाने-पीने की चीजों के दाम खासकर फल और सब्जी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की चिंता भी बढ़ने लगी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बीते डेढ़ साल से महंगाई को नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसका कोई सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिल रहा है. खासकर खाने-पीने की चीजों के दाम यानी फूड इंफ्लेशन ने आरबीआई की चिंता बढ़ाई हुई है. आपको बता दें, आरबीआई ने जुलाई महीने का अपना मंथली बुलेटिन जारी किया है, जिसमें उसने महंगाई को लेकर चिंता जाहिर की है. तो आइए जानते हैं इस बुलेटिन में क्या जानकारी सामने आई है?
खाने की महंगाई बनी चिंता का विषय
आरबीआई के जुलाई बुलेटिन में देश की ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ पर बात की गई है. इसमें कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी तिमाही की शुरुआत अर्थव्यवस्था में तेजी के संकेतों के साथ हुई है. लेकिन खाने के सामान की महंगाई चिंता का विषय बनी हुई है.
रिटेल इंफ्लेशन 4 महीने के उच्च स्तर पर
बुलेटिन में ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ टाइटल से छपे एक लेख में कहा गया है, कि देश के एग्रीकल्चर सेक्टर में सुधार दिख रहा है. वहीं, गांव में खर्च बढ़ने से मांग में तेजी लाने में मदद मिली है. कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स पर बेस्ड रिटेल इंफ्लेशन में वैसे तो 3 महीने लगातार नरमी देखी गई, लेकिन जून में ये फिर एक बार बढ़ गई है. इसकी बड़ी वजह सब्जियों की कीमतों में तेजी आना है. सब्जियों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतें बढ़ने से जून में रिटेल इंफ्लेशन 4 महीने के उच्च स्तर 5.08 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मई में यह 4.8 प्रतिशत पर थी.
लंबे समय से बनी हुई है महंगाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये बुलेटिन आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा की अगुवाई में एक टीम ने लिखा है. लेख में कहा गया है, लंबे समय से ये तर्क दिया जाता रहा है कि खाने के सामान की कीमतों में तेजी अस्थायी है, लेकिन पिछले 1 साल के अनुभव से यह साबित नहीं होता. कीमतों में तेजी की ये स्थिति किसी एक झटके की तरह नहीं आई है, बल्कि ये लंबी अवधि से ऊंचाई पर ही बनी हुई है.
खाद्य वस्तुओं की कीमतों ने मुख्य महंगाई दर को दी गति
बुलेटिन में लिखा गया है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों ने हेडलाइन इंफ्लेशन (मुख्य महंगाई दर) को गति दी है. मौद्रिक नीति में किए गए सुधार और सप्लाई मैनेजमेंट का फायदा लोगों को नहीं मिला है. वहीं, ईंधन की कीमतों में आई कमी का भी असर जनता की जेब तक नहीं पहुंचा है. महंगाई को लेकर यही अनिश्चितता देखते हुए लेख में कहा गया है कि महंगाई दर को 4 प्रतिशत के लक्ष्य पर लाने के रास्ते पर बने रहना ही समझदारी होगा.
इसे भी पढ़ें-पहले से कम कीमत में OpenAI ने लॉन्च किया नया AI मॉडल, जानिए इसकी खासियत?
टैग्स