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RBI ने सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को किया लागू, कर्जदारों को मिली राहत

अब तक बैंक कर्जदार को फ्रॉड या डिफॉल्टर के तौर पर कैटेगराइज करके कानूनी कार्रवाई शुरू कर देते थे. ऐसी स्थिति में कर्जदार अपना पक्ष या बचाव अदालत की दहलीज पर ही जाकर ही कर सकते थे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

बैंक से कर्ज लेने वाले लोगों को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक बड़ी राहत देने का आदेश दिय़ा. अब एक साल बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उस आदेश को लागू भी कर दिया है. अब डिफॉल्टर या फ्रॉड के तौर पर कर्जदार को कैटेगराइज करने से पहले बैंकों को उनको पक्ष रखने का मौका देना पड़ेगा. तो आइए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश क्यों दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ये फैसला

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान कहा था कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए ऑडिट रिपोर्ट के निष्कर्ष को कर्जदारों को समझाने का मौका दिया जाना चाहिए. बैंकिंग एक्सपर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला नैसर्गिक न्याय के आधार पर था. पहले बैंक कर्जदार को अगर कोई बैंक फ्रॉड या डिफॉल्टर के तौर पर कैटेगराइज कर देता था और कानूनी कार्यवाही शुरू कर देता था तो ऐसी स्थिति में कर्जदार अपना पक्ष या बचाव अदालत की दहलीज पर ही जाकर ही कर सकता था. जबकि बैंक का मुख्य मकसद दिया हुआ कर्ज वापस हासिल करना है. ऐसे में नोटिस देने से पहले कर्जदार का पक्ष जानने में बैंकों को कोई परेशानी नहीं होगी.

कई मामलों में बैंकों ने कर्जदारों के साथ की अत्याचार
देशभर में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आए, जिनमें आरबीआई को कर्जदारों ने बैंक द्वारा उठाए गए कदम को अत्याचार करार दिया था. जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने यह साफ कर दिया कि कर्जदार को एक मौका तो जरूर दिया जाना चाहिए. 

अब बिना जवाब सुने नहीं भेजा जाएगा कारण बताओ नोटिस 
गौरतलब है कि अब बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह कर्जदारों को ऐसे मामलों में उनका पक्ष रखने के लिए तीन सप्ताह का समय देना होगा. साथ ही अब जवाब सुने बिना बैंक की ओर से कारण बताओ नोटिस नहीं जारी किया जा सकेगा.

कूलिंग पीरियड के बाद बैंक करते हैं जल्दबाजी में कार्रवाई 
बैंकिंग एक्सपर्ट्स के अनुसार प्राइवेट सेक्टर के बैंक 90 दिन के कूलिंग पीरियड के बाद सीधे कर्जदारों के खिलाफ बड़ी तेजी से कदम उठाते हैं. कई बार यह देखने को मिला है कि बैंकों की जल्दबाजी ज्यादती का कारण बनी. इसी वजह से देश कि सबसे बड़ी अदालत ने पिछले साल आरबीआई को नियमों में बदलाव करने का आदेश दिया था.

बैंक को देना चाहिए मौका
एक्सपर्ट्स के अनुसार जब कोई व्यक्ति कर्ज लेने जाता है. तब बैंक उसके सभी दस्तावेज, हैसियत समेत अन्य पहलुओं पर गौर करता है. ऐसे में जब वही व्यक्ति जब कर्ज लौटाने में कुछ वक्त तक सक्षम नहीं होता तब भी एक मौका दिया जाना चाहिए कि आखिर क्या वजह है. यही सही तरीका है. कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब बैंक की ओर से कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई और बाद में संबंधित कर्जदार की आर्थिक स्थिति जानकर भी बैंक की ओर से उसे कोई राहत नहीं दी जा सकी.

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