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RBI ने इस को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक का लाइसेंस किया रद्द, जानिए क्‍या रहे कारण 

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आदेश के अनुसार 24 अप्रैल को कारोबार को बंद होने के बाद से ये ऑर्डर लागू हो चुका है. अब ये बैंक बैंकिंग समूह की तरह की काम नहीं कर पाएगा.

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

बीते कुछ समय का अगर रिकॉर्ड देखा जाए तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कोपरेटिव बैंकों पर काफी सख्‍ती की है. देश के लगभग हर कोने में चलने वाले इन बैंको पर काफी बार जुर्माना भी लगाया है. लेकिन इस बार रिजर्व बैंक ने एक बड़ा कदम उठाते हुए केरल के अडूर को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक का बैंकिंग लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है. आरबीआई ने इस बाबत एक अधिसूचना जारी की है जिसमें कहा है कि इस बैंक का लाइसेंस 24 अप्रैल 2023 को कारोबार बंद होने के बाद रद्द माना जाएगा. रिजर्व बैंक ने संस्‍थान को नॉन बैंकिंग संस्‍थान के रूप में काम करने की अनुमति दे दी है. 

RBI ने अपने सकुर्लर में क्‍या कहा है 
केंद्रीय बैंक ने अपने आदेश में कहा है कि उसने 3 जनवरी, 1987 को अडूर को-ऑपरेटिव को बैंकिंग लाइसेंस प्रदान किया था. बैंक को ये अनुमति बैंकिंग विनियमन अधिनियम की धारा 56 के साथ पठित धारा 22 के तहत प्रदान की गई थी. 24 अप्रैल 2023 के कारोबार के बाद से इसका बैंकिंग दर्जा वापस लिया जा रहा है. आरबीआई ने अडूर को नॉन बैंकिंग संगठन की तरह काम करने की स्‍वतंत्रता दे दी है. आरबीआई की परिभाषा के अनुसार, बैंक और एनबीएफसी के बीच अंतर यह है कि बैंक एक सरकार द्वारा अधिकृत संस्था है जो लोगों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करती है, जबकि एनबीएफसी बिना बैंक लाइसेंस के लोगों को बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी है.

चार अन्‍य बैंको पर भी लगाया जुर्माना 

आरबीआई पिछले कुछ समय में अब तक कई बैंकों पर कार्रवाई कर चुका है. आरबीआई ने अडूर का लाइसेंस रद्द करने के साथ ही नियमों के उल्‍लंघन के लिए चार सहकारी बैंकों पर भी जुर्माना लगाया है. इन चार बैंकों में बॉम्बे मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक, तमिलनाडु स्टेट एपेक्स को-ऑपरेटिव बैंक, जनता सहकारी बैंक और बरन नागरिक सहकारी बैंक पर जुर्माना लगाया है. अलग-अलग तरह के नियमों के उल्‍लंघन के लिए चेन्नई स्थित द तमिलनाडु स्टेट एपेक्स को-ऑपरेटिव बैंक पर 16 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि बॉम्बे मर्केंटाइल को-ऑपरेटिव बैंक पर 13 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया ये जुर्माना इसलिए लगाया गया है क्योंकि इन्‍होंने DEAF (Depositor Education and Awareness Fund) में तय समय में पैसा ट्रांसफर नहीं किया और जब किया तो उसे देरी से जमा किया. इसलिए इन सभी पर कार्रवाई की गई है. केंद्रीय बैंक ने एक अलग सूचना जारी कर सहकारी बैंक, पुणे पर 13 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है. सेंट्रल बैंक ने कहा है कि ये जुर्माना इसलिए लगाया गया है क्‍योंकि जमा पर ब्याज दर को लेकर दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाया गया है. 

वर्ष 2022 में कई बैंकों पर हुई है कार्रवाई 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय बैंक ने 2022 में विभिन्न नियामक मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए 180 से अधिक बैंकों को दंडित किया है. दोषी सहकारी बैंकों पर कार्रवाई करने की शक्तियां प्राप्त करने के बाद से केंद्रीय बैंक द्वारा एक वर्ष में जारी किए गए जुर्माने की यह सबसे बड़ी संख्या है. 2020 में, RBI ने 22 सहकारी बैंकों को दंडित किया और यह 2021 में 124 बैंकों तक पहुंच गया था. रिजर्व बैंक को अतिरिक्त पर्यवेक्षी शक्तियां देने के लिए केंद्र ने 2021 में बैंकिंग विनियमन अधिनियम (सहकारी समितियों पर लागू) में संशोधन किया था.
 


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