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RBI ने बैंकों को दी बड़ी राहत, अधिग्रहण सौदों के लिए 75% तक कर्ज की मंजूरी
भारतीय रिजर्व बैंक के नए दिशानिर्देश कॉरपोरेट अधिग्रहण वित्तपोषण को संरचित और संतुलित ढांचे में आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक ने कॉरपोरेट अधिग्रहण से जुड़े वित्तपोषण नियमों में अहम बदलाव करते हुए बैंकों को सूचीबद्ध और असूचीबद्ध कंपनियों के अधिग्रहण के लिए कर्ज देने की अनुमति दे दी है. हालांकि नियामक ने जोखिम प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए कर्ज की सीमा कुल सौदे मूल्य के 75% तक तय की है.
मूल्य सृजन पर जोर, अल्पकालिक फायदे से दूरी
भारतीय रिजर्व बैंक ने अंतिम दिशानिर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि बैंक केवल उन्हीं अधिग्रहण सौदों को वित्तपोषित करें जिनमें दीर्घकाल में अधिग्रहण करने वाली कंपनी के लिए मूल्य सृजन की ठोस संभावना हो. केवल अल्पकालिक लाभ या वित्तीय पुनर्गठन के उद्देश्य से दिए जाने वाले कर्ज को हतोत्साहित किया गया है.
75% तक ही मिलेगा ऋण
नए नियमों के अनुसार बैंक अधिग्रहण सौदे के कुल मूल्य का अधिकतम 75% तक ही कर्ज दे सकेंगे. इससे बैंकों की जोखिम हिस्सेदारी सीमित रहेगी और कंपनियों की अपनी पूंजी की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी.
किन कंपनियों को मिलेगा लाभ
नियामक के मुताबिक अधिग्रहण करने वाली कंपनी सूचीबद्ध हो या असूचीबद्ध, उसकी न्यूनतम नेटवर्थ 500 करोड़ रुपये होनी चाहिए. साथ ही बीते तीन वित्त वर्षों में उसे लगातार कर पश्चात मुनाफा हुआ होना अनिवार्य है. असूचीबद्ध कंपनियों के लिए निवेश ग्रेड रेटिंग बीबीबी- या उससे ऊपर होना जरूरी होगा. अधिग्रहण की प्रक्रिया खरीद समझौते की तारीख से 12 महीनों के भीतर पूरी करनी होगी.
एनबीएफसी और एसपीवी को भी राहत
बैंक अधिग्रहणकर्ता की एनबीएफसी इकाई या विशेष प्रयोजन इकाई (एसपीवी) को भी वित्त उपलब्ध करा सकेंगे. इससे बड़े कॉरपोरेट समूहों को संरचित अधिग्रहण सौदे करने में सुविधा मिलेगी.
टियर-1 पूंजी सीमा का प्रस्ताव हटाया
अंतिम नियमों में उस मसौदा प्रावधान को हटा दिया गया है, जिसमें कहा गया था कि ऐसे कर्ज में बैंक का कुल निवेश उसकी टियर-1 पूंजी के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए. इस बदलाव से बैंकों को अधिक लचीलापन मिलेगा.
संबंधित पक्षों के बीच नहीं होना चाहिए सीधा संबंध
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिग्रहण करने वाली और लक्षित कंपनी के बीच सीधा संबंध नहीं होना चाहिए. यदि अधिग्रहणकर्ता के पास पहले से नियंत्रण है, तो कर्ज केवल अतिरिक्त शेयरों की खरीद के लिए ही दिया जाएगा.
कॉरपोरेट सौदों को मिल सकता है बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से कॉरपोरेट अधिग्रहण गतिविधियों को गति मिल सकती है. पूंजी की उपलब्धता बढ़ने से रणनीतिक विस्तार, बाजार हिस्सेदारी में वृद्धि और उद्योगों में समेकन की प्रक्रिया तेज हो सकती है. साथ ही बैंकों के लिए भी यह एक नया अवसर क्षेत्र बन सकता है, बशर्ते जोखिम का आकलन संतुलित ढंग से किया जाए.
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