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RBI ने 4 NBFCs का रजिस्ट्रेशन किया कैंसिल, जानिए क्या रही वजह
इंस्टैंट लोन ऐप (Instant Loan App) के ग्राहकों के उत्पीड़न की लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच रिजर्व बैंक ने 4 NBFCs का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 4 नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों यानी NBFCs के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (CoR) कैंसिल कर दिए हैं. इसमें Kanva Shree Credit Private Limited, Williamson Magor & Co Ltd, Galaxy Capital Finance Limited और SRS Finance Limited शामिल है.
चारों NBFCs काम नहीं कर सकेंगी
रिजर्व बैंक ने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट कैंसिल करने के कारणों का खुलासा नहीं किया है. रिजर्व बैंक के मुताबिक RBI Act, 1934 के सेक्शन 45-I के क्लॉज (a) के तहत अब ये चारों कंपनियां NBFCs का कारोबार नहीं कर सकेंगी.
मिल रहीं थीं उत्पीड़न की शिकायतें
ये कैंसिलेशन ऐसे समय पर आया है जब इन कंपनियों के खिलाफ इंस्टैंट लोन ऐप इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के उत्पीड़न की शिकायत मिली. दरअसल ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जिसमें रिजर्व बैंक को पता चला कि ऐप बेस्ड लोन देने वाली कंपनियां कर्ज वसूली को लेकर ग्राहकों का उत्पीड़न कर रही हैं उन्हें धमका रही हैं. मई में भी गलत तरीके से काम करने वाली 5 NBFCs का रजिस्ट्रेशन रिजर्व बैंक ने कैंसिल किया था.
3 NBFCs ने रजिस्ट्रेशन सरेंडर किया
इन 4 NBFCs के अलावा, रिजर्व बैंक ने बताया है कि 3 और NBFCs भी हैं जिन्होंने अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर किया है, जिसमें PKC Credit Pvt Ltd, Gajanand Lefin Pvt Ltd और Harita Malini Private Limited शामिल हैं, हालांकि रिजर्व बैंक ने इसकी भी वजह नहीं बताई है.
लोन रिकवरी एजेंट्स करते हैं उत्पीड़न
आपको बता दें कि RBI लोन रिकवरी एजेंट्स के तौर तरीकों पर खास नजर रख रहा है. 17 जून को रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांता दास ने भी सख्त लहजे में कहा था कि ग्राहकों का उत्पीड़न कर रहे रिकवरी एजेंट्स के मामलों को केंद्रीय बैंक बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने बताया कि रिजर्व बैंक को ऐसी शिकायते भी मिली हैं जिसमें रिकवरी एजेंट्स आधी रात को ग्राहकों के घर पर पहुंचे हैं. रिकवरी एजेंट्स ग्राहकों से गंदी भाषा में बात करते हैं.
रिकवरी एजेंट्स की ओर से इस तरह का बर्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता.
RBI ने पिछले साल जनवरी में एक वर्किंग ग्रुप बनाया था. इस ग्रुप का काम था कि वो डिजिटल लेंडिंग ऐप्स के मामलों को देखे और नियमों को लेकर अपने सुझाव दे. ये ग्रुप ग्राहकों की सुरक्षा और बिगड़ते कारोबारी
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