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InvIT सेक्टर में तेज ग्रोथ, लेकिन कंसंट्रेशन और घरेलू निवेश की कमी बनी चिंता : रिपोर्ट

InvIT सेक्टर में तेज ग्रोथ के बावजूद कंसंट्रेशन, वैल्यूएशन और घरेलू निवेशकों की कम भागीदारी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं. दीर्घकालिक और टिकाऊ विकास के लिए सेक्टर को निवेशकों के विविधीकरण, बेहतर फंडिंग विकल्प और मजबूत संरचनात्मक सुधारों की जरूरत होगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ ही कुछ संरचनात्मक चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) की रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर में मजबूत विस्तार के बावजूद कंसंट्रेशन रिस्क और घरेलू निवेशकों की सीमित भागीदारी दीर्घकालिक विकास पर सवाल खड़े कर रही है.

AUM में तेज बढ़ोतरी का अनुमान
रिपोर्ट के मुताबिक, InvITs का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) FY26 तक बढ़कर ₹7.25–7.50 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है, जो FY25 में लगभग ₹6.25 लाख करोड़ था. FY22 के करीब ₹3 लाख करोड़ के मुकाबले यह लगभग दोगुना विस्तार है. यह ग्रोथ सड़कों, ट्रांसमिशन, वेयरहाउसिंग और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे सेक्टर्स में पोर्टफोलियो विस्तार से आएगी.

कंसंट्रेशन बना बड़ी चुनौती
तेजी के बावजूद सेक्टर में विविधता की कमी बनी हुई है. 31 मार्च 2025 तक टेलीकॉम और रोड सेक्टर मिलकर कुल AUM का लगभग 90% हिस्सा रखते हैं. इसमें टेलीकॉम का योगदान करीब ₹3.06 लाख करोड़ और सड़कों का ₹2.46 लाख करोड़ है. यह दर्शाता है कि InvITs की संख्या बढ़ने के बावजूद सेक्टर कुछ गिने-चुने क्षेत्रों पर निर्भर है.

सड़कों से आएगी अगली ग्रोथ
रिपोर्ट के अनुसार, अगला ग्रोथ फेज ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स के मोनेटाइजेशन से आएगा, खासकर सड़क सेक्टर में. हाईवे प्रोजेक्ट्स में Hybrid Annuity Model (HAM) के चलते मजबूत पाइपलाइन बनी हुई है. मध्यम अवधि में इससे करीब ₹2 लाख करोड़ के मोनेटाइजेशन की संभावना है.

वैल्यूएशन और डील फ्लो पर दबाव
हालांकि, सड़क सेक्टर में उच्च कर्ज और प्रतिस्पर्धी बोली के कारण वैल्यूएशन पर दबाव है. टोल रोड्स में परिपक्व एसेट्स की कमी भी भविष्य में डील फ्लो को सीमित कर सकती है.

ट्रांसमिशन और रिन्यूएबल में अवसर और बाधाएं
ट्रांसमिशन सेक्टर में लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट और रेगुलेटेड टैरिफ के चलते स्थिर आय मिलती है, लेकिन मजबूत बैलेंस शीट वाली कंपनियां इन एसेट्स को InvIT में लाने के लिए ज्यादा उत्साहित नहीं हैं. वहीं, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में वैश्विक निवेशकों की रुचि बनी हुई है और FY30 तक 460 गीगावॉट क्षमता का लक्ष्य बड़ा अवसर देता है. लेकिन PPA में देरी, बैटरी स्टोरेज से जुड़े जोखिम और ट्रांसमिशन बाधाएं इसकी गति को प्रभावित कर सकती हैं.

वेयरहाउसिंग: छोटा लेकिन उभरता सेगमेंट
वेयरहाउसिंग सेक्टर का AUM फिलहाल करीब ₹11,500 करोड़ है. ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स की मांग से इसमें ग्रोथ हो रही है, हालांकि जमीन और निर्माण लागत में वृद्धि चुनौती बनी हुई है.

फंडिंग में विदेशी निवेशकों का दबदबा
FY23 से FY25 के बीच InvITs ने लगभग ₹88,000 करोड़ की इक्विटी जुटाई है और FY26 में ₹16,500 करोड़ और जुटाने की उम्मीद है. इसमें विदेशी निवेशकों का दबदबा है, जिनकी हिस्सेदारी करीब 55% है.

इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेश केवल 7% के आसपास है, जो भारत के वित्तीय सिस्टम में बड़े अवसर की ओर इशारा करता है. रिटेल निवेशकों की भागीदारी अभी शुरुआती चरण में है.

स्थिर कर्ज प्रोफाइल, लेकिन सुधार की जरूरत
FY26 में सेक्टर का डेब्ट-टू-एंटरप्राइज वैल्यू अनुपात लगभग 49% रहने का अनुमान है. FY25 तक कुल बकाया कर्ज ₹2.82 लाख करोड़ था, जिसमें ज्यादातर बैंक लोन शामिल हैं. बॉन्ड मार्केट की भागीदारी अभी सीमित है.

 


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