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Toy Sector में QCO लागू करने के लिए सरकार को लेना पड़ा कड़ा फैैसला

QCO आने के बाद इसके निर्यात में जहां इजाफा हुआ है वहीं आयात में 70 प्रतिशत तक की कमी देखने को मिली है. सरकार का मानना है कि QCO ऐसी चीज है जो बेहतर क्‍वॉलिटी

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

केन्‍द्र सरकार इन दिनों देश में अलग-अलग प्रोडक्‍ट को लेकर  QCO लाने का प्रयास कर रही है. हमारे देश में अभी तक 300 से ज्‍यादा प्रोडक्‍ट पर QCO आ चुका है जबकि सरकार कई और प्रोडक्‍ट पर QCO की तैयारी कर रही है. जिन सेक्‍टरों में QCO आया है उनमें टॉय इंडस्‍ट्री भी शामिल है, जिसमें सरकार QCO को ला चुकी है. लेकिन क्‍या आप जानते हैं इस इंडस्‍ट्री में सरकार के लिए QCO लाना इतना आसान नहीं रहा. लेकिन लंबे कंसल्‍टेशन के बाद आखिरकार सरकार ने इसमें QCO लॉन्‍च कर ही दिया और आंकड़े बता रहे हैं उसके बाद इस सेक्‍टर में कितने बदलाव आए हैं. 

क्‍यों आ रहा है QCO 
सबसे पहले आपको बताते हैं कि आखिर ये QCO (Qualiyty Control Order) होता क्‍या है. दरअसल QCO एक तरह के क्‍वॉलिटी नार्म्‍स हैं. इसके लागू होने के बाद इंडस्‍ट्री को अपने प्रोडक्‍ट को एक तय मानक से उपर ही बनाना होता है. अगर वो ऐसा नहीं करते हैं तो उनके उपर पेनल्‍टी लगाए जाने से लेकर कानूनी कार्रवाई तक की जाती है. मौजूदा समय में सरकार की ओर से इस नियम का पालन न करने पर 1 साल तक की जेल और जुर्माना तय किया गया है. अगर कोई प्रोडक्‍टर बनाने वाली कंपनी बार-बार ऐसा ऑफेंस करती है तो उसकी सजा और बढ़ती चली जाती है. 

आखिर टॉय सेक्‍टर में क्‍या सामने आई परेशानी 
दरअसल टॉय सेक्‍टर में इसे लाना इतना आसान नहीं रहा. केन्‍द्रीय उपभोक्‍ता मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार की ओर टॉय इंडस्‍ट्री में QCO को पहले ही नोटिफाई कर दिया गया था. लेकिन जब भी उसे लागू करने को लेकर मीटिंग होती तो इंडस्‍ट्री के कई लोगों की ओर से कह दिया जाता था कि अगर इसे लागू किया गया तो देश में बच्‍चों के लिए खिलौने की कमी हो जाएगी. उन्‍होंने कहा कि मुझे डराने की कोशिश की गई कि बच्‍चों को खिलौने नहीं मिलेंगे.

छोटे बच्‍चों की बात सुनकर मैं भी डर जाता था लेकिन जब मैंने देखा कि ये बार-बार हो रहा है तो हमने उसके बाद तय कर लिया कि आखिर इसे लागू करना है. इसके बाद सरकार की ओर से उसे लागू कर दिया गया और बाकायदा खिलौनों की कमी को चेक करने के लिए भी उनके मंत्रालय ने कई स्‍तर पर कोशिश की. उन्‍होंने कहा कि उन्‍होंने देश में कई जगह मंत्रालय की टीमों को निरीक्षण के लिए भेजा जिसमें दिल्‍ली के कई बाजारों से लेकर मुंबई के ओपेरा हाउस में भी उन्‍होंने टीमों को भेजा. जहां जाने पर पता चला कि किसी भी तरह की कोई कमी नहीं थी.  उन्होंने बताया कि जांच में ये भी पता चला कि इस मुद्दे पर हो हल्ला करने वाला एसोशिएशन असल में मैन्यूफैक्चरर्स का थी ही नहीं, वो इंपोर्टर्स थे।

टॉय सेक्‍टर में कब आया QCO
टॉय सेक्‍टर में QCO को लागू करने के लिए सरकार ने इसका नोटिफिकेशन 2020 में लागू किया और उसके बाद सरकार की ओर से इसे 2021 में लागू कर दिया. सरकार का कहना है कि किसी भी इंडस्‍ट्री में QCO इंडस्‍ट्री के साथ पूरी कंसल्‍टेशन के बाद ही लाया जाता है.लेकिन इससे पहले सरकार ने जब इसका मसौदा तैयार किया तो इंडस्‍ट्री के साथ कंसल्‍टेशन काफी पहले ही शुरु कर दिया था। जानकारी के अनुसार सरकार की ओर से इंडस्‍ट्री के साथ लगभग दो साल से ज्‍यादा समय तक कंसल्‍टेशन किया गया. 

QCO के बाद कितना आया बदलाव 
टॉय सेक्‍टर में QCO लाने का फायदा ऐसे देखने में मिला कि जहां पहले हमारे देश में बड़ी संख्‍या में खिलौने आयात किए जाते थे वहीं दूसरी ओर इसके लागू होने के बाद जैसे ही बेहतरीन किस्‍म के खिलौने बनने शुरु हुए तो नतीजे बदल गए. परिवर्तन इतना बड़ा सामने आया कि आयात में 70 प्रतिशत तक की कमी देखने को मिली. वर्ष 2018-19 में जहां खिलौनों का आयात 371 मिलियन डॉलर था वो वर्ष 2021-22 के दौरान घटकर 110 मिलियन डॉलर तक आ गया, जो 70.35 प्रतिशत तक की कमी को दिखाता है.

इसी तरह एचएस कोड 9503 के लिए, खिलौना आयात में और तेजी से कमी आई है जो वित्त वर्ष 2018-19 के 304 मिलियन डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान घट कर 36 मिलियन डॉलर पर आ गया. यही नहीं इसी अवधि के दौरान निर्यात (Export) में 61.38 प्रतिशत का उछाल देखा गया है. एचएस कोड 9503, 9504 और 9503 के लिए खिलौना निर्यात (Export) में वित्त वर्ष 2018-19 के 202 मिलियन डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 326 मिलियन डॉलर रहा जो 61.39 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है. एचएस कोड 9503 के लिए, खिलौनों का निर्यात (Export)  बढ़कर वित्त वर्ष 2018-19 के 109 मिलियन डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान बढ़ कर 177 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया.
 


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