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Multiplex में क्यों महंगे मिलते हैं पॉपकॉर्न, PVR के चेयरमैन अजय बिजली ने बताया इसका कारण
वीकेंड पर इनकी कीमतें और बढ़ जाती है. पॉपकॉर्न जैसी सबसे पसंदीदा स्नैक की कीमत में 200 रुपये से कम नहीं होती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः जब कोई दर्शक किसी मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने के लिए जाता है तो महंगा टिकट खरीदने के बाद उसको जो सबसे ज्यादा अखरता है, वो है सिनेमाहॉल के अंदर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमत. वीकेंड पर इनकी कीमतें और बढ़ जाती है. पॉपकॉर्न जैसी सबसे पसंदीदा स्नैक की कीमत में 200 रुपये से कम नहीं होती है. हालांकि अब यह पसंदीदा स्नैक भी आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है, क्योंकि कीमतें काफी बढ़ गई हैं. खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतें महंगी होने से मल्टीप्लेक्स की आलोचना भी बहुत हो रही है.
पीवीआर के अजय बिजली ने बताया कारण
इस संबंध में देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन पीवीआर के चेयरमैन और एमडी अजय बिजली ने कहा कि सिनेमाघरों में स्नैक्स की उच्च कीमतों के खिलाफ बोलने के लिए उपभोक्ताओं को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है. टिकट के बाद एक मल्टीप्लेक्स के लिए सबसे बड़ा कमाई का साधन खान-पान की वस्तुएं ही हैं. बिजली ने कहा कि खाद्य और पेय पदार्थों (एफएंडबी) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा क्योंकि भारत अभी भी "सिंगल स्क्रीन से मल्टीप्लेक्स को बदलने के चरण में है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशनल कॉस्ट को पूरा करने के लिए मल्टीप्लेक्स में स्नैक्स ऊंचे दामों पर बेचे जाएंगे.
1500 करोड़ का है एफएंडबी बिजनेस
बिजली ने कहा कि देश भर में मल्टीप्लेक्स चेन में फूड एंड बीव्ररेज (एफएंडबी) का बिजनेस 1500 करोड़ रुपये का है. चूंकि मल्टीप्लेक्स में अधिक स्क्रीन हैं, इसलिए मल्टीपल प्रोजेक्शन रूम और साउंड सिस्टम की आवश्यकता के कारण लागत "4 से 6 गुना" बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि एयर कंडीशनिंग की आवश्यकता भी बढ़ गई है क्योंकि पूरे हॉल सहित लॉबी एरिया भी एयरकंडीशन होता है.
पीवीआर ने किया था आईनॉक्स का अधिग्रहण
इस साल की शुरुआत में देश की दो प्रमुख मल्टीप्लेक्स चेन - पीवीआर और आईनॉक्स - ने अपने मर्जर की घोषणा की थी. मर्जर के वक्त यह वादा किया गया था कि यह वेंचर दर्शकों के लिए गेम चेंजर साबित होगा और संयुक्त इकाई का लक्ष्य अंततः 1,500 स्क्रीन होना है. उपभोक्ताओं के लिए आक्रामक कीमत वाले टिकटों और एक बेहतर मूवी देखने के अनुभव के साथ, उनका लक्ष्य उस बाजार पर फिर से कब्जा करना है जिसे उन्होंने पिछले दो वर्षों में शीर्ष (ओटीटी) खिलाड़ियों को सौंप दिया था. अजय बिजली संयुक्त इकाई (जिसे पीवीआर आईनॉक्स लिमिटेड कहा जाएगा) के प्रबंध निदेशक हैं.
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